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अतिरिक्त क्लास और योग से मिली मानसिक मजबूती
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बिजनौर के प्राथमिक विद्यालय मुजफ्फराबाद में बच्चों को योग सिखाते शिक्षक अमित कुमार।
- फोटो : BIJNOR
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अतिरिक्त क्लास और योग से मिली मानसिक मजबूती
बिजनौर। कोरोनाकाल में स्कूल बंद होने से शिक्षा बेपटरी हो गई थी। ऑनलाइन माध्यम से छात्र-छात्राओं को शिक्षा से जोड़े रखा, लेकिन स्कूलों जैसा वातावरण नहीं मिल पाया है। घरों में रहकर छात्रों ने ऑनलाइन पढ़ाई की, लेकिन उनपर मानसिक व शारीरिक प्रभाव पड़ा है।
ऑनलाइन पढ़ाई में शिक्षकों ने कक्षा वार छात्रों के व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर या ऑनलाइन, जूम आदि तकनीकी माध्यम पढ़ाई कराई। स्कूलों में जैसी पढ़ाई नहीं होने पर छोटे छात्र पढ़ाई में भी पिछड़ गए थे। ऑनलाइन पढ़ाई में छात्रों को परेशानी न हो, इसके लिए विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की टीम बनाकर काउंसलिंग के लिए मोबाइल नंबर भी जारी किए गए थे। इन शिक्षकों ने छात्रों के सवाल सुनकर उन्हें उनका जवाब दिया। उस समय में छात्र विद्यालयों से लंबे समय दूर रहे। उसका प्रभाव छात्रों की मनोदशा पर पड़ा। दो साल तक कक्षाओं से बाहर रहने से वह विद्यालयों के अनुशासन में अपने आप को व्यवस्थित करने में थोड़ा सा समय लिया। स्कूल खुलने पर पढ़ाई में कमजोरी दूर करने के लिए अतिरिक्त कक्षाएं दी और योग तथा खेलकूद की गतिविधियां कराकर उन्हें शिक्षा एवं शारीरिक मजबूती दी गई।
योग से स्वस्थ हो रहे छात्र-छात्राएं
शिक्षक अमित कुमार ने बताया कि वह प्राथमिक विद्यालय मुजफ्फराबाद में तैनात हैं। वह सप्ताह में एक-एक दिन छोड़कर यानी तीन दिन सुबह के समय सभी छात्रों को योगाभ्यास करा रहे हैं। वह नौ बजे से करीब बीस मिनट अनुलोम, विलोग, भ्रामरी, वृक्षासन आदि योग क्रिया करा रहे हैं। इस योग से छात्र मानसिक रूप से मजबूत बन रहे हैं।
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कक्षा में बैठकर आता है अनुशासन
कोरोनाकाल में ऑनलाइन पढ़ाई हुई। मोबाइल लेकर बच्चे समय से बैठ जाते थे। लंबा समय उनका कमरे में ही निकल जाता था। खेल कूद व घूमने की आजादी पर ग्रहण लगा हुआ था। उस दौरान लापरवाही भी बहुत करने लगे थे, लेकिन अब स्कूल जाने से वह सही है - विपिन कुमार, अभिभावक
कोरोनकाल में छात्र पढ़ाई में पिछड़ गए थे। स्कूल खुलने पर धीरे-धीरे पढ़ाई की पटरी पर आ गए। उनकी कमजोरी दूर करने को अतिरिक्त समय देकर पढ़ाया गया। साथ ही सरल भाषा व नवाचार के माध्यम से छात्रों को पढ़ाई में होशियार बनाया गया - अनंशु माहेश्वरी, प्रधानाचार्य
छात्र अब हर स्थिति में मजबूत हैं। कोरोनाकाल में ऑनलाइन पढ़ाई एवं ऑफलाइन पढ़ाई में एक्सपर्ट हो गए हैं। स्कूल खुलने पर छात्रों को स्वयं और अपने आसपास के लोगों को जागरूक रखने के लिए कोरोना प्रोटोकॉल के बारे बताया गया। बिना मास्क के बाहर न जाने, बार-बार हाथ धोने, साफ-सफाई आदि के बारे में बताया गया है - जयकरन यादव, बीएसए
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बिजनौर। कोरोनाकाल में स्कूल बंद होने से शिक्षा बेपटरी हो गई थी। ऑनलाइन माध्यम से छात्र-छात्राओं को शिक्षा से जोड़े रखा, लेकिन स्कूलों जैसा वातावरण नहीं मिल पाया है। घरों में रहकर छात्रों ने ऑनलाइन पढ़ाई की, लेकिन उनपर मानसिक व शारीरिक प्रभाव पड़ा है।
ऑनलाइन पढ़ाई में शिक्षकों ने कक्षा वार छात्रों के व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर या ऑनलाइन, जूम आदि तकनीकी माध्यम पढ़ाई कराई। स्कूलों में जैसी पढ़ाई नहीं होने पर छोटे छात्र पढ़ाई में भी पिछड़ गए थे। ऑनलाइन पढ़ाई में छात्रों को परेशानी न हो, इसके लिए विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की टीम बनाकर काउंसलिंग के लिए मोबाइल नंबर भी जारी किए गए थे। इन शिक्षकों ने छात्रों के सवाल सुनकर उन्हें उनका जवाब दिया। उस समय में छात्र विद्यालयों से लंबे समय दूर रहे। उसका प्रभाव छात्रों की मनोदशा पर पड़ा। दो साल तक कक्षाओं से बाहर रहने से वह विद्यालयों के अनुशासन में अपने आप को व्यवस्थित करने में थोड़ा सा समय लिया। स्कूल खुलने पर पढ़ाई में कमजोरी दूर करने के लिए अतिरिक्त कक्षाएं दी और योग तथा खेलकूद की गतिविधियां कराकर उन्हें शिक्षा एवं शारीरिक मजबूती दी गई।
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योग से स्वस्थ हो रहे छात्र-छात्राएं
शिक्षक अमित कुमार ने बताया कि वह प्राथमिक विद्यालय मुजफ्फराबाद में तैनात हैं। वह सप्ताह में एक-एक दिन छोड़कर यानी तीन दिन सुबह के समय सभी छात्रों को योगाभ्यास करा रहे हैं। वह नौ बजे से करीब बीस मिनट अनुलोम, विलोग, भ्रामरी, वृक्षासन आदि योग क्रिया करा रहे हैं। इस योग से छात्र मानसिक रूप से मजबूत बन रहे हैं।
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कक्षा में बैठकर आता है अनुशासन
कोरोनाकाल में ऑनलाइन पढ़ाई हुई। मोबाइल लेकर बच्चे समय से बैठ जाते थे। लंबा समय उनका कमरे में ही निकल जाता था। खेल कूद व घूमने की आजादी पर ग्रहण लगा हुआ था। उस दौरान लापरवाही भी बहुत करने लगे थे, लेकिन अब स्कूल जाने से वह सही है - विपिन कुमार, अभिभावक
कोरोनकाल में छात्र पढ़ाई में पिछड़ गए थे। स्कूल खुलने पर धीरे-धीरे पढ़ाई की पटरी पर आ गए। उनकी कमजोरी दूर करने को अतिरिक्त समय देकर पढ़ाया गया। साथ ही सरल भाषा व नवाचार के माध्यम से छात्रों को पढ़ाई में होशियार बनाया गया - अनंशु माहेश्वरी, प्रधानाचार्य
छात्र अब हर स्थिति में मजबूत हैं। कोरोनाकाल में ऑनलाइन पढ़ाई एवं ऑफलाइन पढ़ाई में एक्सपर्ट हो गए हैं। स्कूल खुलने पर छात्रों को स्वयं और अपने आसपास के लोगों को जागरूक रखने के लिए कोरोना प्रोटोकॉल के बारे बताया गया। बिना मास्क के बाहर न जाने, बार-बार हाथ धोने, साफ-सफाई आदि के बारे में बताया गया है - जयकरन यादव, बीएसए