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ई-टिकट मशीनें खराब होने से परिचालक हो रहे परेशान
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ई-टिकट मशीनें खराब होने से परिचालक परेशान
बिजनौर। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम का बिजनौर डिपो की अधिकांश ई-टिकट मशीनें गड़बड़ी कर रही हैं। अधिकांश टिकट मशीनों की बैट्री खराब है, जिससे वे कम समय में स्विच ऑफ हो जाती हैं। लगभग 100 से भी अधिक मशीनों में से करीब 40 प्रतिशत की बैट्री खराब है, तो किसी का बटन बिल्कुल भी काम नहीं कर रहा है।
वर्तमान में बिजनौर डिपो के पास लगभग 115 बसें हैं। इनमें 86 उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की हैं, जबकि 29 अनुबंधित शामिल हैं। परिचालकों ने बताया कि प्रति बस एक इलेक्ट्रॉनिक टिकट मशीन (ईटीएम) मशीन आवंटित की हुई है, लेकिन लगभग 40 प्रतिशत ई-टिकट मशीनें काम नहीं कर रहीं हैं। इसके बाद परिचालकों के पास मैनुअल टिकट काटने का ही विकल्प बचता है, लेकिन अधिक समय लगने के कारण मैनुअल टिकट बनाने में परिचालकों को काफी परेशानी होती है। मजबूरी में वे खराब मशीनों को लेकर ही रूट पर चले जाते हैं। यही नहीं साफ प्रिंट न आने से बस में बैठे यात्री भी तनाव में रहते हैं, क्योंकि उन्हें नहीं पता होता है कि उनका टिकट कितने रुपये का है और कहां के लिए बना है। कई बार इसे लेकर तकरार भी हो जाती है।
वरिष्ठ केंद्र प्रभारी अरविंद शर्मा ने बताया कि मशीनों की खराबी के बारे में ईटीएम बनाने वाली कंपनी को अवगत कराया गया है। इन्हें जल्द ही दुरुस्त कराया जाएगा, जो बिल्कुल खराब हो चुकी हैं उन्हें बदलवाया जाएगा। परिचालकों को निर्देशित किया गया है कि मशीन खराब होती है, तो आवश्यक रूप से मैनुअल टिकट बना लें, लेकिन अधिकांश परिचालक अपनी सुविधा के लिए मशीनों से ही टिकट बनाना चाहते हैं। इसलिए थोड़ी परेशानी हो रही है। टिकट में प्रिट साफ न आए तो यात्री घबराए नहीं। कितने रुपये एवं कहां का टिकट है, यह चेकिंग दस्ता परिचालक से ही पूछता है। इसलिए यात्री किराया देकर निश्चिंत हो जाएं।
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बिजनौर। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम का बिजनौर डिपो की अधिकांश ई-टिकट मशीनें गड़बड़ी कर रही हैं। अधिकांश टिकट मशीनों की बैट्री खराब है, जिससे वे कम समय में स्विच ऑफ हो जाती हैं। लगभग 100 से भी अधिक मशीनों में से करीब 40 प्रतिशत की बैट्री खराब है, तो किसी का बटन बिल्कुल भी काम नहीं कर रहा है।
वर्तमान में बिजनौर डिपो के पास लगभग 115 बसें हैं। इनमें 86 उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की हैं, जबकि 29 अनुबंधित शामिल हैं। परिचालकों ने बताया कि प्रति बस एक इलेक्ट्रॉनिक टिकट मशीन (ईटीएम) मशीन आवंटित की हुई है, लेकिन लगभग 40 प्रतिशत ई-टिकट मशीनें काम नहीं कर रहीं हैं। इसके बाद परिचालकों के पास मैनुअल टिकट काटने का ही विकल्प बचता है, लेकिन अधिक समय लगने के कारण मैनुअल टिकट बनाने में परिचालकों को काफी परेशानी होती है। मजबूरी में वे खराब मशीनों को लेकर ही रूट पर चले जाते हैं। यही नहीं साफ प्रिंट न आने से बस में बैठे यात्री भी तनाव में रहते हैं, क्योंकि उन्हें नहीं पता होता है कि उनका टिकट कितने रुपये का है और कहां के लिए बना है। कई बार इसे लेकर तकरार भी हो जाती है।
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वरिष्ठ केंद्र प्रभारी अरविंद शर्मा ने बताया कि मशीनों की खराबी के बारे में ईटीएम बनाने वाली कंपनी को अवगत कराया गया है। इन्हें जल्द ही दुरुस्त कराया जाएगा, जो बिल्कुल खराब हो चुकी हैं उन्हें बदलवाया जाएगा। परिचालकों को निर्देशित किया गया है कि मशीन खराब होती है, तो आवश्यक रूप से मैनुअल टिकट बना लें, लेकिन अधिकांश परिचालक अपनी सुविधा के लिए मशीनों से ही टिकट बनाना चाहते हैं। इसलिए थोड़ी परेशानी हो रही है। टिकट में प्रिट साफ न आए तो यात्री घबराए नहीं। कितने रुपये एवं कहां का टिकट है, यह चेकिंग दस्ता परिचालक से ही पूछता है। इसलिए यात्री किराया देकर निश्चिंत हो जाएं।
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