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गोल्डन कार्ड में जिलेवासियों के उपचार पर खर्च हुई 25 करोड़ से ज्यादा की रकम
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गोल्डन कार्ड से उपचार पर खर्च हुई 25 करोड़ से ज्यादा की रकम
बिजनौर। आम जनता को स्वास्थ्य सुविधाओं में आर्थिक तौर पर मदद के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री गोल्डन कार्ड योजना जिले में बहुत परवान चढ़ी है। योजना में अब तक 29 हजार लोगों के इलाज में 25 करोड़ से ज्यादा रुपये खर्च हो चुके हैं।
केंद्र सरकार द्वारा तीन साल पहले प्रधानमंत्री गोल्ड कार्ड योजना शुरू की गई थी। योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों को गंभीर बीमारियों के इलाज में मदद करना है। योजना में 14 लाख से अधिक जिले वासियों के गोल्ड कार्ड बनने हैं। अब तक तीन लाख 60 हजार 598 कार्ड बन भी चुके हैं। योजना में हर परिवार को एक साल में पांच लाख रुपये का हेल्थ इंश्योरेंस मिलता है। जिस सदस्य का गोल्डन कार्ड बना हुआ है उसे अगर किसी ऐसी बीमारी का इलाज कराना है कि जिसमें अस्पताल में भर्ती होने पड़ेगा तो इसमें इलाज का पांच लाख रुपये का खर्च सरकार उठती है। उपचार के लिए जिले में 44 अस्पतालों को नामित किया गया है।
अस्पताल इलाज के खर्च का बिल सरकार से क्लेम करते हैं। सरकार द्वारा अस्पताल को बिल का भुगतान ऑनलाइन कर दिया जाता है। योजना में जिले में अब तक करीब 29 हजार से ज्यादा लोग अस्पतालों में अपना इलाज करा चुके हैं। इसका साढ़े 25 करोड़ से ज्यादा का भुगतान अस्पतालों के खातों में भेजा भी जा चुका है। बाकी मरीजों का पैसा भी मांगा गया है। अब गोल्डन कार्ड में समूहों से जुड़ी महिलाओं, श्रम विभाग व मनरेगा में पंजीकृत श्रमिकों को भी योजना का लाभ दिया जा रहा है। योजना में एक ही बार में कई श्रमिकों के गोल्डन कार्ड बनाकर दिए जा रहे हैं।
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दे रहे योजना का लाभ
योजना की कोआर्डिनेटर डा.नताशा सिंह के अनुसार पात्र परिवार गोल्डन कार्ड योजना का लाभ ले रहे हैं। योजना में सभी पात्रों का लाभ दिया जा रहा है।
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बिजनौर। आम जनता को स्वास्थ्य सुविधाओं में आर्थिक तौर पर मदद के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री गोल्डन कार्ड योजना जिले में बहुत परवान चढ़ी है। योजना में अब तक 29 हजार लोगों के इलाज में 25 करोड़ से ज्यादा रुपये खर्च हो चुके हैं।
केंद्र सरकार द्वारा तीन साल पहले प्रधानमंत्री गोल्ड कार्ड योजना शुरू की गई थी। योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों को गंभीर बीमारियों के इलाज में मदद करना है। योजना में 14 लाख से अधिक जिले वासियों के गोल्ड कार्ड बनने हैं। अब तक तीन लाख 60 हजार 598 कार्ड बन भी चुके हैं। योजना में हर परिवार को एक साल में पांच लाख रुपये का हेल्थ इंश्योरेंस मिलता है। जिस सदस्य का गोल्डन कार्ड बना हुआ है उसे अगर किसी ऐसी बीमारी का इलाज कराना है कि जिसमें अस्पताल में भर्ती होने पड़ेगा तो इसमें इलाज का पांच लाख रुपये का खर्च सरकार उठती है। उपचार के लिए जिले में 44 अस्पतालों को नामित किया गया है।
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अस्पताल इलाज के खर्च का बिल सरकार से क्लेम करते हैं। सरकार द्वारा अस्पताल को बिल का भुगतान ऑनलाइन कर दिया जाता है। योजना में जिले में अब तक करीब 29 हजार से ज्यादा लोग अस्पतालों में अपना इलाज करा चुके हैं। इसका साढ़े 25 करोड़ से ज्यादा का भुगतान अस्पतालों के खातों में भेजा भी जा चुका है। बाकी मरीजों का पैसा भी मांगा गया है। अब गोल्डन कार्ड में समूहों से जुड़ी महिलाओं, श्रम विभाग व मनरेगा में पंजीकृत श्रमिकों को भी योजना का लाभ दिया जा रहा है। योजना में एक ही बार में कई श्रमिकों के गोल्डन कार्ड बनाकर दिए जा रहे हैं।
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दे रहे योजना का लाभ
योजना की कोआर्डिनेटर डा.नताशा सिंह के अनुसार पात्र परिवार गोल्डन कार्ड योजना का लाभ ले रहे हैं। योजना में सभी पात्रों का लाभ दिया जा रहा है।