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गंगा किनारे के गांवों में समूह बनाकर जैविक खेती करेंगे किसान

Sun, 23 Feb 2020 11:09 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 23 Feb 2020 11:09 PM IST
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Organic farming will be done in 22 villages of Ganga coastal
गंगा तटीय 22 गांवों में होगी जैविक खेती
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बिजनौर। जिले के गंगा किनारे बसे गांवों में समूह बनाकर किसानों को जैविक खेती कराई जाएगी। जैविक खेती करने पर किसानों को तीन साल तक अनुदान भी मिलेगा। कई किसानों के एक ही फसल बोने से किसानों की फसल को बाजार भी मिलेगा। जैविक खेती करने वाले किसानों का कृषि विभाग में पंजीकरण भी होगा। किसानों की फसल जैविक होने का प्रमाणपत्र दिया जाएगा।
केंद्र व राज्य सरकार दोनों ने अपने बजट में जैविक खेती को बढ़ावा देने की बात कही है। प्रशासन का लक्ष्य गंगा किनारे बसे गांवों में शत प्रतिशत जैविक खेती कराना है। जिले में भी 22 गांव गंगा किनारे बसे हैं। यहां के किसानों को जैविक खेती करने के लिए ट्रेनिंग दिलाई जा चुकी है। अब किसानों को जैविक खेती के लिए तैयार किया जाएगा। अगर किसान जैविक खेती जैसे सब्जी या फल उगाते हैं तो एक अकेला किसान ज्यादा उत्पादन नहीं कर सकता है। इससे बाजार में फसल को अलग से ले जाने का खर्च किसान के लिए महंगा होगा। इसका समाधान करने के लिए प्रशासन ने इन गांवों में किसानों को समूह में खेती कराने का निर्णय लिया है। किसानों के ग्रुप बनाकर उन्हें कोई सब्जी, फल या अनाज की खेती कराई जाएगी। ज्यादा इकाई में किसान जैविक खेती करेंगे तो उनकी फसल भी साथ तैयार होगी। तैयार फसल को सभी किसान मिलकर बाजार में ले जाएंगे। इससे उनकी फसल को बाजार में ले जाने की लागत कम आएगी।
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एक समूह में होंगे 50 किसान
एक समूह में 50 किसानों को शामिल किया जाएगा। किसान को कम से कम एक एकड़ जमीन में जैविक खेती करनी होगी। जैविक खेती करने के लिए किसान को 36 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से अनुदान मिलेगा। बर्मी कंपोस्ट, हरी खाद के लिए यह अनुदान दिया जाएगा।
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नि:शुल्क होगा पंजीकरण
जैविक खेती करने वाले किसानों का कृषि विभाग में पंजीकरण होता है। पहले इसका शुल्क 20 हजार रुपये तक होता था, लेकिन अब जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए शासन ने यह शुल्क खत्म कर दिया है। तीन साल तक जैविक खेती करने वाले किसानों को कृषि विभाग से नि:शुल्क पंजीकरण मिलता है।
ऐसे होगा काम
जैविक खेती करने वाले किसान को खेती की मेढ़ ऊंची व मजबूत करनी होती है ताकि दूसरे किसान के खेत का रसायनिक खाद युक्त पानी उसके खेत में न जाए। डोल से दो फीट की दूरी पर फसल बोई जाती है। खेत में रसायनिक खाद के बजाए जैविक खाद का प्रयोग किया जाता है।

गंगा किनारे के गांवों की जमीन
गांव जमीन
सबलगढ़ 378
तैयबपुर गोरवा 340
रफीउलनगर/रावली 160
दयालवाला 155
खलीउल्लापुर 152
बादशाहपुर 298
जहानाबाद 148
टीप 208
खेड़का हेमराज 127
कुंदनपुर 170
मोहिदीनपुर 189
सैफपुर खादर 171
तैयबपुर काजी 357
कुंवरचतर भोजपुर 151
दारानगर 402
जहानाबाद 840
निजामतपुरा 361
रसूलपुर पित्तनका 203
सलेमपुर मथना 203
बसंतपुर 193
सुजातपुर खादर 242
दत्तियाना 605
कुल जमीन 4488
नोट:जमीन के आंकड़े हेक्टेयर में हैं।
सभी किसान अपनाएं जैविक खेती
कृषि उपनिदेशक जेपी चौधरी के अनुसार यूपी डास्प के निर्देशन में गंगा किनारे के गांवों में जैविक खेती कराई जाएगी। जिले के सभी किसानों को जैविक खेती अपनानी चाहिए।
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