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Bijnor News: गन्ना बेल्ट में अब लहलहाएगी सरसों
Wed, 03 Sep 2025 12:08 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Wed, 03 Sep 2025 12:08 AM IST
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बिजनौर। गन्ना बेल्ट में सरसों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए किसानों को 8550 निशुल्क सरसों बीज की मिनी किट वितरित की जाएंगी। साथ ही गोष्ठियों के माध्यम से किसानों को सरसों की खेती करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। तिलहन की खेती से दूरी बनाने वाले किसानों को फिर से इस ओर मोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
जनपद बिजनौर में 2 लाख 62 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ना फसल है। गन्ना पेराई के लिए कोल्हू, क्रेशर के अलावा दस चीनी मिलों का संचालन होता है। उसके बाद गेहूं, धान आदि का उत्पादन होता है। यहां तिलहन का करीब 13 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल रहता है। उप कृषि निदेशक डॉ. घनश्याम वर्मा ने बताया कि सरसों का दायरा बढ़ाने के लिए मिनी किट वितरित की जाएगी। एक किसान को एक मिनी किट दी जाएगी।
ऐसे होगा मिनीकिट का वितरण
उप कृषि निदेशक डॉ. घनश्याम वर्मा ने बताया कि मिनीकिट के लिए किसान को कृषि विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन 25 सितंबर तक करना होगा। एक मिनीकिट का वजन 2 किलोग्राम है। लक्ष्य से ज्यादा बुकिंग होने की दशा में ई-लाटरी के माध्यम से किसानों का चयन होगा। चयनित किसानों को संबंधित विकास खंड के राजकीय कृषि निवेश भंडार से मिलेगी। यह किट का वितरण निशुल्क होगा
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सरसों की खेती के लाभ
-सरसों की खेती से किसानों की आय में वृद्धि होगी।
- सरसों की खली का उपयोग पशुओं को खिलाने में होता है।
-जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में भी सरसों मददगार है।
सरसों की खेती के लिए चल रहा उपयुक्त समय
नगीना कृषि वेधशाला व अनुसंधान के वैज्ञानिक डॉ. केके सिंह ने बताया कि सरसों की खेती के लिए बलुई दोमट से चिकनी दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। मिट्टी का पीएच मान 5.5 से 6.5 के बीच आदर्श होता है। सरसों की बुवाई सितंबर के दूसरे पखवाड़े से अक्तूबर के पहले पखवाड़े तक अच्छा है।
शरदकालीन गन्ना बुवाई के साथ पैदा होगी सरसों
जिला गन्ना अधिकारी पीएन सिंह ने बताया कि शरदकालीन ट्रेंच विधि से गन्ना बुवाई कर सहफसली के रूप में सरसों का उत्पादन अच्छा होता है। कम खर्च व कम श्रम में अधिक आय होगी और जमीन के लिए लाभदायक रहेगी।
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जनपद बिजनौर में 2 लाख 62 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ना फसल है। गन्ना पेराई के लिए कोल्हू, क्रेशर के अलावा दस चीनी मिलों का संचालन होता है। उसके बाद गेहूं, धान आदि का उत्पादन होता है। यहां तिलहन का करीब 13 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल रहता है। उप कृषि निदेशक डॉ. घनश्याम वर्मा ने बताया कि सरसों का दायरा बढ़ाने के लिए मिनी किट वितरित की जाएगी। एक किसान को एक मिनी किट दी जाएगी।
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ऐसे होगा मिनीकिट का वितरण
उप कृषि निदेशक डॉ. घनश्याम वर्मा ने बताया कि मिनीकिट के लिए किसान को कृषि विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन 25 सितंबर तक करना होगा। एक मिनीकिट का वजन 2 किलोग्राम है। लक्ष्य से ज्यादा बुकिंग होने की दशा में ई-लाटरी के माध्यम से किसानों का चयन होगा। चयनित किसानों को संबंधित विकास खंड के राजकीय कृषि निवेश भंडार से मिलेगी। यह किट का वितरण निशुल्क होगा
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सरसों की खेती के लाभ
-सरसों की खेती से किसानों की आय में वृद्धि होगी।
- सरसों की खली का उपयोग पशुओं को खिलाने में होता है।
-जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में भी सरसों मददगार है।
सरसों की खेती के लिए चल रहा उपयुक्त समय
नगीना कृषि वेधशाला व अनुसंधान के वैज्ञानिक डॉ. केके सिंह ने बताया कि सरसों की खेती के लिए बलुई दोमट से चिकनी दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। मिट्टी का पीएच मान 5.5 से 6.5 के बीच आदर्श होता है। सरसों की बुवाई सितंबर के दूसरे पखवाड़े से अक्तूबर के पहले पखवाड़े तक अच्छा है।
शरदकालीन गन्ना बुवाई के साथ पैदा होगी सरसों
जिला गन्ना अधिकारी पीएन सिंह ने बताया कि शरदकालीन ट्रेंच विधि से गन्ना बुवाई कर सहफसली के रूप में सरसों का उत्पादन अच्छा होता है। कम खर्च व कम श्रम में अधिक आय होगी और जमीन के लिए लाभदायक रहेगी।