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Bijnor News: तापमान में उतार-चढ़ाव से धान व गन्ना बीमारी से ग्रस्त

Mon, 21 Aug 2023 12:53 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 21 Aug 2023 12:53 AM IST
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Paddy and sugarcane suffer from disease due to temperature fluctuations
बिजनौर। वर्तमान समय में तापमान में उतार-चढ़ाव से मनुष्य ही फसलों पर बीमारी का खतरा मंडरा रहा है। गन्ने में शीर्ष भेदक कीट (टाॅप बोरर) एवं पोका बोइंग का प्रकोप दिखाई दे रहा है। ये बीमारी लगने पर गन्ने के शीर्ष वाली पत्ती पर समान दिशा में छेद दिखाई देते हैं। उधर धान की फसल में खैरा रोग, दीमक एवं जड़ की सूडी बीमारी का खतरा बना हुआ है।
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- 12 बीघा में गन्ने में लगा लाल सड़न रोग
स्योहारा क्षेत्र के ग्राम गैंडाजूड़ा निवासी किसान इंद्रकुमार शर्मा ने बताया कि उनकी 12 बीघा गन्ना पौधा की फसल में लाल सड़न रोग लग गया। गन्ने में यह रोग बहुत हानिकारक रूप लेता जा रहा है। इस रोग से ग्रसित गन्ने का नियंत्रण कर पाना मुश्किल हो रहा है। किसान का कहना है आसपास के खेत में खड़ी गन्ना फसल भी बीमारी की चपेट में है।
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- ऐसे करें धान का बचाव
जिला कृषि रक्षा अधिकारी मनोज रावत ने बताया कि धान में दीमक एवं जड़ की सूडी की बीमारी दिखाई दे तो किसान क्लोरपायरीफाॅस 20 प्रतिशत, ईसी 2.50 लीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से सिंचाई के पानी के साथ प्रयोग करें।
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खैरा रोग के लिए पांच किग्रा जिंक सल्फेट 21 प्रतिशत को 20 से 25 किग्रा यूरिया में मिलाकर बिखेर दें। अथवा 2.50 किग्रा बुझे हुए चुने को प्रति हेक्टेयर की दर 1000 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।
- गन्ना फसल भी बीमार
जिला कृषि रक्षा अधिकारी मनोज रावत ने बताया कि इस समय गन्ने में पोका बोइंग का क्लोरोटिक चरण दिखाई दे रहा है। इसमें पौधों की शीर्ष वाली पत्ती के आधार पर पीला रंग आ जाता है और पत्ती लिपट कर निकलती है। इसकी रोकथाम के लिए कार्बेण्डाजिम 12 प्रतिशत प्लस मैन्कोजेब 63 प्रतिशत डब्ल्यूपी की 400 से 500 ग्राम मात्रा का प्रति एकड़ की दर से स्प्रे करें।


शीर्ष भेदक कीट की रोकथाम के लिए कार्बोसल्फान 25 प्रतिशत ईसी की 400 से 500 एमएल मात्रा का 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ की दर से स्प्रे करें या फिप्रोनिल 5 प्रतिशत एससी की 600 से 800 एमएल मात्रा का 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ की दर से स्प्रे करें। वहीं लाल सडन रोग की रोकथाम के लिए कार्बेण्डाजिम 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी 300 से 400 ग्राम मात्रा प्रति एकड़ का स्प्रे करें।
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