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18 साल से कम आयु के बच्चों को टीबी मुक्त कराएंगे अफसर
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बच्चों को टीबी मुक्त कराएंगे अफसर
बिजनौर। जिले के 18 साल से कम आयु वाले बच्चों को टीबी रोग से मुक्त कराने के लिए जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। अब इस आयु वर्ग के लगभग 89 बच्चों को जिले के आला अफसर गोद लेकर उनके उपचार और पौष्टिक आहार आदि समय पर दिलाने की व्यवस्था करेंगे। गोद लेने वालों में जिला प्रशासन से लेकर विकास खंड स्तर तक के अधिकारी शामिल रहेंगे।
टीबी पीड़ित बच्चों को गोद लेने की शुरुआत उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने की थी, जिससे केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित लक्ष्य वर्ष 2025 देश को टीबी मुक्त किया जा सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत को टीबी रोग से मुक्त करने के लिए पहले वर्ष 2035 तय किया था, लेकिन बाद में इसके दस साल घटा दिये गए। वर्तमान में 18 साल से नीचे तक के लगभग 148 बच्चे टीबी रोग से ग्रसित हैं, जिनका उपाचर चल रहा है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. बीएस रावत ने बताया कि टीबी से पीड़ित ज्यादातर बच्चे गरीब परिवारों से हैं। इनकी बीमारी बढ़ने की मुख्य वजह कुपोषण है। इससे उबरने के लिए केंद्र सरकार ने इनके लिए 500 रुपये प्रतिमाह पोषण भत्ता के रूप में निर्धारित कर रखा है। शासन ने अब जिला प्रशासन से लेकर विकास खंड स्तर तक के करीब करीब हर विभाग के अधिकारी को टीबी ग्रसित बच्चों को गोद देने के लिए निर्देशित किया गया है। इसका प्रस्ताव बनाकर जिलाधिकारी को भेज दिया गया है। अब डीएम स्तर से ही इसके लिए संबंधित अफसरों को निर्देशित किया जाएगा।
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बिजनौर। जिले के 18 साल से कम आयु वाले बच्चों को टीबी रोग से मुक्त कराने के लिए जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। अब इस आयु वर्ग के लगभग 89 बच्चों को जिले के आला अफसर गोद लेकर उनके उपचार और पौष्टिक आहार आदि समय पर दिलाने की व्यवस्था करेंगे। गोद लेने वालों में जिला प्रशासन से लेकर विकास खंड स्तर तक के अधिकारी शामिल रहेंगे।
टीबी पीड़ित बच्चों को गोद लेने की शुरुआत उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने की थी, जिससे केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित लक्ष्य वर्ष 2025 देश को टीबी मुक्त किया जा सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत को टीबी रोग से मुक्त करने के लिए पहले वर्ष 2035 तय किया था, लेकिन बाद में इसके दस साल घटा दिये गए। वर्तमान में 18 साल से नीचे तक के लगभग 148 बच्चे टीबी रोग से ग्रसित हैं, जिनका उपाचर चल रहा है।
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जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. बीएस रावत ने बताया कि टीबी से पीड़ित ज्यादातर बच्चे गरीब परिवारों से हैं। इनकी बीमारी बढ़ने की मुख्य वजह कुपोषण है। इससे उबरने के लिए केंद्र सरकार ने इनके लिए 500 रुपये प्रतिमाह पोषण भत्ता के रूप में निर्धारित कर रखा है। शासन ने अब जिला प्रशासन से लेकर विकास खंड स्तर तक के करीब करीब हर विभाग के अधिकारी को टीबी ग्रसित बच्चों को गोद देने के लिए निर्देशित किया गया है। इसका प्रस्ताव बनाकर जिलाधिकारी को भेज दिया गया है। अब डीएम स्तर से ही इसके लिए संबंधित अफसरों को निर्देशित किया जाएगा।
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