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रोडवेज की बसों में नहीं सकेगा तेल में खेल
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अब रोडवेज बसों में नहीं होगा तेल का खेल
बिजनौर। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की रोडवेज की बसों में अब तेल का खेल नहीं हो पाएगा। डीजल की चोरी को रोकने के लिए वर्कशॉप को डीजल ऑटोमेशन मशीन से लैस कर दिया गया है। अफसरों के अनुसार उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के महाप्रबंधक के निर्देश पर मशीन की नोब और डीजल टैंक में भी सेंसर लगवाए गए हैं। इससे जिस बस को तेल की पर्ची मिलेगी, केवल उसी में डीजल पड़ेगा। उस दौरान केवल उसी बस की आईडी मशीन में ऑनलाइन शो होगी, जिसका पर्ची पर नंबर पड़ा होगा। साथ ही तुरंत इसका मैसेज निगम मुख्यालय पर पहुंच जाएगा।
आमतौर पर होता ये है कि चालक-परिचालक वर्कशॉप कर्मचारियों की मिलीभगत से तेल में हेराफेरी कर लेते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अफसरों के मुताबिक सेंसर में रिंग चिप लगी है। इससे तेल की मात्रा को कम और ज्यादा नहीं किया जा सकता। साथ ही उस पर्ची पर दूसरी गाड़ी में तेल नहीं डलवाया जा सकता। आए दिन रोडवेज की बसों में तेल की हेराफेरी के मामले सामने आते रहते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। इसके लिए उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन और हिंदुस्तान ऑयल कॉरपोरेशन से डीजल ऑटोमेशन मशीन को लेकर करार किया है। इसी के तहत वर्कशॉप को डीजल ऑटोमेशन मशीन से लैस कर दिया गया है।
महाप्रबंधक के निर्देश पर मशीन की नोब में और डीजल टैंक में सेंसर लगवाए गए हैं। इसलिए अब डीजल की चोरी नहीं हो सकती। बिजनौर डिपो के एआरएम वीके मौर्य ने बताया कि बिजनौर डिपो में कुल 118 बस हैं। इनमें 87 निगम की ओर 31 अनुबंधित बस शामिल हैं। उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था के तहत जिस बस में तेल डालने के लिए पर्ची दी जाएगी, उस समय उसी बस में ही तेल डलेगा। वर्कशॉप की मशीन में लगा यह सेंसर अन्य दूसरी बस की आईडी को स्वीकार ही नहीं करेगा।
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बिजनौर। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की रोडवेज की बसों में अब तेल का खेल नहीं हो पाएगा। डीजल की चोरी को रोकने के लिए वर्कशॉप को डीजल ऑटोमेशन मशीन से लैस कर दिया गया है। अफसरों के अनुसार उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के महाप्रबंधक के निर्देश पर मशीन की नोब और डीजल टैंक में भी सेंसर लगवाए गए हैं। इससे जिस बस को तेल की पर्ची मिलेगी, केवल उसी में डीजल पड़ेगा। उस दौरान केवल उसी बस की आईडी मशीन में ऑनलाइन शो होगी, जिसका पर्ची पर नंबर पड़ा होगा। साथ ही तुरंत इसका मैसेज निगम मुख्यालय पर पहुंच जाएगा।
आमतौर पर होता ये है कि चालक-परिचालक वर्कशॉप कर्मचारियों की मिलीभगत से तेल में हेराफेरी कर लेते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अफसरों के मुताबिक सेंसर में रिंग चिप लगी है। इससे तेल की मात्रा को कम और ज्यादा नहीं किया जा सकता। साथ ही उस पर्ची पर दूसरी गाड़ी में तेल नहीं डलवाया जा सकता। आए दिन रोडवेज की बसों में तेल की हेराफेरी के मामले सामने आते रहते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। इसके लिए उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन और हिंदुस्तान ऑयल कॉरपोरेशन से डीजल ऑटोमेशन मशीन को लेकर करार किया है। इसी के तहत वर्कशॉप को डीजल ऑटोमेशन मशीन से लैस कर दिया गया है।
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महाप्रबंधक के निर्देश पर मशीन की नोब में और डीजल टैंक में सेंसर लगवाए गए हैं। इसलिए अब डीजल की चोरी नहीं हो सकती। बिजनौर डिपो के एआरएम वीके मौर्य ने बताया कि बिजनौर डिपो में कुल 118 बस हैं। इनमें 87 निगम की ओर 31 अनुबंधित बस शामिल हैं। उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था के तहत जिस बस में तेल डालने के लिए पर्ची दी जाएगी, उस समय उसी बस में ही तेल डलेगा। वर्कशॉप की मशीन में लगा यह सेंसर अन्य दूसरी बस की आईडी को स्वीकार ही नहीं करेगा।
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