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कटान रोकने के लिए बंदा बनाने में जुटी टीम
अमर उजाला बिजनौर
Updated Mon, 08 Aug 2016 12:23 AM IST
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नजीबाबाद की सुकरो नदी पर बंदा बनाने में जुटी जेसीबी मशीन।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर के नजीबाबाद/बड़िया में सुकरो नदी पर बने रेल पुल को बचाने की रेलवे की कवायद जारी है। रेलवे निर्माण इकाई पुल के निकट कटान क्षेत्र में बंदा बनाने का अभियान चला रही है।
नजीबाबाद-कोटद्वार ब्रांच लाइन पर 23 जुलाई को सुकरो नदी के बहाव से रेल पुल का एक पिलर गिर गया था। मसूरी एक्सप्रेस के कोटद्वार जाने वाले कोच गिरने से बाल-बाल बचे थे। रेलवे ने ध्वस्त पिलर को नए सिरे से बनाने का अभियान छेड़ा हुआ है। रेल पुल क्षेत्र में सुकरो नदी का पानी सूखने के बाद रेलवे निर्माण इकाई ध्वस्त पिलर के मलबे को हटाने तथा आसपास से रेत-बजरी और पत्थर जेसीबी से खींचकर पुल के निकट कटान क्षेत्र में बंदा बना रही है।
बंदा बनाने के लिए हालांकि बाहर से भी पत्थर मंगाए गए हैं, लेकिन रेल पुल के दोनों ओर रेत-बजरी और पत्थर जेसीबी से खींचकर बंदे में प्रयोग किए जा रहे हैं। फिलहाल रेलवे का लक्ष्य ध्वस्त पिलर का सुकरो नदी में पानी आने से पूर्व जल्द से जल्द पुन: निर्माण कराना है। निर्माण कार्य की धीमी गति कार्य में बाधक बन सकती है।
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नजीबाबाद-कोटद्वार ब्रांच लाइन पर 23 जुलाई को सुकरो नदी के बहाव से रेल पुल का एक पिलर गिर गया था। मसूरी एक्सप्रेस के कोटद्वार जाने वाले कोच गिरने से बाल-बाल बचे थे। रेलवे ने ध्वस्त पिलर को नए सिरे से बनाने का अभियान छेड़ा हुआ है। रेल पुल क्षेत्र में सुकरो नदी का पानी सूखने के बाद रेलवे निर्माण इकाई ध्वस्त पिलर के मलबे को हटाने तथा आसपास से रेत-बजरी और पत्थर जेसीबी से खींचकर पुल के निकट कटान क्षेत्र में बंदा बना रही है।
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बंदा बनाने के लिए हालांकि बाहर से भी पत्थर मंगाए गए हैं, लेकिन रेल पुल के दोनों ओर रेत-बजरी और पत्थर जेसीबी से खींचकर बंदे में प्रयोग किए जा रहे हैं। फिलहाल रेलवे का लक्ष्य ध्वस्त पिलर का सुकरो नदी में पानी आने से पूर्व जल्द से जल्द पुन: निर्माण कराना है। निर्माण कार्य की धीमी गति कार्य में बाधक बन सकती है।
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