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मिलों ने देने शुरू कीं बांड की गन्ना पर्ची
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मिलों ने देने शुरू की बांड की गन्ना पर्ची
बिजनौर। जिले की चीनी मिलों ने किसानों को बेसिक कोटे के अलावा बांड के पास भी जारी करने शुरू कर दिए हैं। इससे किसानों को गन्ना चीनी मिलों में सप्लाई करने में आसानी होगी। बेसिक कोटे की गन्ना पर्ची कम होने से किसानों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही थी।
किसानों का चीनी मिलों पर बेसिक कोटा पिछले सालों की गन्ना आपूर्ति पर निर्भर रहता है। किसानों ने पिछले दो साल, तीन साल या पांच साल में जितना गन्ना मिल में डाला है उसका औसत निकाला जाता है। दो, तीन या पांच साल में जिस वर्ग की औसत सप्लाई में जो अधिक होती है वह किसान की बेसिक सप्लाई मानी जाती है। किसान मिल को उतने ही गन्ने की आपूर्ति कर सकता है। लेकिन किसान गन्ना रकबा तो बढ़ा ही रहे हैं गन्ने की पैदावार भी अधिक निकल रही है। इसलिए किसानों की बेसिक सप्लाई से कहीं ज्यादा गन्ना किसानों के पास निकल रहा है। बेसिक कोटे से अधिक गन्ने की सप्लाई के लिए चीनी मिल बांड लगाकर अलग से किसानों को गन्ना पर्ची जारी करती हैं। जिले की चीनी मिलों ने बांड लगाकर किसानों को गन्ना पर्ची देनी शुरू कर दी हैं। बिलाई चीनी मिल ने सात लाख, अफजलगढ़ व बिजनौर चीनी मिल ने दो-दो लाख का बांड लगाया है। जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह के अनुसार चीनी मिलों ने बांड की गन्ना पर्ची देनी शुरू कर दी हैं। शत प्रतिशत गन्ने की पेराई करके ही चीनी मिल बंद होंगी।
15-16 तक बंद हो जाएगी मिल
अफजलगढ़। द्वारिकेश चीनी मिल के मुख्य महाप्रबंधक एसपी सिंह ने बताया कि चालू सत्र में एक करोड़ सोलह लाख कुंतल गन्ना पेराई का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। एक करोड़ सात लाख तैंतालीस हजार कुंतल गन्ने की पेराई की जा चुकी है। अब तक तेरह लाख सत्ताईस हजार सात सौ नब्बे कुंतल चीनी का उत्पादन किया गया है। इसमें सात लाख चव्वन हजार छह सौ अस्सी कुंतल शुगर फ्री चीनी शामिल है। शुगर फ्री चीनी का निर्यात किया जा चुका है। उन्होंने 15-16 मई तक मिल बंद होने की संभावना व्यक्त की है।
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बिजनौर। जिले की चीनी मिलों ने किसानों को बेसिक कोटे के अलावा बांड के पास भी जारी करने शुरू कर दिए हैं। इससे किसानों को गन्ना चीनी मिलों में सप्लाई करने में आसानी होगी। बेसिक कोटे की गन्ना पर्ची कम होने से किसानों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही थी।
किसानों का चीनी मिलों पर बेसिक कोटा पिछले सालों की गन्ना आपूर्ति पर निर्भर रहता है। किसानों ने पिछले दो साल, तीन साल या पांच साल में जितना गन्ना मिल में डाला है उसका औसत निकाला जाता है। दो, तीन या पांच साल में जिस वर्ग की औसत सप्लाई में जो अधिक होती है वह किसान की बेसिक सप्लाई मानी जाती है। किसान मिल को उतने ही गन्ने की आपूर्ति कर सकता है। लेकिन किसान गन्ना रकबा तो बढ़ा ही रहे हैं गन्ने की पैदावार भी अधिक निकल रही है। इसलिए किसानों की बेसिक सप्लाई से कहीं ज्यादा गन्ना किसानों के पास निकल रहा है। बेसिक कोटे से अधिक गन्ने की सप्लाई के लिए चीनी मिल बांड लगाकर अलग से किसानों को गन्ना पर्ची जारी करती हैं। जिले की चीनी मिलों ने बांड लगाकर किसानों को गन्ना पर्ची देनी शुरू कर दी हैं। बिलाई चीनी मिल ने सात लाख, अफजलगढ़ व बिजनौर चीनी मिल ने दो-दो लाख का बांड लगाया है। जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह के अनुसार चीनी मिलों ने बांड की गन्ना पर्ची देनी शुरू कर दी हैं। शत प्रतिशत गन्ने की पेराई करके ही चीनी मिल बंद होंगी।
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15-16 तक बंद हो जाएगी मिल
अफजलगढ़। द्वारिकेश चीनी मिल के मुख्य महाप्रबंधक एसपी सिंह ने बताया कि चालू सत्र में एक करोड़ सोलह लाख कुंतल गन्ना पेराई का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। एक करोड़ सात लाख तैंतालीस हजार कुंतल गन्ने की पेराई की जा चुकी है। अब तक तेरह लाख सत्ताईस हजार सात सौ नब्बे कुंतल चीनी का उत्पादन किया गया है। इसमें सात लाख चव्वन हजार छह सौ अस्सी कुंतल शुगर फ्री चीनी शामिल है। शुगर फ्री चीनी का निर्यात किया जा चुका है। उन्होंने 15-16 मई तक मिल बंद होने की संभावना व्यक्त की है।
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