खुफिया एजेंसियां अलर्ट : आतंकियों की पनाहगाह रहा है यूपी का यह जिला, कश्मीर में काम करने वालों पर आज भी रहती है शक की नजर
12 सितंबर 2014 को बिजनौर के मोहल्ला भाटान के एक मकान में बम बनाते समय विस्फोट होने पर पूरे जिले में सनसनी फैल गई थी। इस मकान में सिमी से जुड़े आतंकी किराये के मकान में रह रहे थे।
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उत्तर प्रदेश का बिजनौर जिला आतंकियों की पनाहगाह बना रहा है। साल 2014 में बिजनौर में छिपे आतंकियों का पता चलने पर पुलिस से लेकर खुफिया एजेंसियों तक के होश उड़ गए थे। जिले के कुछ लोग कश्मीर में काम करते थे, कुछ वर्तमान में भी करते हैं लेकिन आज भी कश्मीर में काम करने वालों को शक की नजर से देखा जाता है।
आतंकी गतिविधियों में इन लोगों के नाम आए हैं। अब पड़ोसी जनपद शामली से आतंकी कनेक्शन के बाद बिजनौर में भी खुफिया विभाग फिर से सक्रिय हो गया है।
12 सितंबर 2014 को बिजनौर के मोहल्ला भाटान के एक मकान में बम बनाते समय विस्फोट होने पर पूरे जिले में सनसनी फैल गई थी। इस मकान में सिमी से जुड़े आतंकी किराये के मकान में रह रहे थे। इस मकान के अलावा भाटान के रईस के मकान में भी इनके साथी किराये के मकान पर रहते थे। विस्फोट होने के बाद दोनों मकान से आतंकी भाग निकले।
ये आतंकी मध्य प्रदेश की खंडवा जेल से भागे थे। सिमी से जुड़े आतंकियों में अमजद, असलम, एजाजुद्दीन, महबूब, जाकिर हुसैन, सालिक समेत छह आतंकी जिले में रह रहे थे। तीन अप्रैल 2015 को तेलंगाना पुलिस के साथ मुठभेड़ में एजाजुद्दीन व असलम मारा गया।
17 फरवरी 2017 को सालिक, अमजद और जाकिर हुसैन को उड़ीसा में दबोच लिया गया था। उन्हें वहां भोपाल की सेंट्रल जेल भेजा गया। चारों आतंकी जेल से भाग निकले थे। बाद में उन्हें मुठभेड़ में मार गिराया।
इन आतंकियों की मदद करने में बिजनौर के रहने वाले रईस अहमद, हुस्ना समेत पांच मददगारों को भी एटीएस ने जांच के दौरान दबोचा था। ये सभी मददगार लखनऊ की जेल में बंद हैं।