फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bijnor News ›   Jaitra's Shree Gandhi Ashram Central Warehouse

बदहाल हुआ जैतरा का श्री गांधी आश्रम केंद्रीय वस्त्रागार

Thu, 30 Sep 2021 11:48 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 30 Sep 2021 11:48 PM IST
विज्ञापन
Jaitra's Shree Gandhi Ashram Central Warehouse
धामपुर का क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम वस्त्रागार। - फोटो : DHAMPUR
बदहाल हुआ जैतरा का श्री गांधी आश्रम केंद्रीय वस्त्रागार
विज्ञापन

धामपुर। दो अक्तूबर महात्मा गांधी जयंती है। पूरा देश समर्पित भाव से राष्ट्रपिता की जयंती को मनाएगा। गांधी जी ने विदेशी कपडे़ के स्थान पर स्वदेशी खादी का प्रयोग करने पर जोर दिया था, लेकिन आज वही खादी उपेक्षा का शिकार हो रही है। जैतरा में करीब 50 साल पहले स्थापित क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम केंद्रीय वस्त्रागार और संस्थान में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी बदहाली के दौर से गुजर रहे है। वस्त्रगार का उत्पादन और आमदनी दोनों के धड़ाम होने से इन्हें पिछले कई माह से वेतन भी नहीं मिला है।
कर्मचारियों का कहना है कि सरकार की ओर से वस्त्रागार की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। पांच साल पहले वस्त्रागार में तैयार होने वाले माल की देश के अधिकांश राज्यों में आपूर्ति की जाती थी। लेकिन वर्तमान में अब न तो माल का उत्पादन हो रहा है और जो उत्पादन हो भी जाता है तो उसकी बिक्री न होने से आय खत्म होती जा रही है। श्री गांधी आश्रम के प्रबंधक तेजबहादुर सिंह और प्रोडक्शन व्यवस्थापक मोहनलाल मिश्र का कहना है कि सरकार की ओर से खादी के वस्त्रों पर पहले 15 प्रतिशत वेट और फिर बाद में अलग-अलग उत्पादन पर पांच से लेकर 18 प्रतिशत जीएसटी लगा देने से यह उद्योग बर्बादी के कगार पर पहुंच गया है। (संवाद)
विज्ञापन

बगैर वेतन के काम करने को मजबूर
कभी इस संस्थान में सैकड़ों कर्मचारी काम करते थे। क्षेत्र के बड़ी संख्या में बुनकर संस्थान से जुड़े थे। लेकिन अब सब कुछ धड़ाम हो गया है। वर्तमान में संस्थान में केवल 25 कर्मचारी ही कार्यरत हैं। खादी आयोग की ओर से कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति होने के बाद कोई नई भर्ती नहीं हुई। मुन्ना सिंह, गोविंद सिंह, विजयनाथ शुक्ल, धर्मदेव चौहान का कहना है कि अप्रैल माह के बाद उन्हें अभी तक वेतन नहीं मिला है। ऐसे में बगैर पगार के ही काम करने को मजबूर होना पड़ रहा है। वेतन भी इतना कम है कि किसी को बताने में भी शर्म आती है। सेवानिवृत्ति होने के बाद पेंशन का कोई प्रावधान नहीं है। फंड के रूप में जो धन एकत्र होता है, उसे भी संस्थान की ओर से समय से नहीं दिया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

अब तो 50 लाख साल का भी टर्न ओवर नहीं
पांच साल पहले की यहां पर साल में करीब तीन करोड़ का टर्न ओवर होता था। जो अब घटकर 50 लाख से भी कम रह गया है। सरकार की ओर से जो अनुदान मिलता है, वह भी ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। पहले वस्त्रागार माल से भरा रहता था। लेकिन अब खाली है। न तो माल आ रहा है और न ही बाहर जा रहा है। उत्पादन और बिक्री के धड़ाम होने से संस्थान और संस्थान में काम करने वालों का जीना मुश्किल हो गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed