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Bijnor News: बातचीत से शुरू होकर खेल पर खत्म होगी गणित की कक्षा
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विनीत कुमार
बरूकी। आमतौर पर कठिन और बोरिंग माने जाने वाले गणित विषय को पढ़ाने के लिए परिषदीय स्कूलों में नई तकनीक लागू की जा रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत बुनियादी (बाल वाटिका से कक्षा 2 तक) और प्रारंभिक (कक्षा 3 से 5 तक) कक्षाओं में खेल-खेल में गणित सिखाया जाएगा। गणित कक्षा की शुरुआत मौखिक गणितीय बातचीत से होगी और समापन गणितीय खेलों से होगा। इस बीच बच्चों को वास्तविक वस्तुओं का उपयोग कर जोड़, घटाव, गुणा और भाग सिखाने के बाद इसका अभ्यास कराया जाएगा।
नई शिक्षा नीति में तीन से आठ साल के बच्चों को प्रतिदिन एक विषय पढ़ाने के लिए 60 से 90 मिनट का समय निर्धारित किया गया है। इस अवधि को कालांशों में बांटा गया है। कक्षा की शुरुआत में बच्चों में कविता, कहानी और पहेलियों के माध्यम से गणित के प्रति जिज्ञासा जगाई जाएगी और उसके बाद उन्हें प्रत्यक्ष सामग्री देकर गणितीय कौशल (जोड़, घटाव, गुणा, भाग) सिखाया जाएगा। फिर बच्चों को इसका अभ्यास कराया जाएगा। गणित की समझ बढ़ाने के लिए बार-बार अभ्यास पर विशेष जोर दिया गया है। कक्षा के अंत में बोर्ड, सांप-सीढ़ी, कार्ड, ताश समेत अन्य शारीरिक खेल खिलाए जाएंगे जिनमें संख्याओं और गणितीय गणनाएं शामिल हों।
अनुभव, भाषा और चित्र से होते हुए पहुंचेंगे चिह्नों तक
प्राथमिक कक्षाओं में बच्चों को सीधे गणित के सवाल नहीं कराए जाएंगे। इसके लिए चार चरण अनुभव, भाषा, चित्र और चिह्न निर्धारित किए गए हैं जिन्हें ईएलपीएस (एक्सपीरियंस, लैंग्वेज, पिक्चर और सिंबल) कहा जाता है। बच्चे पहले वस्तुओं को छूकर उनका अनुभव महसूस करेंगे। मसलन यदि जोड़ सिखानी है तो पहले बच्चों को कक्षा में कुछ कंचे, ब्लॉक्स, तीलियां, पत्तियां आदि चीजें दी जाएंगी फिर उनके माध्यम से जोड़ना सिखाया जाएगा। इसके बाद जोड़ के संबंध में बातचीत की जाएगी और फिर बोर्ड पर वस्तुओं के चित्र बनाकर उन्हें जोड़ सिखाया जाएगा। आखिर में चिह्नों का प्रयोग किया जाएगा। इससे बच्चे मूर्त (वास्तविकता) से अमूर्त (चिह्नों) की तरफ जाएंगे।
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परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को बुनियादी भाषा एवं गणित का प्रशिक्षण दिया गया है। इसमें शिक्षण की नई तकनीकों को साझा किया गया है। नई शिक्षा नीति की शिक्षण पद्धतियों को विद्यालयों में लागू किया गया है। - सचिन कसाना, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।
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बरूकी। आमतौर पर कठिन और बोरिंग माने जाने वाले गणित विषय को पढ़ाने के लिए परिषदीय स्कूलों में नई तकनीक लागू की जा रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत बुनियादी (बाल वाटिका से कक्षा 2 तक) और प्रारंभिक (कक्षा 3 से 5 तक) कक्षाओं में खेल-खेल में गणित सिखाया जाएगा। गणित कक्षा की शुरुआत मौखिक गणितीय बातचीत से होगी और समापन गणितीय खेलों से होगा। इस बीच बच्चों को वास्तविक वस्तुओं का उपयोग कर जोड़, घटाव, गुणा और भाग सिखाने के बाद इसका अभ्यास कराया जाएगा।
नई शिक्षा नीति में तीन से आठ साल के बच्चों को प्रतिदिन एक विषय पढ़ाने के लिए 60 से 90 मिनट का समय निर्धारित किया गया है। इस अवधि को कालांशों में बांटा गया है। कक्षा की शुरुआत में बच्चों में कविता, कहानी और पहेलियों के माध्यम से गणित के प्रति जिज्ञासा जगाई जाएगी और उसके बाद उन्हें प्रत्यक्ष सामग्री देकर गणितीय कौशल (जोड़, घटाव, गुणा, भाग) सिखाया जाएगा। फिर बच्चों को इसका अभ्यास कराया जाएगा। गणित की समझ बढ़ाने के लिए बार-बार अभ्यास पर विशेष जोर दिया गया है। कक्षा के अंत में बोर्ड, सांप-सीढ़ी, कार्ड, ताश समेत अन्य शारीरिक खेल खिलाए जाएंगे जिनमें संख्याओं और गणितीय गणनाएं शामिल हों।
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अनुभव, भाषा और चित्र से होते हुए पहुंचेंगे चिह्नों तक
प्राथमिक कक्षाओं में बच्चों को सीधे गणित के सवाल नहीं कराए जाएंगे। इसके लिए चार चरण अनुभव, भाषा, चित्र और चिह्न निर्धारित किए गए हैं जिन्हें ईएलपीएस (एक्सपीरियंस, लैंग्वेज, पिक्चर और सिंबल) कहा जाता है। बच्चे पहले वस्तुओं को छूकर उनका अनुभव महसूस करेंगे। मसलन यदि जोड़ सिखानी है तो पहले बच्चों को कक्षा में कुछ कंचे, ब्लॉक्स, तीलियां, पत्तियां आदि चीजें दी जाएंगी फिर उनके माध्यम से जोड़ना सिखाया जाएगा। इसके बाद जोड़ के संबंध में बातचीत की जाएगी और फिर बोर्ड पर वस्तुओं के चित्र बनाकर उन्हें जोड़ सिखाया जाएगा। आखिर में चिह्नों का प्रयोग किया जाएगा। इससे बच्चे मूर्त (वास्तविकता) से अमूर्त (चिह्नों) की तरफ जाएंगे।
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परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को बुनियादी भाषा एवं गणित का प्रशिक्षण दिया गया है। इसमें शिक्षण की नई तकनीकों को साझा किया गया है। नई शिक्षा नीति की शिक्षण पद्धतियों को विद्यालयों में लागू किया गया है। - सचिन कसाना, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।