{"_id":"5f4fe9ca8ebc3e542245c6dc","slug":"notice-issued-to-100-anganwadi-workers-bijnor-news-mrt499347725","type":"story","status":"publish","title_hn":"100 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नोटिस जारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
100 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नोटिस जारी
विज्ञापन
100 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नोटिस जारी
बिजनौर। आंगनबाड़ी विभाग में 62 साल की आयु पूरी कर चुकी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं की सेवा समाप्त की जाएगी। इनकी जगह पर दूसरी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को नियुक्त किए जाने की उम्मीद है। इस संबंध में शासनादेश आ गया है। विभाग ने 100 से ज्यादा कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को नोटिस भी भेज दिए गए हैं।
महिलाओं व नौनिहालों से कुपोषण को खत्म करने के लिए साल 1975 में महिला बाल विकास एवं पोषाहार विभाग की स्थापना की गई थी। योजनाओं का लाभ पात्रों को देने के लिए तब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं की तैनाती की गई थी। विभाग में आंगनबाड़ियों को नियुक्त तो कर लिया गया लेकिन इनकी सेवानिवृत्ति पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया गया। नियुक्ति के 45 साल बाद भी कार्यकर्ता व सहायिकाएं विभाग में काम कर रहीं थीं। अब शासन ने 62 साल की आयु पूरी कर चुकी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को सेवानिवृत्त करने का फैसला किया है। जिले में 3236 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें करीब 2900 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व इतनी ही सहायिका काम करती हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को हर महीने पांच हजार व सहायिकाओं को 2750 रुपये का मानदेय मिलता है। विभाग द्वारा विभाग में 62 साल की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को चिह्नित करना शुरू कर दिया गया है। काफी कार्यकर्ताओं को इस संबंध में नोटिस भी भेज दिए गए हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी दीप्ति भार्गव के अनुसार शासनादेश के अनुसार कार्य शुरू कर दिया गया है। अब तक काफी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका जांच में अधिक आयु की निकल चुकी हैं। उन्हें नोटिस भेजा जा रहा है।
शासनादेश पर रोष व्याप्त किया
हल्दौर। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं में बिना पेंशन, फंड के सेवानिवृत्त करने को लेकर रोष व्याप्त है। जिससे अपनी जीविका चलाने को लेकर संकट पैदा हो गया है। उन्होंने मामले की शिकायत सीएम के पोर्टल पर करने का निर्णय लिया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज, मनो देवी, कुंता, राजेश्वरी, ऊषा व सहायिका रत्नो देवी, कुसुम, मूर्ति देवी आदि का कहना है कि वे कई वर्षों से आंगनबाड़ी में कार्य कर रही हैं। नियुक्ति के समय कोई आयु सीमा निर्धारित नहीं की गई थी। लेकिन अब 62 वर्ष का आदेश बताकर उन्हें सेवानिवृत्त करने की प्रक्रिया की जा रही है। उन्होंने सेवानिवृत्ति होने पर पांच लाख रुपये व परिवार की एक महिला को नौकरी दिलाए जाने की शासन से मांग की है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बिजनौर। आंगनबाड़ी विभाग में 62 साल की आयु पूरी कर चुकी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं की सेवा समाप्त की जाएगी। इनकी जगह पर दूसरी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को नियुक्त किए जाने की उम्मीद है। इस संबंध में शासनादेश आ गया है। विभाग ने 100 से ज्यादा कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को नोटिस भी भेज दिए गए हैं।
महिलाओं व नौनिहालों से कुपोषण को खत्म करने के लिए साल 1975 में महिला बाल विकास एवं पोषाहार विभाग की स्थापना की गई थी। योजनाओं का लाभ पात्रों को देने के लिए तब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं की तैनाती की गई थी। विभाग में आंगनबाड़ियों को नियुक्त तो कर लिया गया लेकिन इनकी सेवानिवृत्ति पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया गया। नियुक्ति के 45 साल बाद भी कार्यकर्ता व सहायिकाएं विभाग में काम कर रहीं थीं। अब शासन ने 62 साल की आयु पूरी कर चुकी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को सेवानिवृत्त करने का फैसला किया है। जिले में 3236 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें करीब 2900 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व इतनी ही सहायिका काम करती हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को हर महीने पांच हजार व सहायिकाओं को 2750 रुपये का मानदेय मिलता है। विभाग द्वारा विभाग में 62 साल की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को चिह्नित करना शुरू कर दिया गया है। काफी कार्यकर्ताओं को इस संबंध में नोटिस भी भेज दिए गए हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी दीप्ति भार्गव के अनुसार शासनादेश के अनुसार कार्य शुरू कर दिया गया है। अब तक काफी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका जांच में अधिक आयु की निकल चुकी हैं। उन्हें नोटिस भेजा जा रहा है।
विज्ञापन
शासनादेश पर रोष व्याप्त किया
हल्दौर। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं में बिना पेंशन, फंड के सेवानिवृत्त करने को लेकर रोष व्याप्त है। जिससे अपनी जीविका चलाने को लेकर संकट पैदा हो गया है। उन्होंने मामले की शिकायत सीएम के पोर्टल पर करने का निर्णय लिया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज, मनो देवी, कुंता, राजेश्वरी, ऊषा व सहायिका रत्नो देवी, कुसुम, मूर्ति देवी आदि का कहना है कि वे कई वर्षों से आंगनबाड़ी में कार्य कर रही हैं। नियुक्ति के समय कोई आयु सीमा निर्धारित नहीं की गई थी। लेकिन अब 62 वर्ष का आदेश बताकर उन्हें सेवानिवृत्त करने की प्रक्रिया की जा रही है। उन्होंने सेवानिवृत्ति होने पर पांच लाख रुपये व परिवार की एक महिला को नौकरी दिलाए जाने की शासन से मांग की है।
विज्ञापन