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पूर्व सांसद ओमवती और उनके पति आरके सिंह कांग्रेस में शामिल
Sat, 09 Mar 2019 10:38 PM IST
NAVEEN GUPTA
ब्यूरो, अमर उजाला/ बिजनौर
ब्यूरो, अमर उजाला/ बिजनौर
Published by: NAVEEN GUPTA
Updated Sat, 09 Mar 2019 10:38 PM IST
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दिल्ली में कांग्रेस में शामिल होने के बाद प्रियंका गांधी के साथ पूर्व मंत्री ओमवती पूर्व मंत्री ओमवती व उनके पति आरके सिंह। व उनके पति आरके सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर की पूर्व सांसद ओमवती और उनके पति सेवानिवृत्त आईएएस आरके सिंह ने भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है। दिल्ली में सोनिया गांधी, प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर और बिजनौर लोकसभा प्रभारी दामोदर राय के सामने उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। दोनों ही नगीना सुरक्षित सीट से टिकट के बड़े दावेदार हैं।
ओमवती ने अपनी सियासत की शुरूआत कांग्रेस से की थी। वे 1985 में नगीना सीट से विधायक बनीं। इसके बाद सपा में चली गईं। सपा के टिकट पर 1996 में विधायक और 1997 में सांसद बनीं। 2002 में सपा से विधायक बनीं। 2007 में वे सपा का दामन छोड़कर बसपा में चली गईं और चुनाव जीतकर विधायक बनीं। बसपा सुप्रीमो मायावती ने उन्हें राज्यमंत्री बनाया। 2009 के लोकसभा चुनाव में उनके पति आरके सिंह भी सक्रिय राजनीति में आ गए। उन्होंने बसपा के टिकट पर नगीना सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। इसके बाद ओमवती भी 2012 के चुनाव में बसपा के टिकट से विधानसभा चुनाव हार गईं। 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी लहर में दोनों पति-पत्नी भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा में दोनों ही लोकसभा टिकट के बड़े दावेदार थे, लेकिन भाजपा ने मेरठ के रहने वाले डॉ. यशवंत सिंह को चुनाव मैदान में उतारा।
इसके बाद भी दोनों भाजपा में ही रहे। भाजपा ने उन्हें अनुसूचित समाज के चेहरे के रूप में अनेक अभियान में उतारा। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने ओमवती को चुनाव मैदान में उतारा, लेकिन ओमवती सपा विधायक मनोज पारस से लगातार दूसरी बार चुनाव हार गईं। इसके बाद भी ओमवती, आरके सिंह कुछ समय के लिए भाजपा में सक्रिय रहे। लेकिन कुछ दिनों से दोनों ने भाजपा के कार्यक्रमों से दूरी बनानी शुरू कर दी थी। सूत्रों के मुताबिक दोनों ने बसपा में जाने की भी कोशिश की, लेकिन बसपा ने नगीना सीट से पहले ही गिरीश चंद्र को प्रत्याशी बना दिया है। भाजपा के खिलाफ बने महागठबंधन में कांग्रेस के शामिल न होने के बाद से उनके कांग्रेस में जाने के कयास लगाए जा रहे थे। शनिवार को दोनों ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली। वहीं, आर के सिंह ने बताया की वह भाजपा में घुटन महसूस कर रहे थे। भाजपा के जिला नेताओं द्वारा उन्हें मान सम्मान भी नहीं दिया जा रहा था। इसलिए वह दोनों भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए।
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प्रियंका गांधी के प्रचार में उतरने से दावेदारों की उमड़ी
बिजनौर। चुनावी मैदान में प्रियंका गांधी के आते ही कांग्रेस और कांग्रेेसियों में जान आ गई। दोनों सीटों पर फिर से टिकट मांगने वाली की संख्या बढ़ी है। बिजनौर व नगीना सीट पर टिकट मांगने के लिए आवेदन आ रहा है।
कांग्रेस की हालत जिले में काफी समय से बहुत पतली है। चुनाव के लिए भी ज्यादा प्रत्याशी मैदान में नहीं आते हैं। 2017 के लोकसभा चुनाव में सपा व कांग्रेस का गठबंधन हुआ था। लेकिन मजबूत प्रत्याशी न होने पर कांग्रेस को नहटौर, चांदपुर और बढ़ापुर सीट पर सपा प्रत्याशियों को अपनी सदस्यता ग्रहण कराकर चुनाव मैदान में उतारना पड़ा था। 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने अकेले ही चुनाव लड़ने के लिए कमर कस ली है। चुनावी मैदान में प्रियंका गांधी को उतारा गया है। इससे कांग्रेसियों में भी उत्साह है। बिजनौर सीट पर पूर्व एमएलसी नसीब पठान, पूर्व जिलाध्यक्ष सुधीर पाराशर, अब्दुल समद आजाद, मनोज भारद्वाज, ठाकुर अवनीश कुमार, मुजीबुर्रहमान, शहजादा साजिद, रामकुमार वालिया, धर्मपाल सिंह, शेरबाज पठान ने टिकट के लिए आवेदन किया है। भाजपा से कांग्रेस में शामिल हुए विधायक करतार भड़ाना का नाम भी जिले से ही टिकट की दौड़ में बताया जा रहा है। नगीना सीट से पूर्व विधायक सतीश कुमार, विक्रम सिंह, रामकुमार धोबी, सीमा जाटव, गीता, सुरेंद्र सिंह, पूर्व सांसद हरपाल सिंह, राजबाला आदि टिकट के लिए आवेदन कर चुके हैं। पूर्व मंत्री ओमवती व उनके पति आरके सिंह भी टिकट के बड़े दावेदार के रूप में सामने आए हैं। कांग्रेस जिलाध्यक्ष बाबू डूंगर सिंह के अनुसार कार्यकर्ता पूरे उत्साह के साथ चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं। पार्टी हाईकमान का जो भी निर्णय होगा उसे सभी स्वीकार करेंगे।
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ओमवती ने अपनी सियासत की शुरूआत कांग्रेस से की थी। वे 1985 में नगीना सीट से विधायक बनीं। इसके बाद सपा में चली गईं। सपा के टिकट पर 1996 में विधायक और 1997 में सांसद बनीं। 2002 में सपा से विधायक बनीं। 2007 में वे सपा का दामन छोड़कर बसपा में चली गईं और चुनाव जीतकर विधायक बनीं। बसपा सुप्रीमो मायावती ने उन्हें राज्यमंत्री बनाया। 2009 के लोकसभा चुनाव में उनके पति आरके सिंह भी सक्रिय राजनीति में आ गए। उन्होंने बसपा के टिकट पर नगीना सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। इसके बाद ओमवती भी 2012 के चुनाव में बसपा के टिकट से विधानसभा चुनाव हार गईं। 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी लहर में दोनों पति-पत्नी भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा में दोनों ही लोकसभा टिकट के बड़े दावेदार थे, लेकिन भाजपा ने मेरठ के रहने वाले डॉ. यशवंत सिंह को चुनाव मैदान में उतारा।
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इसके बाद भी दोनों भाजपा में ही रहे। भाजपा ने उन्हें अनुसूचित समाज के चेहरे के रूप में अनेक अभियान में उतारा। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने ओमवती को चुनाव मैदान में उतारा, लेकिन ओमवती सपा विधायक मनोज पारस से लगातार दूसरी बार चुनाव हार गईं। इसके बाद भी ओमवती, आरके सिंह कुछ समय के लिए भाजपा में सक्रिय रहे। लेकिन कुछ दिनों से दोनों ने भाजपा के कार्यक्रमों से दूरी बनानी शुरू कर दी थी। सूत्रों के मुताबिक दोनों ने बसपा में जाने की भी कोशिश की, लेकिन बसपा ने नगीना सीट से पहले ही गिरीश चंद्र को प्रत्याशी बना दिया है। भाजपा के खिलाफ बने महागठबंधन में कांग्रेस के शामिल न होने के बाद से उनके कांग्रेस में जाने के कयास लगाए जा रहे थे। शनिवार को दोनों ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली। वहीं, आर के सिंह ने बताया की वह भाजपा में घुटन महसूस कर रहे थे। भाजपा के जिला नेताओं द्वारा उन्हें मान सम्मान भी नहीं दिया जा रहा था। इसलिए वह दोनों भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए।
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प्रियंका गांधी के प्रचार में उतरने से दावेदारों की उमड़ी
बिजनौर। चुनावी मैदान में प्रियंका गांधी के आते ही कांग्रेस और कांग्रेेसियों में जान आ गई। दोनों सीटों पर फिर से टिकट मांगने वाली की संख्या बढ़ी है। बिजनौर व नगीना सीट पर टिकट मांगने के लिए आवेदन आ रहा है।
कांग्रेस की हालत जिले में काफी समय से बहुत पतली है। चुनाव के लिए भी ज्यादा प्रत्याशी मैदान में नहीं आते हैं। 2017 के लोकसभा चुनाव में सपा व कांग्रेस का गठबंधन हुआ था। लेकिन मजबूत प्रत्याशी न होने पर कांग्रेस को नहटौर, चांदपुर और बढ़ापुर सीट पर सपा प्रत्याशियों को अपनी सदस्यता ग्रहण कराकर चुनाव मैदान में उतारना पड़ा था। 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने अकेले ही चुनाव लड़ने के लिए कमर कस ली है। चुनावी मैदान में प्रियंका गांधी को उतारा गया है। इससे कांग्रेसियों में भी उत्साह है। बिजनौर सीट पर पूर्व एमएलसी नसीब पठान, पूर्व जिलाध्यक्ष सुधीर पाराशर, अब्दुल समद आजाद, मनोज भारद्वाज, ठाकुर अवनीश कुमार, मुजीबुर्रहमान, शहजादा साजिद, रामकुमार वालिया, धर्मपाल सिंह, शेरबाज पठान ने टिकट के लिए आवेदन किया है। भाजपा से कांग्रेस में शामिल हुए विधायक करतार भड़ाना का नाम भी जिले से ही टिकट की दौड़ में बताया जा रहा है। नगीना सीट से पूर्व विधायक सतीश कुमार, विक्रम सिंह, रामकुमार धोबी, सीमा जाटव, गीता, सुरेंद्र सिंह, पूर्व सांसद हरपाल सिंह, राजबाला आदि टिकट के लिए आवेदन कर चुके हैं। पूर्व मंत्री ओमवती व उनके पति आरके सिंह भी टिकट के बड़े दावेदार के रूप में सामने आए हैं। कांग्रेस जिलाध्यक्ष बाबू डूंगर सिंह के अनुसार कार्यकर्ता पूरे उत्साह के साथ चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं। पार्टी हाईकमान का जो भी निर्णय होगा उसे सभी स्वीकार करेंगे।