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राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाएंगे नगीना के खिलौने
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नगीना में काष्ठ कला में बनाए गए लकड़ी के खिलौने।
- फोटो : BIJNOR
राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाएंगे नगीना के खिलौने
बिजनौर। नगीना के काष्ठकला के साथ-साथ अब नगीना के लकड़ी के खिलौने को भी बड़ा बाजार मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वदेशी खिलौनों का बाजार बढ़ाने की अपील के बाद नगीना के खिलौना उद्योग को भी शामिल किया गया है। करीब 400 करोड़ के काष्ठकला उद्योग में लकड़ी के खिलौने केवल 50 लाख रुपये तक के ही बनते हैं। अब इन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए शासन से आई टीम ने इसकी तमाम जानकारी जुटाई है।
जिले में नगीना का काष्ठकला उद्योग दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यहां पर मुख्य रूप से लकड़ी की ज्वैलरी, शृंगार केस, छड़ी, घड़ी, स्टिक आदि बनते हैं। नगीना में लकड़ी के छोटे खिलौने भी बनते हैं, लेकिन इन्हें आज तक बाजार नहीं मिला है। 400 करोड़ के काष्ठकला के कारोबार में लकड़ी के खिलौनों का बाजार 50 लाख से भी कम है। बाजार में चीन के खिलौनों की भरमार है। यहां तक कि देवी देवताओं की मूर्ति भी चीन से ही आती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार मंच से खिलौना उद्योग को बढ़ावा देने की बात कर चुके हैं।
अगर लोकल में ही खिलौने बनते हैं और वे ही बिकेंगे तो देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। नगीना में बनने वाले लकड़ी के खिलौनों को प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए अभियान में शामिल कर लिया गया है। शासन की टीम ने लकड़ी के खिलौनों के फोटो व सभी जानकारी भी ले ली है। अब इन खिलौनों को बड़े स्तर पर बनाकर बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। शासन की मंशा है कि लकड़ी के खिलौनों के जिले के कारोबार को 50 लाख से बढ़ाकर करोड़ों रुपये में लेकर जाया जाए।
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खिलौनों में फिट होती है मशीन
लकड़ी के खिलौनों के नाम पर आमतौर पर दिमाग में घोड़े, हाथी आदि की तस्वीर आती है, लेकिन यह पुराने जमाने की बात हो गई है। नगीना के लकड़ी के खिलौने आधुनिक भी हो रहे हैं। कई तरह के खिलौनों में मशीन भी फीट होती है। यह खिलौने चाबी से भी चलते हैं। लकड़ी के खिलौने हाथ की कारीगरी के सबसे सुंदर नमूने होते हैं। लकड़ी के खिलौनों पर हाथ से सुंदर नक्काशी भी की जाती है। यह केवल खेलने के ही नहीं बल्कि घर में सजावट के हिसाब से भी बहुत सुंदर होते हैं।
खिलौने का बढ़ेगा व्यापार : इरशाद
काष्ठकला उद्यमी इरशाद मुल्तानी के अनुसार सहारनपुर से आई टीम ने नगीना में लकड़ी से बने खिलौनों के बाजार की संभावनाएं तलाशी हैं। खिलौनों के उद्योग को प्रधानमंत्री के अभियान में शामिल किया गया है। इससे व्यापार बढ़ेगा और लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।
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बिजनौर। नगीना के काष्ठकला के साथ-साथ अब नगीना के लकड़ी के खिलौने को भी बड़ा बाजार मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वदेशी खिलौनों का बाजार बढ़ाने की अपील के बाद नगीना के खिलौना उद्योग को भी शामिल किया गया है। करीब 400 करोड़ के काष्ठकला उद्योग में लकड़ी के खिलौने केवल 50 लाख रुपये तक के ही बनते हैं। अब इन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए शासन से आई टीम ने इसकी तमाम जानकारी जुटाई है।
जिले में नगीना का काष्ठकला उद्योग दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यहां पर मुख्य रूप से लकड़ी की ज्वैलरी, शृंगार केस, छड़ी, घड़ी, स्टिक आदि बनते हैं। नगीना में लकड़ी के छोटे खिलौने भी बनते हैं, लेकिन इन्हें आज तक बाजार नहीं मिला है। 400 करोड़ के काष्ठकला के कारोबार में लकड़ी के खिलौनों का बाजार 50 लाख से भी कम है। बाजार में चीन के खिलौनों की भरमार है। यहां तक कि देवी देवताओं की मूर्ति भी चीन से ही आती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार मंच से खिलौना उद्योग को बढ़ावा देने की बात कर चुके हैं।
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अगर लोकल में ही खिलौने बनते हैं और वे ही बिकेंगे तो देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। नगीना में बनने वाले लकड़ी के खिलौनों को प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए अभियान में शामिल कर लिया गया है। शासन की टीम ने लकड़ी के खिलौनों के फोटो व सभी जानकारी भी ले ली है। अब इन खिलौनों को बड़े स्तर पर बनाकर बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। शासन की मंशा है कि लकड़ी के खिलौनों के जिले के कारोबार को 50 लाख से बढ़ाकर करोड़ों रुपये में लेकर जाया जाए।
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खिलौनों में फिट होती है मशीन
लकड़ी के खिलौनों के नाम पर आमतौर पर दिमाग में घोड़े, हाथी आदि की तस्वीर आती है, लेकिन यह पुराने जमाने की बात हो गई है। नगीना के लकड़ी के खिलौने आधुनिक भी हो रहे हैं। कई तरह के खिलौनों में मशीन भी फीट होती है। यह खिलौने चाबी से भी चलते हैं। लकड़ी के खिलौने हाथ की कारीगरी के सबसे सुंदर नमूने होते हैं। लकड़ी के खिलौनों पर हाथ से सुंदर नक्काशी भी की जाती है। यह केवल खेलने के ही नहीं बल्कि घर में सजावट के हिसाब से भी बहुत सुंदर होते हैं।
खिलौने का बढ़ेगा व्यापार : इरशाद
काष्ठकला उद्यमी इरशाद मुल्तानी के अनुसार सहारनपुर से आई टीम ने नगीना में लकड़ी से बने खिलौनों के बाजार की संभावनाएं तलाशी हैं। खिलौनों के उद्योग को प्रधानमंत्री के अभियान में शामिल किया गया है। इससे व्यापार बढ़ेगा और लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।