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एलआईसी को बीमा धनराशि के साथ क्षतिपूर्ति देने के आदेश
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एलआईसी को बीमा धनराशि के साथ क्षतिपूर्ति देने के आदेश
बिजनौर। जिला उपभोक्ता फोरम ने पवन कुमार की मौत बाद भी बीमा धनराशि का भुगतान न करने के मामले में एलआईसी को बीमित धनराशि एक लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। इस मामले में 20 हजार रुपये मानसिक व शारीरिक व आर्थिक क्षतिपूर्ति के रूप में तथा सात हजार रुपये वाद व्यय के रूप में एलआईसी को देने होंगे।
थाना मंडावली के गांव फजलपुर मान निवासी गीता देवी ने फोरम में दायर किए गए परिवाद में कहा था कि अपने जीवन काल में उसके पति पवन कुमार ने एलआईसी की एक लाख रुपये की पॉलिसी कराई थी। इसकी 4600 रुपये छमाई किस्त जाती थी। पॉलिसी की अवधि 15 वर्ष थी और 28 अगस्त 2029 को पॉलिसी पूरी होनी थी। उसके पति अपनी किस्त का निरंतर भुगतान कर रहे थे, लेकिन बीच में आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण कुछ किस्तों का भुगतान समय से नहीं किया जा सका था। बाद में उसके पति ने पॉलिसी की किस्तों का ब्याज सहित भुगतान करके पॉलिसी का पुर्नचलन करा लिया था और उसके बाद से नियमित रूप से पॉलिसी का भुगतान कर रहे थे।
छह अगस्त 2017 को उसके पति पवन कुमार की मृत्यु हो गई। समस्त जरूरी कागज पेश कर एलआईसी के समक्ष मृत्यु दावा पेश किया गया। परंतु उसका क्लेम खारिज कर दिया गया। इस मामले में बीमा कंपनी द्वारा कहा गया कि बीमाधारक पवन कुमार बीमा पॉलिसी लेने के पूर्व से ही स्वस्थ नहीं थे तथा गले के कैंसर की बीमारी से पीड़ित थे। उन्होंने बीमारी के होते हुए भी पुर्नचलन के समय गलत जानकारी देकर अपने को पूर्ण रूप से स्वस्थ बताते हुए बीमा पॉलिसी ली।
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इस मामले में जिला उपभोक्ता फोरम की अध्यक्ष दीपा जैन एवं सदस्य मनोज पंडित तथा डॉ. मनीला द्वारा दिए गए निर्णय में कहा गया कि दोनों पक्षों को सुनने व समस्त कागजों के अवलोकन के बाद यह आयोग की पीठ इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि एलआईसी द्वारा बीमा दावे को खंडित करना विधि विरुद्ध व अनुचित है। पवन कुमार की पत्नी बीमा धनराशि एक लाख रुपये 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ पाने की अधिकारी हैं। इसके साथ ही 20 हजार रुपये क्षतिपूर्ति व सात हजार रुपये वाद व्यय के रूप में बीमाधारक की पत्नी गीता देवी को अदा किए जाएं। फोरम ने इस मामले में आयोग को भ्रमित किए जाने के उद्देश्य से जानबूझकर मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए एलआईसी के विरूद्ध धारा 344 आईपीसी के तहत वाद पंजीकृत किए जाने के भी आदेश दिए हैं।
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बिजनौर। जिला उपभोक्ता फोरम ने पवन कुमार की मौत बाद भी बीमा धनराशि का भुगतान न करने के मामले में एलआईसी को बीमित धनराशि एक लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। इस मामले में 20 हजार रुपये मानसिक व शारीरिक व आर्थिक क्षतिपूर्ति के रूप में तथा सात हजार रुपये वाद व्यय के रूप में एलआईसी को देने होंगे।
थाना मंडावली के गांव फजलपुर मान निवासी गीता देवी ने फोरम में दायर किए गए परिवाद में कहा था कि अपने जीवन काल में उसके पति पवन कुमार ने एलआईसी की एक लाख रुपये की पॉलिसी कराई थी। इसकी 4600 रुपये छमाई किस्त जाती थी। पॉलिसी की अवधि 15 वर्ष थी और 28 अगस्त 2029 को पॉलिसी पूरी होनी थी। उसके पति अपनी किस्त का निरंतर भुगतान कर रहे थे, लेकिन बीच में आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण कुछ किस्तों का भुगतान समय से नहीं किया जा सका था। बाद में उसके पति ने पॉलिसी की किस्तों का ब्याज सहित भुगतान करके पॉलिसी का पुर्नचलन करा लिया था और उसके बाद से नियमित रूप से पॉलिसी का भुगतान कर रहे थे।
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छह अगस्त 2017 को उसके पति पवन कुमार की मृत्यु हो गई। समस्त जरूरी कागज पेश कर एलआईसी के समक्ष मृत्यु दावा पेश किया गया। परंतु उसका क्लेम खारिज कर दिया गया। इस मामले में बीमा कंपनी द्वारा कहा गया कि बीमाधारक पवन कुमार बीमा पॉलिसी लेने के पूर्व से ही स्वस्थ नहीं थे तथा गले के कैंसर की बीमारी से पीड़ित थे। उन्होंने बीमारी के होते हुए भी पुर्नचलन के समय गलत जानकारी देकर अपने को पूर्ण रूप से स्वस्थ बताते हुए बीमा पॉलिसी ली।
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इस मामले में जिला उपभोक्ता फोरम की अध्यक्ष दीपा जैन एवं सदस्य मनोज पंडित तथा डॉ. मनीला द्वारा दिए गए निर्णय में कहा गया कि दोनों पक्षों को सुनने व समस्त कागजों के अवलोकन के बाद यह आयोग की पीठ इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि एलआईसी द्वारा बीमा दावे को खंडित करना विधि विरुद्ध व अनुचित है। पवन कुमार की पत्नी बीमा धनराशि एक लाख रुपये 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ पाने की अधिकारी हैं। इसके साथ ही 20 हजार रुपये क्षतिपूर्ति व सात हजार रुपये वाद व्यय के रूप में बीमाधारक की पत्नी गीता देवी को अदा किए जाएं। फोरम ने इस मामले में आयोग को भ्रमित किए जाने के उद्देश्य से जानबूझकर मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए एलआईसी के विरूद्ध धारा 344 आईपीसी के तहत वाद पंजीकृत किए जाने के भी आदेश दिए हैं।