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गन्ने के बाद धान का रकबा बढ़ा, यूरिया की खपत होगी ज्यादा
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गन्ने के बाद धान का रकबा बढ़ा, यूरिया की खपत होगी ज्यादा
बिजनौर। गन्ने की फसल के बाद अब धान की फसल का रकबा भी बढ़ गया है। धान की फसल के लिए समय पर यूरिया उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग सक्रिय है। बाहर से यूरिया की रैक मंगवाई जा रही हैं। किसानों को यूरिया की कमी नहीं आने दी जाएगी। मांग से ज्यादा यूरिया दुकानों व कृषि विभाग के गोदामों पर उपलब्ध रहेगा।
गन्ने का रकबा 25 हजार हेक्टेयर से भी अधिक बढ़ा है। यह एक अच्छी पेराई क्षमता वाली चीनी मिल के बराबर है। अब किसानों ने धान का रकबा भी बढ़ा दिया है। धान का रकबा दो हजार हेक्टेयर से ज्यादा बढ़ा है। गन्ने का रकबा बढ़ने की वजह से यूरिया की खपत भी बहुत ज्यादा बढ़ गई थी। कृषि विभाग को किसानों को खाद उपलब्ध कराने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। इसके बावजूद धामपुर में कुछ क्षेत्र में यूरिया की किल्लत बन गई थी। धान के खेतों को यूरिया मिलने में कोई परेशानी न हो इसके लिए कृषि विभाग ने अभी से कमर कस ली है। धान के बढ़े रकबे के हिसाब से कृषि विभाग दूसरे जिलों से रैक मंगवाएगा। पहले ही सप्ताह में साढ़े पांच हजार मीट्रिक टन की दो रैक मंगवाई जा रही हैं।
सब्जी, चारे की फसल की कम
माना जा रहा है कि धान व गन्ने का जो रकबा बढ़ा है उसके बदले में किसानों ने चारे व सब्जियों की खेती में कमी की है। इनमें यूरिया का अधिक प्रयोग नहीं होता है। यानि ऐसी फसल किसानों ने बोनी बंद की जिनमें यूरिया की कम जरूरत होती है और ऐसी फसल बोई जिनमें यूरिया की लागत किसान ज्यादा लगा रहे हैं। इस वजह से यूरिया की किल्लत हुई थी।
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नहीं होने देंगे परेशानी
जिला कृषि अधिकारी डा.अवधेश मिश्र के अनुसार किसानों को कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी। साढ़े पांच हजार मीट्रिक टन की शुरूआती खेप मंगवाई जा रही है। मांग के अनुसार ही यूरिया दिलाया जाएगा।
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बिजनौर। गन्ने की फसल के बाद अब धान की फसल का रकबा भी बढ़ गया है। धान की फसल के लिए समय पर यूरिया उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग सक्रिय है। बाहर से यूरिया की रैक मंगवाई जा रही हैं। किसानों को यूरिया की कमी नहीं आने दी जाएगी। मांग से ज्यादा यूरिया दुकानों व कृषि विभाग के गोदामों पर उपलब्ध रहेगा।
गन्ने का रकबा 25 हजार हेक्टेयर से भी अधिक बढ़ा है। यह एक अच्छी पेराई क्षमता वाली चीनी मिल के बराबर है। अब किसानों ने धान का रकबा भी बढ़ा दिया है। धान का रकबा दो हजार हेक्टेयर से ज्यादा बढ़ा है। गन्ने का रकबा बढ़ने की वजह से यूरिया की खपत भी बहुत ज्यादा बढ़ गई थी। कृषि विभाग को किसानों को खाद उपलब्ध कराने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। इसके बावजूद धामपुर में कुछ क्षेत्र में यूरिया की किल्लत बन गई थी। धान के खेतों को यूरिया मिलने में कोई परेशानी न हो इसके लिए कृषि विभाग ने अभी से कमर कस ली है। धान के बढ़े रकबे के हिसाब से कृषि विभाग दूसरे जिलों से रैक मंगवाएगा। पहले ही सप्ताह में साढ़े पांच हजार मीट्रिक टन की दो रैक मंगवाई जा रही हैं।
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सब्जी, चारे की फसल की कम
माना जा रहा है कि धान व गन्ने का जो रकबा बढ़ा है उसके बदले में किसानों ने चारे व सब्जियों की खेती में कमी की है। इनमें यूरिया का अधिक प्रयोग नहीं होता है। यानि ऐसी फसल किसानों ने बोनी बंद की जिनमें यूरिया की कम जरूरत होती है और ऐसी फसल बोई जिनमें यूरिया की लागत किसान ज्यादा लगा रहे हैं। इस वजह से यूरिया की किल्लत हुई थी।
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नहीं होने देंगे परेशानी
जिला कृषि अधिकारी डा.अवधेश मिश्र के अनुसार किसानों को कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी। साढ़े पांच हजार मीट्रिक टन की शुरूआती खेप मंगवाई जा रही है। मांग के अनुसार ही यूरिया दिलाया जाएगा।