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बिजनौर में खजाना: जिन चांदी के सिक्कों से तौली गईं थीं इंदिरा गांधी, पिछले 50 सालों से रखें हैं अलमारी में

Thu, 09 Feb 2023 12:09 AM IST
मेरठ ब्यूरो रजनीश त्यागी, संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
रजनीश त्यागी, संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Thu, 09 Feb 2023 12:09 AM IST
सार

बिजनौर में खजाना : जिन चांदी के सिक्कों से पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी तौली गईं थीं, वे आज भी अलमारी में रखे हैं। पिछले 50 सालों से वे अलमारी में ही रखे हैं।

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Indira Gandhi's 73 kg silver is kept in the Bijnor treasury
बिजनौर कलक्ट्रेट में वरिष्ठ कोषाधिकारी कार्यालय। - फोटो : BIJNOR

विस्तार

बिजनौर कोषागार आज भी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की अमानत को संभाले हुए हैं। अमानत भी छोटी-मोटी नहीं है, बल्कि 73 किलो चांदी है। वर्ष 1972 में बिजनौर जिले के दौरे पर आईं पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को बिजनौर की जनता ने चांदी से तौला था, जो करीब 64 किलो थी। इसके अलावा भी लोगों ने चांदी उपहार स्वरूप दी, जो बढ़कर 73 किलो हो गई। पिछले 50 सालों से यह अमानत बिजनौर के कोषागार में रखी है। इसे आरबीआई ने निजी संपत्ति बताते हुए लेने से इनकार कर दिया था, वहीं कोषागार अधिकारी इंदिरा गांधी के परिवार के सदस्यों को ही यह देने की बात कह रहे हैं।

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कालागढ़ डैम के शुरू होने से करीब दो साल पहले वर्ष 1972 में बिजनौर से भेजे गए न्योते पर पूर्व प्रधानमंत्री कालागढ़ आई थीं। यहां पर बिजनौर की जनता और कालागढ़ बांध पर काम करने वाले हजारों कर्मचारियों ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को चांदी से तौला था। करीब 64 किलो चांदी दी गई, इसके बाद भी लोग नहीं रुके और यह चांदी करीब 73 किलो तक पहुंच गई। इस चांदी को इंदिरा गांधी अपने साथ नहीं ले गईं। इसे उस समय तैनात रहे डीएम ने बिजनौर कोषागार में रखवा दिया।
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इसके बाद सालों तक यह चांदी यहीं पर रखी रहीं। कोषागार अधिकारियों के मुताबिक आरबीआई को यह चांदी देने के लिए पत्र भेजा गया, लेकिन वहां से यह कहते हुए इनकार कर दिया गया कि यह निजी संपत्ति है। इसके बाद कोषागार से इसे डिस्पोज के लिए शासन से मार्ग दर्शन मांगा गया, लेकिन वहां से भी इसे लेकर कोई निर्णय नहीं लिया जा सका। अब हालात यह है कि इस चांदी को रखने के लिए हर साल इसका रिन्यूवल किया जाता है, कोई भी निजी संपत्ति एक साल से ज्यादा कोषागार में नहीं रखी जा सकती।
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उस समय 400 रुपये किलो, आज 60 हजार के पार
जिस समय पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरागांधी को बिजनौरवासियों ने चांदी दी थी, उस समय उसका मूल्य करीब 400 रुपये किलो था, आज इस चांदी की कीमत 60 हजार रुपये प्रति किलो से ज्यादा है। कुल चांदी की कीमत आज के समय में 43 लाख रुपये से ज्यादा है। जो चांदी कोषागार में हैं, वह सिक्कों और छड़ के रूप में हैं। इसे डबल लॉक में सुरक्षित रखा गया है।

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निजी संपत्ति है, क्लेम करेंगे तो दी जाएगी : सूरज कुमार
वरिष्ठ कोषाधिकारी सूरज कुमार ने बताया कि कोषागार के डबल लॉक में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरागांधी की 73 किलोग्राम चांदी रखी है। यह उन्हें बिजनौर वासियों ने उपहार स्वरूप दी थी। आरबीआई ने भी इस चांदी को व्यक्तिगत संपत्ति बताकर लेने से इनकार कर दिया गया था। शासन से मार्गदर्शन मांगा गया है कि इस चांदी का क्या किया जाए। आज तक किसी ने इसे लेने के लिए क्लेम भी नहीं किया है। पूर्व प्रधानमंत्री के परिवार के सदस्य यदि क्लेम करते हैं तो इसे नियमानुसार प्रक्रिया कराई जाएगी।

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