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18 प्रतिशत अभिभावकों ने ही दी बच्चों को भेजने की सहमति
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18 प्रतिशत अभिभावकों ने ही दी बच्चों को भेजने की सहमति
बिजनौर। शासन की 15 अक्टूबर के बाद स्कूल खोलने की योजना है। स्कूलों ने इसकी तैयारी भी शुरू कर दी है। जिले में यूपी बोर्ड के स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के अभिभावकों से बच्चों को स्कूल भेजने के लिए निश्चित प्रारूप पर सहमति ली जा रही है। अभी तक मात्र 18 प्रतिशत अभिभावकों ने ही बच्चों को स्कूल भेजने की सहमति दी है। सहमति पत्र लेने की आखिरी तारीख छह अक्टूबर है।
जिले में यूपी बोर्ड के 387 विद्यालय संचालित हैं। इनमें 282 वित्त विहीन विद्यालय हैं। कोरोना के कारण मार्च से स्कूल बंद हैं। छात्र-छात्राओं की ऑनलाइन पढ़ाई हो रही है। वित्तविहीन विद्यालय आर्थिक संकट का हवाला देकर स्कूल खोलने की मांग कर रहे हैं। शिक्षक नेताओं ने मामला शिक्षामंत्री के समक्ष उठाया है। शासन ने अक्टूबर माह के शुरू में अनलॉक -5 की गाइडलाइन जारी की है। इसमें 15 अक्टूबर के बाद स्कूल खोलने का प्रस्ताव है। शासन ने यूपी बोर्ड के स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि छात्रों को स्कूल भेजने के लिए अभिभावकों की अधिकृत प्रारूप पत्र पर सहमति ली जाए। स्कूलों में सहमति पत्र भरवाए जा रहे हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार बच्चों को स्कूल भेजने की सहमति देने वाले वित्तविहीन विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक अधिक हैं।
जिला विद्यालय निरीक्षक राजेश कुमार ने बताया कि यूपी बोर्ड के स्कूलों में करीब डेढ़ लाख बच्चे पंजीकृत हैं। प्रथम चरण में मात्र 18 हजार अभिभावकों ने ही सहमति दी है। दूसरे चरण में आखिरी तारीख छह अक्टूबर तक सहमति पत्र उनके दफ्तर में आने हैं। ये सहमति पत्र शासन को भेजे जाएंगे। स्कूल खोलने के लिए शासन से प्राप्त निर्देश का पालन होगा।
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कोरोना से बचाव के इंतजाम करें स्कूल
बिजनौर। अभिभावकों में कोरोना का खौफ अभी समाप्त नहीं हुआ है। अभिभावकों की सहमति पत्र देने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिख रही है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों के भविष्य के नाम पर स्वास्थ्य से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता है। मिल रही जानकारी के अनुसार अभिभावक दसवीं, ग्यारहवीं तथा बारहवीं के बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार हैं। परंतु इसके लिए स्कूलों में कोरोना से बचाव के पुख्ता इंतजाम की गारंटी चाहते हैं। अभिभावक संघ के जिलाध्यक्ष नृपेंद्र देशवाल का कहना है कि प्रशासन को स्कूल खोलने से पहले अभिभावकों से बात करनी चाहिए।
स्कूल खोलने का फैसला सही
बिजनौर। वित्तविहीन विद्यालय शासन के स्कूल खोलने के फैसले को सही बता रहे हैं। वित्तविहीन शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष तथा इंटर कॉलेज केलनपुर के प्रधानाचार्य हरवीर सिंह का कहना है कि वित्तविहीन स्कूल कोरोना से बचाव के प्रबंध करने में जुटे हैं। स्कूलों की साफ सफाई हो रही है। सैनिटाइजर का छिड़काव किया जा रहा है। साथ ही अभिभावकों को कोरोना से बचाव के लिए जागरूक किया जा रहा है।
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बिजनौर। शासन की 15 अक्टूबर के बाद स्कूल खोलने की योजना है। स्कूलों ने इसकी तैयारी भी शुरू कर दी है। जिले में यूपी बोर्ड के स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के अभिभावकों से बच्चों को स्कूल भेजने के लिए निश्चित प्रारूप पर सहमति ली जा रही है। अभी तक मात्र 18 प्रतिशत अभिभावकों ने ही बच्चों को स्कूल भेजने की सहमति दी है। सहमति पत्र लेने की आखिरी तारीख छह अक्टूबर है।
जिले में यूपी बोर्ड के 387 विद्यालय संचालित हैं। इनमें 282 वित्त विहीन विद्यालय हैं। कोरोना के कारण मार्च से स्कूल बंद हैं। छात्र-छात्राओं की ऑनलाइन पढ़ाई हो रही है। वित्तविहीन विद्यालय आर्थिक संकट का हवाला देकर स्कूल खोलने की मांग कर रहे हैं। शिक्षक नेताओं ने मामला शिक्षामंत्री के समक्ष उठाया है। शासन ने अक्टूबर माह के शुरू में अनलॉक -5 की गाइडलाइन जारी की है। इसमें 15 अक्टूबर के बाद स्कूल खोलने का प्रस्ताव है। शासन ने यूपी बोर्ड के स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि छात्रों को स्कूल भेजने के लिए अभिभावकों की अधिकृत प्रारूप पत्र पर सहमति ली जाए। स्कूलों में सहमति पत्र भरवाए जा रहे हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार बच्चों को स्कूल भेजने की सहमति देने वाले वित्तविहीन विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक अधिक हैं।
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जिला विद्यालय निरीक्षक राजेश कुमार ने बताया कि यूपी बोर्ड के स्कूलों में करीब डेढ़ लाख बच्चे पंजीकृत हैं। प्रथम चरण में मात्र 18 हजार अभिभावकों ने ही सहमति दी है। दूसरे चरण में आखिरी तारीख छह अक्टूबर तक सहमति पत्र उनके दफ्तर में आने हैं। ये सहमति पत्र शासन को भेजे जाएंगे। स्कूल खोलने के लिए शासन से प्राप्त निर्देश का पालन होगा।
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कोरोना से बचाव के इंतजाम करें स्कूल
बिजनौर। अभिभावकों में कोरोना का खौफ अभी समाप्त नहीं हुआ है। अभिभावकों की सहमति पत्र देने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिख रही है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों के भविष्य के नाम पर स्वास्थ्य से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता है। मिल रही जानकारी के अनुसार अभिभावक दसवीं, ग्यारहवीं तथा बारहवीं के बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार हैं। परंतु इसके लिए स्कूलों में कोरोना से बचाव के पुख्ता इंतजाम की गारंटी चाहते हैं। अभिभावक संघ के जिलाध्यक्ष नृपेंद्र देशवाल का कहना है कि प्रशासन को स्कूल खोलने से पहले अभिभावकों से बात करनी चाहिए।
स्कूल खोलने का फैसला सही
बिजनौर। वित्तविहीन विद्यालय शासन के स्कूल खोलने के फैसले को सही बता रहे हैं। वित्तविहीन शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष तथा इंटर कॉलेज केलनपुर के प्रधानाचार्य हरवीर सिंह का कहना है कि वित्तविहीन स्कूल कोरोना से बचाव के प्रबंध करने में जुटे हैं। स्कूलों की साफ सफाई हो रही है। सैनिटाइजर का छिड़काव किया जा रहा है। साथ ही अभिभावकों को कोरोना से बचाव के लिए जागरूक किया जा रहा है।