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चंद्रग्रहण : नौ घंटे बाद खुले मंदिरों के कपाट
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बिजनौर में चंद्र ग्रहण के दौरान बंद बाला जी मंदिर के कपाट।
- फोटो : BIJNOR
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चंद्रग्रहण : नौ घंटे बाद खुले मंदिरों के कपाट
बिजनौर। जिले में चंद्रग्रहण की वजह से नौ घंटे मंदिरों के कपाट बंद रहे। मंगलवार को साल का आखिरी चंद्रग्रहण पड़ा। सुबह 9:20 मिनट पर मंदिरों के कपाट बंद हुए, जो शाम को 6:20 मिनट के बाद खुले। इसके अलावा लोगों ने खाद्य पदार्थों में भी तुलसी के पत्ते डाले।
चंद्रग्रहण से नौ घंटे पहले सूतक काल शुरू हो गया था। सूतक काल में कोई धार्मिक कार्य नहीं होता है। सूतक काल में धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-पाठ पर रोक लग गई। चंद्रग्रहण दोपहर 2:39 मिनट से शुरू होकर 6:19 मिनट तक हुआ। बिजनौर में चंद्रग्रहण शाम 5:20 मिनट पर दिखाई दिया। चंद्रग्रहण समाप्त होने के बाद ही मंदिरों के कपाट खोले गए। कपाट खोलने के बाद मंदिर की साफ-सफाई की गई। चंद्रग्रहण के समय गर्भवती महिलाएं घरों में रहीं। गर्भवती महिलाओं का चंद्रग्रहण में निकलना शुभ नहीं माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार चंद्रग्रहण में राहु, केतु की छाया बच्चे पर पड़ती है, जिससे बच्चे असक्षम पैदा होते हैं। ग्रहण के समय लोगों ने घरों में मौन अवस्था में मंत्रों का उच्चारण किया।
वहीं ग्रहण के समय वातावरण में हानिकारक किरणों का रिसाव होता है। जिस वजह से खाना भी अशुद्ध हो जाता है। शुद्धि के लिए लोगों ने खाद्य पदार्थों में तुलसी के पत्ते डाले। चंद्रग्रहण समाप्त होने के बाद बाजार में रौनक दिखाई दी।
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बिजनौर। जिले में चंद्रग्रहण की वजह से नौ घंटे मंदिरों के कपाट बंद रहे। मंगलवार को साल का आखिरी चंद्रग्रहण पड़ा। सुबह 9:20 मिनट पर मंदिरों के कपाट बंद हुए, जो शाम को 6:20 मिनट के बाद खुले। इसके अलावा लोगों ने खाद्य पदार्थों में भी तुलसी के पत्ते डाले।
चंद्रग्रहण से नौ घंटे पहले सूतक काल शुरू हो गया था। सूतक काल में कोई धार्मिक कार्य नहीं होता है। सूतक काल में धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-पाठ पर रोक लग गई। चंद्रग्रहण दोपहर 2:39 मिनट से शुरू होकर 6:19 मिनट तक हुआ। बिजनौर में चंद्रग्रहण शाम 5:20 मिनट पर दिखाई दिया। चंद्रग्रहण समाप्त होने के बाद ही मंदिरों के कपाट खोले गए। कपाट खोलने के बाद मंदिर की साफ-सफाई की गई। चंद्रग्रहण के समय गर्भवती महिलाएं घरों में रहीं। गर्भवती महिलाओं का चंद्रग्रहण में निकलना शुभ नहीं माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार चंद्रग्रहण में राहु, केतु की छाया बच्चे पर पड़ती है, जिससे बच्चे असक्षम पैदा होते हैं। ग्रहण के समय लोगों ने घरों में मौन अवस्था में मंत्रों का उच्चारण किया।
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वहीं ग्रहण के समय वातावरण में हानिकारक किरणों का रिसाव होता है। जिस वजह से खाना भी अशुद्ध हो जाता है। शुद्धि के लिए लोगों ने खाद्य पदार्थों में तुलसी के पत्ते डाले। चंद्रग्रहण समाप्त होने के बाद बाजार में रौनक दिखाई दी।

नगीना में चंद्र ग्रहण के दौरान बंद मंदिर मुक्तेश्वर नाथ के कपाट।- फोटो : BIJNOR
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