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नूरपुर के नूर को लगी किसकी नजर

Thu, 12 Jan 2017 12:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 12 Jan 2017 12:14 AM IST
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Noor, who was the sight of Nurpur
स्योहारा-ताजपुर मार्ग पर टूटा हुआ कडूला नदी का पुल। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
बिजनौर में नूरपुर विधानसभा क्षेत्र का एक ऐतिहासिक अध्याय है। इस क्षेत्र में एशिया का दूसरा सबसे सुंदर चर्च के साथ ही शहीद रिक्की व परवीन सिंह का शहीद स्थल आजादी के बलिदानों की याद दिलाता है। शहीद स्थल की भी दशा आज तक नहीं सुधरी है।  हर साल मेला लगने वाले इस स्थल की ओर किसी की नजर नहीं पड़ी  है। बिजलीघरों से लेकर तमाम समस्याएं इस इलाके को घेरे हुए है। वादों के बाद भी किसी ने भी इन समस्या से निजात दिलाने की  जहमत नहीं उठाई। 
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 नूरपुर विधानसभा सीट का गठन नए परिसीमन 2012 में हुआ है। इससे पहले नूरपुर-स्योहारा विधानसभा में आता था। स्योहारा , धामपुर व चांदपुर के कुछ हिस्से को मिलाकर यह नई विधानसभा सीट बनाई गई। नूरपुर में थाने के पास  शहीद रिक्की सिंह व परवीन सिंह का शहीद स्थल है। हर साल 16 अगस्त  को यहां मेला लगता है। 16 अगस्त 1942 को थाने पर झंडा फहराते हुए दोनों पुलिस  गोली लगने से शहीद हुए थे। लंबे समय से शहीद स्थल पर पार्क   बनाने की मांग होती आ रही है। चुनाव के वक्त नेता पार्क बनवाने का वादा करते आए हैं। पार्क  नहीं बना। शहीद स्थल की दशा खराब है। अब कोई उसकी सुध नहीं ले रहा। 
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चर्च की सुंदरता देखने लायक    है। ताजपुर में स्थित चर्च का दीदार करने के लिए दूरदराज से लोग  आते हैं। चर्च राजा शिवनाथ सिंह  रिक ने अपनी पत्नी की याद में बनवाया था। इतना कुछ होने के बाद भी इस क्षेत्र में समस्या की लंबी फेहरिस्त है। समस्या कम होने की जगह बढ़ती जा रही है। नूरपुर    से पहले स्योहारा विधानसभा सीट    पर चुनाव में घमासान होती आई है। स्योहारा सीट पर भाजपा को कब्जा रहा है। वर्ष 1991 में इस सीट से भाजपा के महावीर सिंह विधायक  बने। वर्ष 1993 में हुए मध्यावधि चुनाव में महावीर सिंह फिर से विधायक बन गए। 1997 में भाजपा के वेदप्रकाश ने इस सीट पर कब्जा जमा लिया। वर्ष 2002 के चुनाव में  यह सीट बसपा की झोली में चली गई। बसपा के टिकट पर कुतुबद्दीन अंसारी चुनाव जीत गए। वर्ष 2007 के  चुनाव में बसपा के टिकट पर   ठाकुर यशपाल सिंह चुनाव जीतकर मंत्री बने। वर्ष 2012 में नूरपुर नई विधानसभा सीट बनी। भाजपा के लोकेंद्र चौहान इस सीट से पहली    बार विधायक बने। चुनाव का बिगुल बजने के बाद नेता इलाके मेें   निकल आए हैं।  नेताओं का वादों का दौर शुरू हो गया है। ये नेता वोटरों को रिझाने में जुटे हैं। 
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