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हैदरपुर वेटलैंड में होने लगा प्रवासी पक्षियों का बसेरा
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हैदरपुर वेटलैंड में होने लगा प्रवासी पक्षियों का बसेरा
रजनीश त्यागी
बिजनौर। यूं ही हैदरपुर वेटलैंड को पक्षियों के स्वर्ग के नाम से नहीं पुकारा जा रहा। अभी नवंबर माह आधा ही बीता है और प्रवासी पक्षियों ने यहां डेरा भी डाल लिया। प्रवासी पक्षियों को बड़ी संख्या में देख पक्षी प्रेमी भी गदगद नजर आ रहे हैं। अपनी पक्षी विशेषज्ञता और पक्षी प्रेम के कारण बर्ड मैन कहे जाने वाले डॉ.सालिम अली के जन्मदिवस 12 नवंबर पर गणना कराई तो आंकड़े देख पक्षी प्रेमियों के चेहरे खिल उठे। इस गणना में 121 प्रजाति के 18 हजार से ज्यादा पक्षी देखे गए।
बिजनौर गंगा बैराज की अपस्ट्रीम में सर्दियों में पक्षियों का बड़ा बसेरा रहता है। फिर चाहे वह हैदरपुर वेटलैंड हो या फिर बिजनौर रावली बंधे के पास का गंगा क्षेत्र, सभी जगह नवंबर से मार्च तक प्रवासी पक्षियों का बसेरा रहता है। गंगा का करीब यह दस किलोमीटर का ऐसा क्षेत्र है, जिसे वेटलैंड की श्रेणी में रखा गया है। कुछ साल पहले ही हैदरपुर वेटलैंड को विकसित भी किया जा चुका है। वहीं बात यदि गंगा पर इस बार आने वाले पक्षियों की करें तो आंकड़े चौंकाने वाले हैं। नवंबर के अंत तक आमतौर पर इतनी संख्या में पक्षी नहीं देखे जाते थे, लेकिन इस बार भरपूर संख्या में पक्षी दिख रहे हैं। बर्ड मैन कहे जाने वाले डॉ.सालिम अली के जन्मदिवस पर डब्ल्यूडब्ल्यूएफ, वन विभाग ने मिलकर हैदरपुर वेटलैंड में पक्षियों की गणना कराई। वहां पर 121 प्रजाति के 18,242 पक्षी देखे गए। पक्षी गणना टीम में शामिल रहे बर्ड वॉचर आशीष लोया ने बताया कि इस बार ऐसे कई प्रजाति के पक्षी हैं, जो ज्यादा संख्या में दिखे हैं। कई दुर्लभ पक्षी भी दिखे हैं। टीम में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के कोआर्डिनेटर शाहनवाज, निखिल जॉन और यूपीएफडी स्टाफ मोहन भी रहे।
कई पक्षियों के दिखे बड़े झुंड
इस बार हुई गणना में कई प्रजाति के पक्षियों के बड़े झुंड नजर आए। इसमें फेरुजेनस डक का करीब पांच हजार का झुंड देखा गया। यह सबसे बड़ा झुंड था। कॉमन पोचार्ड का दो हजार, गैडवाल पक्षी छह हजार से ज्यादा दिखे। रूडी शेल्डक्स की संख्या 250 देखी गई। रूडी शेल्डक्स की संख्या अभी कम है। ग्रेलैग गूज की संख्या भी अभी मात्र 300 ही है, जो पिछले साल के मुकाबले कम है। माना जा रहा है कि नवंबर के अंत तक दूर देशों से आने वाले पक्षी भी जा जाएंगे।
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इस सीजन में पहली बार दिखी ब्लैक नेक्ड स्टॉर्क
जो गणना रिपोर्ट तैयार की गई, उसके मुताबिक इस सीजन में पहली बार हैदरपुर वेटलैंड के आसपास ब्लैक नेक्ड स्टॉर्क पक्षी देखा गया है। वहीं इस दौरान बिजनौर की ओर गंगा में बार हेडेड गूज, कॉमन क्रेन का भी बड़ा झुंड देखा गया।
कहां से आते हैं पक्षी
प्रवासी पक्षी अक्सर यूरोपियन देशों से आते हैं। पक्षी विशेषज्ञों की माने तो जब यूरोपियन देशों में ठंड बढ़ती है और पक्षियों को खाने की कमी होने लगती है, ये एशियाई देशों की ओर रुख करते हैं। भारत में भी यह पक्षी दक्षिण भारत तक जाते हैं। बिजनौर जिले की बात करें तो यह स्थान पक्षियों के लिए बेहतरीन बसेरा है।
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रजनीश त्यागी
बिजनौर। यूं ही हैदरपुर वेटलैंड को पक्षियों के स्वर्ग के नाम से नहीं पुकारा जा रहा। अभी नवंबर माह आधा ही बीता है और प्रवासी पक्षियों ने यहां डेरा भी डाल लिया। प्रवासी पक्षियों को बड़ी संख्या में देख पक्षी प्रेमी भी गदगद नजर आ रहे हैं। अपनी पक्षी विशेषज्ञता और पक्षी प्रेम के कारण बर्ड मैन कहे जाने वाले डॉ.सालिम अली के जन्मदिवस 12 नवंबर पर गणना कराई तो आंकड़े देख पक्षी प्रेमियों के चेहरे खिल उठे। इस गणना में 121 प्रजाति के 18 हजार से ज्यादा पक्षी देखे गए।
बिजनौर गंगा बैराज की अपस्ट्रीम में सर्दियों में पक्षियों का बड़ा बसेरा रहता है। फिर चाहे वह हैदरपुर वेटलैंड हो या फिर बिजनौर रावली बंधे के पास का गंगा क्षेत्र, सभी जगह नवंबर से मार्च तक प्रवासी पक्षियों का बसेरा रहता है। गंगा का करीब यह दस किलोमीटर का ऐसा क्षेत्र है, जिसे वेटलैंड की श्रेणी में रखा गया है। कुछ साल पहले ही हैदरपुर वेटलैंड को विकसित भी किया जा चुका है। वहीं बात यदि गंगा पर इस बार आने वाले पक्षियों की करें तो आंकड़े चौंकाने वाले हैं। नवंबर के अंत तक आमतौर पर इतनी संख्या में पक्षी नहीं देखे जाते थे, लेकिन इस बार भरपूर संख्या में पक्षी दिख रहे हैं। बर्ड मैन कहे जाने वाले डॉ.सालिम अली के जन्मदिवस पर डब्ल्यूडब्ल्यूएफ, वन विभाग ने मिलकर हैदरपुर वेटलैंड में पक्षियों की गणना कराई। वहां पर 121 प्रजाति के 18,242 पक्षी देखे गए। पक्षी गणना टीम में शामिल रहे बर्ड वॉचर आशीष लोया ने बताया कि इस बार ऐसे कई प्रजाति के पक्षी हैं, जो ज्यादा संख्या में दिखे हैं। कई दुर्लभ पक्षी भी दिखे हैं। टीम में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के कोआर्डिनेटर शाहनवाज, निखिल जॉन और यूपीएफडी स्टाफ मोहन भी रहे।
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कई पक्षियों के दिखे बड़े झुंड
इस बार हुई गणना में कई प्रजाति के पक्षियों के बड़े झुंड नजर आए। इसमें फेरुजेनस डक का करीब पांच हजार का झुंड देखा गया। यह सबसे बड़ा झुंड था। कॉमन पोचार्ड का दो हजार, गैडवाल पक्षी छह हजार से ज्यादा दिखे। रूडी शेल्डक्स की संख्या 250 देखी गई। रूडी शेल्डक्स की संख्या अभी कम है। ग्रेलैग गूज की संख्या भी अभी मात्र 300 ही है, जो पिछले साल के मुकाबले कम है। माना जा रहा है कि नवंबर के अंत तक दूर देशों से आने वाले पक्षी भी जा जाएंगे।
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इस सीजन में पहली बार दिखी ब्लैक नेक्ड स्टॉर्क
जो गणना रिपोर्ट तैयार की गई, उसके मुताबिक इस सीजन में पहली बार हैदरपुर वेटलैंड के आसपास ब्लैक नेक्ड स्टॉर्क पक्षी देखा गया है। वहीं इस दौरान बिजनौर की ओर गंगा में बार हेडेड गूज, कॉमन क्रेन का भी बड़ा झुंड देखा गया।
कहां से आते हैं पक्षी
प्रवासी पक्षी अक्सर यूरोपियन देशों से आते हैं। पक्षी विशेषज्ञों की माने तो जब यूरोपियन देशों में ठंड बढ़ती है और पक्षियों को खाने की कमी होने लगती है, ये एशियाई देशों की ओर रुख करते हैं। भारत में भी यह पक्षी दक्षिण भारत तक जाते हैं। बिजनौर जिले की बात करें तो यह स्थान पक्षियों के लिए बेहतरीन बसेरा है।

बिजनौर में गंगा बैराज के पास हैदरपुर वेटलैंड में उड़ान भरते प्रवासी पक्षी।- फोटो : BIJNOR

बिजनौर में गंगा बैराज के पास हैदरपुर वेटलैंड में उड़ान भरते प्रवासी पक्षी।- फोटो : BIJNOR