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बीमा कंपनी को बाइक की बीमा राशि अदा करने का आदेश
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बीमा कंपनी को बाइक की बीमा राशि अदा करने का आदेश
बिजनौर। जिला उपभोक्ता फोरम ने यूनाइटेड इंश्योरेंस कंपनी को आदेशित किया है कि वह यशपाल सिंह की चोरी हो गई बाइक की बीमा राशि 27 हजार 560 रुपये का भुगतान सात प्रतिशत ब्याज के साथ एक माह में करे। फोरम ने पांच हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति व तीन हजार रुपये वाद व्यय देने के आदेश भी दिए हैं।
बिजनौर के मोहल्ला वीआईपी कॉलोनी निवासी यशपाल सिंह ने फोरम के समक्ष दायर वाद में कहा था कि उसने निर्धारित राशि देकर अपनी बाइक का बीमा यूनाइटेड इंश्योरेंस कंपनी के शेरकोट कार्यालय से कराया था। उसकी बाइक वीआईपी कॉलोनी के मेन गेट से चार जुलाई 2017 को चोरी हुई थी। जिसकी उसने एफआईआर दर्ज कराई। समस्त औपचारिक आवश्यकताएं पूरी कर बीमा क्लेम प्रस्तुत किया। फिर भी बीमा कंपनी ने उसका क्लेम नहीं दिया। इस मामले में कंपनी का कहना था कि उसे डेढ़ साल बाद बाइक चोरी की सूचना दी गई है। विलंब के आधार क्लेम निरस्त किया गया है। फोरम के अध्यक्ष दीपा जैन, सदस्य मनोज कुमार पंडित, महिला सदस्य डॉ. मनीला द्वारा इस मामले में सर्वसम्मति से दिए गए निर्णय में कहा है कि सिर्फ देरी के आधार पर क्लेम निरस्त करना युक्तिसंगत प्रतीत नहीं होता है। इसलिए यशपाल सिंह का बीमा दावा स्वीकार किया जाता है।
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बिजनौर। जिला उपभोक्ता फोरम ने यूनाइटेड इंश्योरेंस कंपनी को आदेशित किया है कि वह यशपाल सिंह की चोरी हो गई बाइक की बीमा राशि 27 हजार 560 रुपये का भुगतान सात प्रतिशत ब्याज के साथ एक माह में करे। फोरम ने पांच हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति व तीन हजार रुपये वाद व्यय देने के आदेश भी दिए हैं।
बिजनौर के मोहल्ला वीआईपी कॉलोनी निवासी यशपाल सिंह ने फोरम के समक्ष दायर वाद में कहा था कि उसने निर्धारित राशि देकर अपनी बाइक का बीमा यूनाइटेड इंश्योरेंस कंपनी के शेरकोट कार्यालय से कराया था। उसकी बाइक वीआईपी कॉलोनी के मेन गेट से चार जुलाई 2017 को चोरी हुई थी। जिसकी उसने एफआईआर दर्ज कराई। समस्त औपचारिक आवश्यकताएं पूरी कर बीमा क्लेम प्रस्तुत किया। फिर भी बीमा कंपनी ने उसका क्लेम नहीं दिया। इस मामले में कंपनी का कहना था कि उसे डेढ़ साल बाद बाइक चोरी की सूचना दी गई है। विलंब के आधार क्लेम निरस्त किया गया है। फोरम के अध्यक्ष दीपा जैन, सदस्य मनोज कुमार पंडित, महिला सदस्य डॉ. मनीला द्वारा इस मामले में सर्वसम्मति से दिए गए निर्णय में कहा है कि सिर्फ देरी के आधार पर क्लेम निरस्त करना युक्तिसंगत प्रतीत नहीं होता है। इसलिए यशपाल सिंह का बीमा दावा स्वीकार किया जाता है।
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