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एंटीबायोटिक्स का प्रयोग बढ़ा रहा वायरल के मरीज
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एंटीबायोटिक का ज्यादा प्रयोग बढ़ा रहा वायरल के मरीज
बिजनौर। एंटीबायोटिक्स के अत्यधिक प्रयोग से सामान्य बुखार वायरल में परिवर्तित हो रहा है। इसमें चिकित्सकों की लापरवाही भी है, जिससे सामान्य बुखार के मरीजों में तेजी से वायरल वायरस पनप रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे चिकित्सकों पर नकेल कसने की तैयारी कर ली है, जो देहात से शहर तक बड़ी संख्या में लोगों को सामान्य बुखार होने पर एंटीबायोटिक देकर वायरल को बढ़ावा दे रहे हैं।
बीते करीब दो माह से जिले में बुखार का प्रकोप जारी है। दो दर्जन से अधिक लोगों की जान चली गई है। आए दिन हो रही मौतों ने स्वास्थ्य अफसरों की नींद उड़ा रखी है। अधिकारी इसे लेकर परेशान दिख रहे हैं कि आखिर यह कौन सा बुखार है, जो लोगों की जिंदगी लील रहा है। स्वास्थ्य विभाग मौतों का कारण पता करने में जुटा है। अफसरों का कहना है कि अधिकांश जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि गांव देहात ही नहीं शहरों तक के चिकित्सक भी सामान्य बुखार होने पर मरीज को पैरासिटामोल के साथ भरपूर मात्रा में एंटीबायोटिक दवा भी देते हैं। जबकि ऐसा करना रोगी के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
जिला अस्पताल के जनरल फिजिशियन डाक्टर राधेश्याम वर्मा का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को सामान्य बुखार होने पर केवल पैरासिटामोल टेबलेट या सिरप से ही कंट्रोल किया जा सकता है। इसके साथ में एंटीबायोटिक लगाने से मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है और रोगी के शरीर में मौजूद प्लैटलेट्स तेजी से कम होने लगती है।
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पंडित चंद्रकांत आत्रेय हॉस्पिटल के छाती रोग एवं क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डाक्टर अवधेश वशिष्ठ ने बताया कि बुखार में केवल पैरासिटामोल ही देनी चाहिए। इसके साथ लिक्विड डाइट से ही बुखार पर काबू पाया जा सकता है। पैरासिटामोल के साथ एंटीबायोटिक तभी लगानी चाहिए, जब शरीर पर चकते आदि हो गए हों।
नगर के वरिष्ठ फिजिशियन डाक्टर पंकज त्यागी का कहना है कि बुखार में एंटीबायोटिक से बचना चाहिए। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है और बीमारी वायरल का रूप लेकर प्लैट्लेटस को गिराती है। संक्रामक रोग के नोडल अफसर / जिला मलेरिया अधिकारी बृजभूषण ने बताया कि अधिकांश मरीजों के पर्चों में जांच करने पर इस बात का खुलासा हुआ है। उन्होंने बताया कि यदि भविष्य में किसी क्वेक्स का इस तरह का पर्चा पकड़ा जाता है, तो संबंधित चिकित्सकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सीएमओ डाक्टर विजय कुमार यादव ने बताया कि एंटीबायोटिक्स और स्टेरॉयड आदि बिना जरूरत के शरीर के लिए घातक साबित हो सकती हैं। सामान्य बुखार को केवल पैरासिटामोल से ही कवर किया जा सकता है। उनके संज्ञान में आया है कि कुछ चिकित्सक बुखार में पैरासिटामोल के साथ एंटीबायोटिक और स्टेरॉयड आदि लगा रहे हैं, जो बेहद गलत है। ऐसे चिकित्सकों पर नकेल कसी जाएगी।
प्लेट्लेटस कम होने को डेंगू मानना गलत
जिला मलेरिया अधिकारी ब्रजभूषण का कहना है कि प्लेट्लेटस डाउन होने को डेंगू मान लेना गलत है। डेंगू मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से होता है। यह मच्छर दिन में ही काटता है। प्लेट्लेटस डाउन होने को ही कुछ चिकित्सक पॉजिटिव मानने लगते हैं, जिससे लोगों में भय की स्थिति पैदा होती है।
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बिजनौर। एंटीबायोटिक्स के अत्यधिक प्रयोग से सामान्य बुखार वायरल में परिवर्तित हो रहा है। इसमें चिकित्सकों की लापरवाही भी है, जिससे सामान्य बुखार के मरीजों में तेजी से वायरल वायरस पनप रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे चिकित्सकों पर नकेल कसने की तैयारी कर ली है, जो देहात से शहर तक बड़ी संख्या में लोगों को सामान्य बुखार होने पर एंटीबायोटिक देकर वायरल को बढ़ावा दे रहे हैं।
बीते करीब दो माह से जिले में बुखार का प्रकोप जारी है। दो दर्जन से अधिक लोगों की जान चली गई है। आए दिन हो रही मौतों ने स्वास्थ्य अफसरों की नींद उड़ा रखी है। अधिकारी इसे लेकर परेशान दिख रहे हैं कि आखिर यह कौन सा बुखार है, जो लोगों की जिंदगी लील रहा है। स्वास्थ्य विभाग मौतों का कारण पता करने में जुटा है। अफसरों का कहना है कि अधिकांश जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि गांव देहात ही नहीं शहरों तक के चिकित्सक भी सामान्य बुखार होने पर मरीज को पैरासिटामोल के साथ भरपूर मात्रा में एंटीबायोटिक दवा भी देते हैं। जबकि ऐसा करना रोगी के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
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जिला अस्पताल के जनरल फिजिशियन डाक्टर राधेश्याम वर्मा का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को सामान्य बुखार होने पर केवल पैरासिटामोल टेबलेट या सिरप से ही कंट्रोल किया जा सकता है। इसके साथ में एंटीबायोटिक लगाने से मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है और रोगी के शरीर में मौजूद प्लैटलेट्स तेजी से कम होने लगती है।
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पंडित चंद्रकांत आत्रेय हॉस्पिटल के छाती रोग एवं क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डाक्टर अवधेश वशिष्ठ ने बताया कि बुखार में केवल पैरासिटामोल ही देनी चाहिए। इसके साथ लिक्विड डाइट से ही बुखार पर काबू पाया जा सकता है। पैरासिटामोल के साथ एंटीबायोटिक तभी लगानी चाहिए, जब शरीर पर चकते आदि हो गए हों।
नगर के वरिष्ठ फिजिशियन डाक्टर पंकज त्यागी का कहना है कि बुखार में एंटीबायोटिक से बचना चाहिए। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है और बीमारी वायरल का रूप लेकर प्लैट्लेटस को गिराती है। संक्रामक रोग के नोडल अफसर / जिला मलेरिया अधिकारी बृजभूषण ने बताया कि अधिकांश मरीजों के पर्चों में जांच करने पर इस बात का खुलासा हुआ है। उन्होंने बताया कि यदि भविष्य में किसी क्वेक्स का इस तरह का पर्चा पकड़ा जाता है, तो संबंधित चिकित्सकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सीएमओ डाक्टर विजय कुमार यादव ने बताया कि एंटीबायोटिक्स और स्टेरॉयड आदि बिना जरूरत के शरीर के लिए घातक साबित हो सकती हैं। सामान्य बुखार को केवल पैरासिटामोल से ही कवर किया जा सकता है। उनके संज्ञान में आया है कि कुछ चिकित्सक बुखार में पैरासिटामोल के साथ एंटीबायोटिक और स्टेरॉयड आदि लगा रहे हैं, जो बेहद गलत है। ऐसे चिकित्सकों पर नकेल कसी जाएगी।
प्लेट्लेटस कम होने को डेंगू मानना गलत
जिला मलेरिया अधिकारी ब्रजभूषण का कहना है कि प्लेट्लेटस डाउन होने को डेंगू मान लेना गलत है। डेंगू मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से होता है। यह मच्छर दिन में ही काटता है। प्लेट्लेटस डाउन होने को ही कुछ चिकित्सक पॉजिटिव मानने लगते हैं, जिससे लोगों में भय की स्थिति पैदा होती है।