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बैंक के बजाए अब एटीएम पर कट रहा टाइम
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Thu, 22 Dec 2016 12:03 AM IST
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धामपुर पीएनबी के बाहर लगी खातेधारकों की भीड़।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में जिले में बैंकों की अपेक्षा एटीएम पर ग्राहकों की कतार लगी रही। ग्राहकों को कैश के लिए काफी मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है। कई ग्राहकों ने कहा कि सर्द मौसम में पता नहीं कब दुश्वारियां कम होगी। लाइन में लगने को लेकर ग्राहकों के बीच आपाधापी मची रही।
बुधवार को बैंकों को रोज की अपेक्षा काफी कम भीड़ रही। कारण यह है कि बैंकों में कैश नहीं मिलने से ग्राहकों पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। एटीएम पर भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही है। एटीएम पर लाइन में पहले की अपेक्षा बुधवार को काफी रही। भीड़ के बीच आगे निकलने की होड़ में आपाधापी मची रही। एचडीएफसी, ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, एक्सिस बैंक की एटीएम मशीनों में रुपया रखा गया। यहां पर भुगतान लेने के लिए ग्राहकों की लंबी लाइन लग गई।
एसबीआई में तो महिलाओं की संख्या आधी से भी कम हो गई है। यही स्थिति पीएनबी में देखने को मिली। इस बीच कई बैंकों में पांच हजार से लेकर 20 हजार रुपये का भुगतान किया गया।
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उधर, पुराने 500 और एक हजार के पांच हजार से ज्यादा नोट जमा करने पर डिक्लेरेशन की अनिवार्यता बुधवार को आरबीआई ने खत्म कर दिया। हालांकि बैंक का सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं होने से बैंक अधिकारियों ने ग्राहकों से डिक्लेरेशन मांगा। इस पर ग्राहक बृहस्पतिवार को रुपये जमा करने की बात कहकर चले गए। जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक अजय कुमार के मुताबिक उपभोक्ताओं की भीड़ थोड़ी कम हुई है। अब उपभोक्ता डिजिटल पेमेंट की ओर भी रुझान करने लगे हैं।
वहीं, मंडावर। बुधवार को कैश लेने के लिए एसबीआई व पीएनबी के बाहर महिलाओं व पुरुषों की लाइन लगी हुई थी। कुछ महिलाओं ने लाइन में बीच में घुसने की कोशिश की तो दूसरी महिलाओं ने विरोध किया।
इस बात पर महिलाएं आमने-सामने आ गई और उनमें खींचतान हो गई। महिलाओं में मारपीट तक की नौबत आ गई। बैंक पर तैनात महिला पुलिसकर्मियों ने महिलाओं को समझाकर शांत किया।
बैंकों में कैश नहीं मायूसी हाथ लगी
धामपुर/अफजलगढ़ में
अधिकांश बैंकों में बुधवार को कैश का टोटा रहा। लोगों को कैश नहीं मिलने से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। बुधवार को पीएनबी और एचडीएफसी के एटीएम भी बंद रहे। दोनों बैंकों के बाहर एटीएम से कैश निकालने के चक्कर में दिन निकलते ही लोगों की भीड़ जमा हो गई थी। कैश का टोटा होने से उनके हाथ मायूसी लगी। उधर, यूनियन बैंक में पांच सौ नोटों की नई करेंसी आने पर बुधवार को दो हजार रुपये ग्राहकों को बांटे गए। लोगों ने धामपुर मंडल के सभी बैंकों की नोटबंदी से लेकर आज तक की बैंकिंग प्रणाली की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की।बुधवार को एचडीएफसी बैंक के एटीएम पर दिनभर लोगों को तांता लगा रहा। हालांकि एटीएम में कैश नहीं होने से बंद रहा। ग्राहक मदन, किशन, भोपाल सिंह, करन सिंह, राजू, कन्हैया का आरोप है कि एचडीएफसी बैंक का एटीएम अधिकारियों ने जानबूझकर बंद कर रखा है। इस एटीएम में कैश का कोई टोटा नहीं है। मंगलवार को तब बंद हुआ जब बैंक के बाहर लोगों ने ज्यादा हंगामा कर दिया था। सर्व यूपी ग्रामीण बैंक खुलते ही कैश समाप्त होने का बोर्ड टांग दिया गया था। कासमपुरगढ़ी में पीएनबी कासमपुरगढी पर नेशनल हाईवे 74 पर लगभग एक किमी लंबी लाइन लग गई। सर्व यूपी ग्रामीण बैंक सीरवासुचंद में कैश नहीं होने के कारण उपभोक्ताओं ने हंगामा किया । ग्रामीण मोहम्मद इल्यास, आजम , यासीन, वीर सिंह , दलपत सिंह , मोहम्मद. अख्तर आदि का कहना है कि सर्व यूपी ग्रामीण बैंक में कई दिनों से उनकी पासबुक जमा है, लेकिन उन्हें भुगतान नहीं किया जा रहा है।
बैंक वाले कह रहे है कैश नहीं है, जब आएगा तभी मिलेगा । ग्राम त्रिलोकपुर निवासी यशोदा, जयवंती, जसवंती देवी ने रोते हुए बताया कि उसने लगभग 20 दिन पहले किताब जमा की थी। बैंक वाले अब उनकी किताब नहीं लौटा रहे हैं।
करोड़ों जमा होने के बाद रिकवरी के लिए तरसे बैंक
बिजनौर। नोटबंदी में पुराने 500 और एक हजार के नोटों की बैंकों में झड़ी लग गई। इसके बावजूद बैंकों में रिकवरी नहीं हो पाई है। ग्राहकों ने रुपये अपने बचत खातों में ही जमा किए हैं। ऋण खातों में नाममात्र की राशि जमा की गई है। आठ नवंबर को नोटबंदी के बाद से बैंकों में रुपये जमा करने के लिए ग्राहकों की भीड़ लगी हुई है। जिलेभर के बैंकों में अब तक 1500 करोड़ रुपये से ज्यादा के पुराने नोट जमा हो चुके हैं। नोट जमा करने के लिए अब भी बैंकों में भीड़ है। जिले के ग्राहकों ने किसान क्रेडिट कार्ड, कार लोन, बाइक लोन, होम लोन, पर्सनल लोन सहित अनेक ऋण योजनाओं में ग्राहकों ने पांच हजार करोड़ से अधिक का ऋण ले रखा है। इनमें से कई खाते ऋण जमा करने के मामले में नियमित भी नहीं हैं। नोटबंदी के बाद बैंक अधिकारियों को उम्मीद थी कि ग्राहक अपने पुराने नोटों से ऋण भी जमा करेंगे। हालांकि जिले में ऐसा नहीं हुआ है। जमा की गई धनराशि में से करीब दस प्रतिशत रुपया ही ऋण खातों में जमा हुआ है। रिकवरी खातों में रुपया जमा नहीं होने से बैंक अधिकारी परेशान हैं। बैंक अधिकारियों के मुताबिक चुनावी साल में ग्राहकों को लग रहा है कि उनका कर्जा माफ हो सकता है। इसलिए ही वे ऋण जमा नहीं कर रहे हैं। जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक अजय कुमार के मुताबिक नोटबंदी के बाद से रिकवरी खातों में उम्मीद के मुताबिक रुपया जमा नहीं हुआ है। ग्राहक केवल अपने बचत खातों में ही रुपया जमा कर रहे हैं। ग्राहक अपने रिकवरी खातों में भी रुपया जमा कर सकते हैं।
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बुधवार को बैंकों को रोज की अपेक्षा काफी कम भीड़ रही। कारण यह है कि बैंकों में कैश नहीं मिलने से ग्राहकों पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। एटीएम पर भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही है। एटीएम पर लाइन में पहले की अपेक्षा बुधवार को काफी रही। भीड़ के बीच आगे निकलने की होड़ में आपाधापी मची रही। एचडीएफसी, ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, एक्सिस बैंक की एटीएम मशीनों में रुपया रखा गया। यहां पर भुगतान लेने के लिए ग्राहकों की लंबी लाइन लग गई।
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एसबीआई में तो महिलाओं की संख्या आधी से भी कम हो गई है। यही स्थिति पीएनबी में देखने को मिली। इस बीच कई बैंकों में पांच हजार से लेकर 20 हजार रुपये का भुगतान किया गया।
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उधर, पुराने 500 और एक हजार के पांच हजार से ज्यादा नोट जमा करने पर डिक्लेरेशन की अनिवार्यता बुधवार को आरबीआई ने खत्म कर दिया। हालांकि बैंक का सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं होने से बैंक अधिकारियों ने ग्राहकों से डिक्लेरेशन मांगा। इस पर ग्राहक बृहस्पतिवार को रुपये जमा करने की बात कहकर चले गए। जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक अजय कुमार के मुताबिक उपभोक्ताओं की भीड़ थोड़ी कम हुई है। अब उपभोक्ता डिजिटल पेमेंट की ओर भी रुझान करने लगे हैं।
वहीं, मंडावर। बुधवार को कैश लेने के लिए एसबीआई व पीएनबी के बाहर महिलाओं व पुरुषों की लाइन लगी हुई थी। कुछ महिलाओं ने लाइन में बीच में घुसने की कोशिश की तो दूसरी महिलाओं ने विरोध किया।
इस बात पर महिलाएं आमने-सामने आ गई और उनमें खींचतान हो गई। महिलाओं में मारपीट तक की नौबत आ गई। बैंक पर तैनात महिला पुलिसकर्मियों ने महिलाओं को समझाकर शांत किया।
बैंकों में कैश नहीं मायूसी हाथ लगी
धामपुर/अफजलगढ़ में
अधिकांश बैंकों में बुधवार को कैश का टोटा रहा। लोगों को कैश नहीं मिलने से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। बुधवार को पीएनबी और एचडीएफसी के एटीएम भी बंद रहे। दोनों बैंकों के बाहर एटीएम से कैश निकालने के चक्कर में दिन निकलते ही लोगों की भीड़ जमा हो गई थी। कैश का टोटा होने से उनके हाथ मायूसी लगी। उधर, यूनियन बैंक में पांच सौ नोटों की नई करेंसी आने पर बुधवार को दो हजार रुपये ग्राहकों को बांटे गए। लोगों ने धामपुर मंडल के सभी बैंकों की नोटबंदी से लेकर आज तक की बैंकिंग प्रणाली की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की।बुधवार को एचडीएफसी बैंक के एटीएम पर दिनभर लोगों को तांता लगा रहा। हालांकि एटीएम में कैश नहीं होने से बंद रहा। ग्राहक मदन, किशन, भोपाल सिंह, करन सिंह, राजू, कन्हैया का आरोप है कि एचडीएफसी बैंक का एटीएम अधिकारियों ने जानबूझकर बंद कर रखा है। इस एटीएम में कैश का कोई टोटा नहीं है। मंगलवार को तब बंद हुआ जब बैंक के बाहर लोगों ने ज्यादा हंगामा कर दिया था। सर्व यूपी ग्रामीण बैंक खुलते ही कैश समाप्त होने का बोर्ड टांग दिया गया था। कासमपुरगढ़ी में पीएनबी कासमपुरगढी पर नेशनल हाईवे 74 पर लगभग एक किमी लंबी लाइन लग गई। सर्व यूपी ग्रामीण बैंक सीरवासुचंद में कैश नहीं होने के कारण उपभोक्ताओं ने हंगामा किया । ग्रामीण मोहम्मद इल्यास, आजम , यासीन, वीर सिंह , दलपत सिंह , मोहम्मद. अख्तर आदि का कहना है कि सर्व यूपी ग्रामीण बैंक में कई दिनों से उनकी पासबुक जमा है, लेकिन उन्हें भुगतान नहीं किया जा रहा है।
बैंक वाले कह रहे है कैश नहीं है, जब आएगा तभी मिलेगा । ग्राम त्रिलोकपुर निवासी यशोदा, जयवंती, जसवंती देवी ने रोते हुए बताया कि उसने लगभग 20 दिन पहले किताब जमा की थी। बैंक वाले अब उनकी किताब नहीं लौटा रहे हैं।
करोड़ों जमा होने के बाद रिकवरी के लिए तरसे बैंक
बिजनौर। नोटबंदी में पुराने 500 और एक हजार के नोटों की बैंकों में झड़ी लग गई। इसके बावजूद बैंकों में रिकवरी नहीं हो पाई है। ग्राहकों ने रुपये अपने बचत खातों में ही जमा किए हैं। ऋण खातों में नाममात्र की राशि जमा की गई है। आठ नवंबर को नोटबंदी के बाद से बैंकों में रुपये जमा करने के लिए ग्राहकों की भीड़ लगी हुई है। जिलेभर के बैंकों में अब तक 1500 करोड़ रुपये से ज्यादा के पुराने नोट जमा हो चुके हैं। नोट जमा करने के लिए अब भी बैंकों में भीड़ है। जिले के ग्राहकों ने किसान क्रेडिट कार्ड, कार लोन, बाइक लोन, होम लोन, पर्सनल लोन सहित अनेक ऋण योजनाओं में ग्राहकों ने पांच हजार करोड़ से अधिक का ऋण ले रखा है। इनमें से कई खाते ऋण जमा करने के मामले में नियमित भी नहीं हैं। नोटबंदी के बाद बैंक अधिकारियों को उम्मीद थी कि ग्राहक अपने पुराने नोटों से ऋण भी जमा करेंगे। हालांकि जिले में ऐसा नहीं हुआ है। जमा की गई धनराशि में से करीब दस प्रतिशत रुपया ही ऋण खातों में जमा हुआ है। रिकवरी खातों में रुपया जमा नहीं होने से बैंक अधिकारी परेशान हैं। बैंक अधिकारियों के मुताबिक चुनावी साल में ग्राहकों को लग रहा है कि उनका कर्जा माफ हो सकता है। इसलिए ही वे ऋण जमा नहीं कर रहे हैं। जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक अजय कुमार के मुताबिक नोटबंदी के बाद से रिकवरी खातों में उम्मीद के मुताबिक रुपया जमा नहीं हुआ है। ग्राहक केवल अपने बचत खातों में ही रुपया जमा कर रहे हैं। ग्राहक अपने रिकवरी खातों में भी रुपया जमा कर सकते हैं।