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Bijnor News: बिजनौर - इतिहास के पन्नों से बाहर आए आजादी के दीवाने
Fri, 11 Aug 2023 11:34 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Fri, 11 Aug 2023 11:34 PM IST
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बिजनौर में जिला कारागार में शहीद शचीन्द्रनाथ बख्शी की प्रतिमा का अनावराण करते डीजी जेल, डीएम व
- जेल में शचींद्रनाथ बख्शी की प्रतिमा और 419 क्रांतिकारियों के शिलापट का हुआ अनावरण
- अनावरण करने के लिए लखनऊ से बिजनौर पहुंचे डीजी जेल
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। आजादी के 75 साल बाद बिजनौर जेल के इतिहास में एक अध्याय जोड़ा गया है। दरअसल, आजादी की जंग की वजह से जेल में बंद रहे क्रांतिकारियों को इतिहास के पन्नों से बाहर ही नहीं लाया गया बल्कि शिलापट पर उन्हें फिर से पहचान दिलाने का काम हुआ। जी हां, साल 1925 से देश आजाद होने तक जेल में बंद रहे 419 क्रांतिकारियों के बारे में अब लोग जान सकेंगे। इनकी याद में शहीद स्मारिका और शचींद्रनाथ बख्शी की प्रतिमा का अनावरण किया गया।
शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पुलिस महानिदेशक कारागार एसएन साबत रहे। उन्होंने, डीएम उमेश मिश्रा, एसपी नीरज कुमार जादौन, एएसपी सिटी डॉ. प्रवीन रंजन सिंह, जेल अधीक्षक डॉ. अदिति श्रीवास्तव की मौजूदगी में जेल गेट के पास हाल में निर्मित शहीद स्मारिका और क्रांतिकारी शचींद्रनाथ बख्शी की प्रतिमा का अनावरण किया। बता दें कि साल 1925 से साल 1947 तक का रिकाॅर्ड अनुवाद किया गया है। जिसमें सामने आया कि इन 22 सालों में 419 लोग सिर्फ भारत रक्षा कानून के तहत जेल में डाले गए थे।
साल 1915 में लागू हुए भारत रक्षा कानून के तहत अंग्रेजी सरकार क्रांतिकारियों को जेल भेजने के लिए करती थी। बिजनौर जेल में बंद रहे इन 419 क्रांतिकारियों की याद में एक स्मारिका बनाई गई है। जिसमें लगे शिलापटों पर इन सभी आजादी के दीवानों के नाम लिखे गए हैं।
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डीजी ने जेल का निरीक्षण भी किया
शहीद स्मारिका का अनावरण करने के बाद डीजी जेल एसएन साबत ने जेल के अंदर फल वाटिका का उद्घाटन और पौधरोपण भी किया। साथ ही जेल का निरीक्षण का बंदियों से बात की। उन्होंने शहीद स्मारिका और जेल में किए गए अन्य कामों के लिए जेल अधीक्षक डॉ. अदिति श्रीवास्तव के प्रयासों की सराहना की। इससे पहले डीजी जेल को पुलिस लाइन में सलामी दी गई।
शचींद्रनाथ बख्शी ने काकोरी कांड में निभाया था मुख्य किरदार
काकोरी रेलवे स्टेशन के पास अंग्रेजी सरकार का क्रांतिकारियों ने खजाना लूट लिया था। इस मामले में शचींद्रनाथ बख्शी को पहले लखनऊ फिर फतेहगढ़ और इसके बाद बिजनौर जेल में रखा गया। 14 दिसंबर 1928 को बख्शी पहली बार बिजनौर जेल आए, यहां 12 दिन रखने के बाद फिर से लखनऊ जेल भेज दिया गया। फिर 31 दिसंबर 1928 को बिजनौर जेल भेजा गया जोकि आठ मई 1929 तक बिजनौर जेल में बंद रहे।
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- अनावरण करने के लिए लखनऊ से बिजनौर पहुंचे डीजी जेल
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। आजादी के 75 साल बाद बिजनौर जेल के इतिहास में एक अध्याय जोड़ा गया है। दरअसल, आजादी की जंग की वजह से जेल में बंद रहे क्रांतिकारियों को इतिहास के पन्नों से बाहर ही नहीं लाया गया बल्कि शिलापट पर उन्हें फिर से पहचान दिलाने का काम हुआ। जी हां, साल 1925 से देश आजाद होने तक जेल में बंद रहे 419 क्रांतिकारियों के बारे में अब लोग जान सकेंगे। इनकी याद में शहीद स्मारिका और शचींद्रनाथ बख्शी की प्रतिमा का अनावरण किया गया।
शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पुलिस महानिदेशक कारागार एसएन साबत रहे। उन्होंने, डीएम उमेश मिश्रा, एसपी नीरज कुमार जादौन, एएसपी सिटी डॉ. प्रवीन रंजन सिंह, जेल अधीक्षक डॉ. अदिति श्रीवास्तव की मौजूदगी में जेल गेट के पास हाल में निर्मित शहीद स्मारिका और क्रांतिकारी शचींद्रनाथ बख्शी की प्रतिमा का अनावरण किया। बता दें कि साल 1925 से साल 1947 तक का रिकाॅर्ड अनुवाद किया गया है। जिसमें सामने आया कि इन 22 सालों में 419 लोग सिर्फ भारत रक्षा कानून के तहत जेल में डाले गए थे।
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साल 1915 में लागू हुए भारत रक्षा कानून के तहत अंग्रेजी सरकार क्रांतिकारियों को जेल भेजने के लिए करती थी। बिजनौर जेल में बंद रहे इन 419 क्रांतिकारियों की याद में एक स्मारिका बनाई गई है। जिसमें लगे शिलापटों पर इन सभी आजादी के दीवानों के नाम लिखे गए हैं।
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डीजी ने जेल का निरीक्षण भी किया
शहीद स्मारिका का अनावरण करने के बाद डीजी जेल एसएन साबत ने जेल के अंदर फल वाटिका का उद्घाटन और पौधरोपण भी किया। साथ ही जेल का निरीक्षण का बंदियों से बात की। उन्होंने शहीद स्मारिका और जेल में किए गए अन्य कामों के लिए जेल अधीक्षक डॉ. अदिति श्रीवास्तव के प्रयासों की सराहना की। इससे पहले डीजी जेल को पुलिस लाइन में सलामी दी गई।
शचींद्रनाथ बख्शी ने काकोरी कांड में निभाया था मुख्य किरदार
काकोरी रेलवे स्टेशन के पास अंग्रेजी सरकार का क्रांतिकारियों ने खजाना लूट लिया था। इस मामले में शचींद्रनाथ बख्शी को पहले लखनऊ फिर फतेहगढ़ और इसके बाद बिजनौर जेल में रखा गया। 14 दिसंबर 1928 को बख्शी पहली बार बिजनौर जेल आए, यहां 12 दिन रखने के बाद फिर से लखनऊ जेल भेज दिया गया। फिर 31 दिसंबर 1928 को बिजनौर जेल भेजा गया जोकि आठ मई 1929 तक बिजनौर जेल में बंद रहे।