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Bijnor News: नजीबाबाद-शिया विद्वानों ने जिंदगी से जुड़े दिए पैगाम
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नजीबाबाद। जोगीरम्पुरी मजलिसों में खिताब के लिए आए शिया विद्वानों ने हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की कुर्बानियों से सबक लेने, इल्म से जिंदगी को संवारने, नेकी और इंसानियत की राह पर चलने का पैगाम दिया।
इंसाफ और हक के लिए जागरूक रहें -
जौनपुर से आए मौलाना सय्यद सफदर हुसैन जैदी ने कहा कि जिस इंसान ने अपने को पहचान लिया, वहीं पैदा करने वाले को पहचानता है। इंसान को जिंदगी का मकसद पाने के लिए नेकी की राह पर चलकर इंसाफ और हक पाने के लिए जागरूक रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इंसानियत के रास्ते से भटके लोग इस्लाम से भी दूर होने लगते हैं।
-.गंगा जमुनी तहजीब पहचान बनी
हजरत इमाम हुसैन ने दीन और इंसानियत को बचाने के लिए कुर्बानियां दी। कर्बला की जंग जुल्म के आगे न झुकने और इंसानियत की राह पर चलने का पैगाम देती है। मुल्क में अलग-अलग मजहब के लोग रहते हैं, इसके बावजूद इंसानियत और गंगा-जमुनी तहजीब हमारी पहचान बन चुकी है।
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जुबान दिलाती है पहचान
मुंडाली मेरठ के मौलाना शेरअली जैदी कहते है कि इंसान का किरदार उसकी जुबान के नीचे छिपा है। अच्छी जुबान ही इंसान की असली पहचान है। वे ही लोग समाज और मुल्क के वफादार होते है, जिनके दिल, दिमाग और जुबान में प्यार, मोहब्बत और अपनत्व होता है।
- मौला-ए-कायनात ने अदालत के हिमायती रहे
मौलाना नईम अब्बास नौगांवी फरमाते हैं कि मौला-ए-कायनात ने अदालत पर जोर दिया। वो चाहते थे कि अदालत हो और सब आदिल हों। उन्होंने कहा कि मौला-ए-कायनात के दौर में आदिल पर अमल करने का ही फलसबा था कि उनकी हुकूमत में कोई भूखा नहीं रहा।
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इंसाफ और हक के लिए जागरूक रहें -
जौनपुर से आए मौलाना सय्यद सफदर हुसैन जैदी ने कहा कि जिस इंसान ने अपने को पहचान लिया, वहीं पैदा करने वाले को पहचानता है। इंसान को जिंदगी का मकसद पाने के लिए नेकी की राह पर चलकर इंसाफ और हक पाने के लिए जागरूक रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इंसानियत के रास्ते से भटके लोग इस्लाम से भी दूर होने लगते हैं।
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-.गंगा जमुनी तहजीब पहचान बनी
हजरत इमाम हुसैन ने दीन और इंसानियत को बचाने के लिए कुर्बानियां दी। कर्बला की जंग जुल्म के आगे न झुकने और इंसानियत की राह पर चलने का पैगाम देती है। मुल्क में अलग-अलग मजहब के लोग रहते हैं, इसके बावजूद इंसानियत और गंगा-जमुनी तहजीब हमारी पहचान बन चुकी है।
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जुबान दिलाती है पहचान
मुंडाली मेरठ के मौलाना शेरअली जैदी कहते है कि इंसान का किरदार उसकी जुबान के नीचे छिपा है। अच्छी जुबान ही इंसान की असली पहचान है। वे ही लोग समाज और मुल्क के वफादार होते है, जिनके दिल, दिमाग और जुबान में प्यार, मोहब्बत और अपनत्व होता है।
- मौला-ए-कायनात ने अदालत के हिमायती रहे
मौलाना नईम अब्बास नौगांवी फरमाते हैं कि मौला-ए-कायनात ने अदालत पर जोर दिया। वो चाहते थे कि अदालत हो और सब आदिल हों। उन्होंने कहा कि मौला-ए-कायनात के दौर में आदिल पर अमल करने का ही फलसबा था कि उनकी हुकूमत में कोई भूखा नहीं रहा।