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गोशालाओं में दूर किया जाएगा निराश्रित गायों का बांझपन
Wed, 29 May 2019 11:54 PM IST
Deepak Sharma
अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
Published by: Deepak Sharma
Updated Wed, 29 May 2019 11:54 PM IST
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कान्हा पशु आश्रय स्थल में मौजूद गाय।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में जिले की गोशालाओं में रखे गए गोवंश से अब बांझपन को खत्म किया जाएगा। इसके लिए शासन ने सभी जिलों से प्रस्ताव मांगा है। बिजनौर में बनी गोशालाओं में भी इसकी जांच होगी। गायों के स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग होगी। गोशाला में पैदा होने वाली बछिया को किसानों को पालने के लिए दिया जाएगा। इसके लिए प्रयास शुरू किए जाएंगे।
सड़कों पर निराश्रित घूमने वाले पशुओं को अब कान्हा पशु आश्रय स्थल में रखा जा रहा है। गांवों में गोवंश को ग्राम पंचायत और शहरों में नगर पालिका, नगर पंचायतों की टीम पकड़कर गोशाला में रख रही है। जिले में भी अब तक 637 गोवंश पकड़कर इन गोशालों में रखे गए हैं। शहरों में घूमने वाले निराश्रित गोवंश खुराक पूरी करने के लिए कूड़े के ढेर से ही मिलने वाले खाद्य पदार्थों से अपना पेट भरते हैं। इससे इनका पेट पूरा तो भर नहीं पाता, ये बांझपन जैसी अनेक बीमारियों से भी पीड़ित हो जाते हैं। पोषक तत्वों की पूर्ति न होने पर भी गाय बांझपन का शिकार हो जाती हैं। गोशाला में लाई गई निराश्रित गायों में बांझपन की समस्या देखने को मिल रही है।
शासन से सभी जिलों में इन गायों से बांझपन की समस्या को दूर करने के लिए इनका उपचार करने के निर्देश दिए गए हैं। पशुपालन विभाग अपने पास उपलब्ध संसाधनों से गायों का उपचार करेगा। अगर दवाई आदि कम हैं तो इसके लिए शासन को लिखा जाएगा। शासन द्वारा विभाग को दवाई उपलब्ध कराई जाएगी। निजी गोशालाओं में यह अभियान चलाया जाएगा।
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बछड़े के पेट से निकली 30 किलो पॉलिथीन
कुछ दिनों पहले एक गोशाला में बछड़े की मौत हो गई थी। चिकित्सकों ने उसका पोस्टमार्टम किया तो बछड़े के शरीर से करीब 30 किलोग्राम पॉलिथीन व अन्य कूड़ा निकला था।
किसानों को गोद दी जाएंगी गाय
कान्हा पशु आश्रय स्थल पर आने वाले पशु को किसान गोद ले सकते हैं। शासन की मंशा है कि गायों से बांझपन दूर होगा तो किसान दुग्ध उत्पादन के लिए उन्हें ले जा सकते हैं। इससे गोशाला पर पशुओं का बोझ कम होगा। गोशाला पर सबसे अधिक विदेशी नस्ल के बछड़ों को रखा गया है। इन बछड़ों को किसान अधिक संख्या में छोड़ रहे हैं।
गायों की कराई जा रही है जांच : सीवीओ
मुख्य पशुधन चिकित्साधिकारी डॉ. भूपेंद्र सिंह के मुताबिक कान्हा पशु आश्रय स्थल में बांझ गायों की जांच की जा रही है। इनका इलाज कर बांझपन से छुटकारा दिलाया जाएगा। उपचार के लिए गायों को चिह्नित किया जा रहा है।
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सड़कों पर निराश्रित घूमने वाले पशुओं को अब कान्हा पशु आश्रय स्थल में रखा जा रहा है। गांवों में गोवंश को ग्राम पंचायत और शहरों में नगर पालिका, नगर पंचायतों की टीम पकड़कर गोशाला में रख रही है। जिले में भी अब तक 637 गोवंश पकड़कर इन गोशालों में रखे गए हैं। शहरों में घूमने वाले निराश्रित गोवंश खुराक पूरी करने के लिए कूड़े के ढेर से ही मिलने वाले खाद्य पदार्थों से अपना पेट भरते हैं। इससे इनका पेट पूरा तो भर नहीं पाता, ये बांझपन जैसी अनेक बीमारियों से भी पीड़ित हो जाते हैं। पोषक तत्वों की पूर्ति न होने पर भी गाय बांझपन का शिकार हो जाती हैं। गोशाला में लाई गई निराश्रित गायों में बांझपन की समस्या देखने को मिल रही है।
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शासन से सभी जिलों में इन गायों से बांझपन की समस्या को दूर करने के लिए इनका उपचार करने के निर्देश दिए गए हैं। पशुपालन विभाग अपने पास उपलब्ध संसाधनों से गायों का उपचार करेगा। अगर दवाई आदि कम हैं तो इसके लिए शासन को लिखा जाएगा। शासन द्वारा विभाग को दवाई उपलब्ध कराई जाएगी। निजी गोशालाओं में यह अभियान चलाया जाएगा।
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बछड़े के पेट से निकली 30 किलो पॉलिथीन
कुछ दिनों पहले एक गोशाला में बछड़े की मौत हो गई थी। चिकित्सकों ने उसका पोस्टमार्टम किया तो बछड़े के शरीर से करीब 30 किलोग्राम पॉलिथीन व अन्य कूड़ा निकला था।
किसानों को गोद दी जाएंगी गाय
कान्हा पशु आश्रय स्थल पर आने वाले पशु को किसान गोद ले सकते हैं। शासन की मंशा है कि गायों से बांझपन दूर होगा तो किसान दुग्ध उत्पादन के लिए उन्हें ले जा सकते हैं। इससे गोशाला पर पशुओं का बोझ कम होगा। गोशाला पर सबसे अधिक विदेशी नस्ल के बछड़ों को रखा गया है। इन बछड़ों को किसान अधिक संख्या में छोड़ रहे हैं।
गायों की कराई जा रही है जांच : सीवीओ
मुख्य पशुधन चिकित्साधिकारी डॉ. भूपेंद्र सिंह के मुताबिक कान्हा पशु आश्रय स्थल में बांझ गायों की जांच की जा रही है। इनका इलाज कर बांझपन से छुटकारा दिलाया जाएगा। उपचार के लिए गायों को चिह्नित किया जा रहा है।