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निजी और प्ले स्कूल में भी खोजे जाएंगे कुपोषित बच्चे
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निजी और प्ले स्कूल में भी खोजे जाएंगे कुपोषित बच्चे
बिजनौर। जिले में पहली बार निजी और प्ले स्कूल में भी अभियान चलाकर कुपोषित बच्चे ढूंढे जाएंगे। अभियान में कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले बच्चों को चिह्नित किया जाएगा। इनके अभिभावकों को बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए जागरूक किया जाएगा। कई विभागों की अभियान में भागीदारी रहेगी।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर हर माह वजन दिवस अभियान चलाया जाता है। अभियान में बच्चों के वजन के आधार पर कुपोषित बच्चों को चिह्नित किया जाता है। कुपोषित बच्चों को चिह्नित करने के बाद उन्हें सरकार की ओर से अलग से खाद्यान्न मिलता है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले छह साल तक के बच्चों को तो चिह्नित कर लिया जाता है, लेकिन निजी व प्ले स्कूल में जाने वाले बच्चे इस अभियान में शामिल नहीं हो पाते हैं। इनके अभिभावकों को कुपोषण के बारे में ज्यादा पता भी नहीं होता है। निजी स्कूल में जाने वाले या घर पर रहने वाले बच्चे भी कुपोषण का शिकार मिल सकते हैं। कुपोषण का शिकार बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम होती है और ये किसी भी रोग की चपेट में आसानी से आ सकते हैं। निजी स्कूलों में जाने वाले अतिकुपोषित बच्चों को अब अभियान चलाकर चिह्नित किया जाएगा। जिला कार्यक्रम अधिकारी नागेंद्र मिश्र के अनुसार जनवरी में स्वस्थ बालक बालिका अभियान शुरू किया जाएगा। बच्चों में कुपोषण का पता करने के लिए अभिभावकों को भी जागरूक किया जाएगा।
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बिजनौर। जिले में पहली बार निजी और प्ले स्कूल में भी अभियान चलाकर कुपोषित बच्चे ढूंढे जाएंगे। अभियान में कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले बच्चों को चिह्नित किया जाएगा। इनके अभिभावकों को बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए जागरूक किया जाएगा। कई विभागों की अभियान में भागीदारी रहेगी।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर हर माह वजन दिवस अभियान चलाया जाता है। अभियान में बच्चों के वजन के आधार पर कुपोषित बच्चों को चिह्नित किया जाता है। कुपोषित बच्चों को चिह्नित करने के बाद उन्हें सरकार की ओर से अलग से खाद्यान्न मिलता है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले छह साल तक के बच्चों को तो चिह्नित कर लिया जाता है, लेकिन निजी व प्ले स्कूल में जाने वाले बच्चे इस अभियान में शामिल नहीं हो पाते हैं। इनके अभिभावकों को कुपोषण के बारे में ज्यादा पता भी नहीं होता है। निजी स्कूल में जाने वाले या घर पर रहने वाले बच्चे भी कुपोषण का शिकार मिल सकते हैं। कुपोषण का शिकार बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम होती है और ये किसी भी रोग की चपेट में आसानी से आ सकते हैं। निजी स्कूलों में जाने वाले अतिकुपोषित बच्चों को अब अभियान चलाकर चिह्नित किया जाएगा। जिला कार्यक्रम अधिकारी नागेंद्र मिश्र के अनुसार जनवरी में स्वस्थ बालक बालिका अभियान शुरू किया जाएगा। बच्चों में कुपोषण का पता करने के लिए अभिभावकों को भी जागरूक किया जाएगा।
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