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Bijnor News: नींदडू - हरदेई, फूलवती देवी और युद्धिया को जाना पड़ा जेल

Fri, 11 Aug 2023 11:36 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 11 Aug 2023 11:36 PM IST
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Meri Mati, Mera Desh: Hardei, Phoolvati Devi and Yuddhiya had to go to jail, the house was attached
नींदडू के कीर्ति कुमार। (स्वतंत्रता का आंदोलन खबर के साथ)
- जिला मुख्यालय पर विदेशी कपड़ों की होली जलाने का था इन पर आरोप
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- स्वतंत्रता आंदोलन में स्वयं हिस्सा लेने के साथ पुत्रों का भी हौसला बढ़ाया

फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी

नींदडू। देश की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले आंदोलनकारियों में महिलाएं भी पुरुषों से पीछे नहीं थीं। घर की चहारदीवारी और चूल्हा-चौका छोड़कर आंदोलन में कूदने वाली ऐसी ही तीन बहादुर महिलाओं का ताल्लुक अल्हैपुर ब्लॉक के गांव मनकुआं से है। 1933 में पुलिस ने ब्रिटिश शासन का विरोध करने और जिला मुख्यालय पर विदेशी कपड़ों की होली जलाने के आरोप में हरदेई, फूलवती देवी तथा युद्धिया देवी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, चरखा संघ के प्रबंधक डॉ. जसवंत सिंह के आग्रह पर 13 अक्तूबर 1929 को विजयदशमी के दिन रेलगाड़ी से मुरादाबाद से धामपुर पहुंचे थे। करोड़ीमल इंटर काॅलेज के मैदान में आयोजित जनसभा को गांधी जी ने संबोधित किया था। उस समय सभा में लगभग 20 हजार लोग आए थे, जिनमें करीब पांच हजार महिलाएं थीं। मनकुआं से हरदेई अपने पुत्र डॉ. लाखन सिंह, फूलवती देवी अपने पुत्र मनोहर सिंह एवं युद्धिया देवी अपने पुत्र प्रवीण सिंह के साथ गांधी जी के विचार सुनने के लिए नौ किलोमीटर का सफर पैदल तय कर धामपुर पहुंची थीं।
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चूंकि, अंग्रेज सरकार आजादी के लिए संघर्ष करने वाले आंदोलनकारियों के साथ सख्ती से पेश आ रही थी, इसलिए आंदोलनकारी गोरों की प्रताड़ना से बचने और अपनी गतिविधियां जारी रखने के लिए घरों से दूर जंगल में छिपे रहते थे। महिलाएं उनके लिए भोजन पानी की व्यवस्था करने के साथ गांव व क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों से उन्हें अवगत कराया करती थीं। आजादी की लड़ाई के लिए अपने पुत्रों का हौसला बढ़ाने के अलावा अन्य ग्रामीणों को आंदोलन के लिए प्रेरित करने वाली इन महिलाओं ने अंग्रेजी शासन का जमकर विरोध किया।
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1933 में पुलिस ने ब्रिटिश शासन का विरोध करने और जिला मुख्यालय पर विदेशी कपड़ों की होली जलाने के आरोप में हरदेई, फूलवती देवी तथा युद्धिया देवी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। तीनों पर आर्थिक दंड भी लगाया गया था। जुर्माना अदा नहीं करने के कारण महिलाओं के घरों की कुर्की की गई। तीनों महिलाओं के परपौत्र सेवानिवृत अध्यापक कीर्ति कुमार, काॅलेज में लिपिक देवराज सिंह तथा निजी संस्थान चला रहे चेतन कुमार बताते हैं कि जेल में कैद उनकी परदादियों से साफ-सफाई के अलावा निश्चित समय में निर्धारित मात्रा में आटा पीसने और खाना बनाने का कार्य कराया जाता था।
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