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Bijnor News: रौद्र रूप में गंगा, 56 साल में समा गए 23 गांव

Tue, 11 Jul 2023 12:27 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर Updated Tue, 11 Jul 2023 12:27 AM IST
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In 56 years, 23 villages were absorbed in the fierce form of Ganga.
मंडावर क्षेत्र में गलखा देवी मंदिर के पास हो रहा कटान।
- हर साल सैकड़ों मीटर बिजनौर की ओर कटान कर रही गंगा
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- तटबंध की आस में कई सौ बीघा जमीन गवां चुके किसान
- गांवों के बाद अब गलखा देवी मंदिर पर कटान का खतरा
रजनीश त्यागी
बिजनौर। मुझमें समा जा इस तरह, तन प्राण का जो तौर है, जो देखे समझे नहीं मैं और हूं तू और है...यह लाइन गंगा किनारे बसे उन 23 गांवों के लिए कही जाए तो गलत न होगी, जो पिछले 56 सालों में एक एक कर जलसमाधि ले चुके हैं। आज देखें तो केवल वहां रौद्र रूप धारण किए गंगा की ऊंची उठती धारा ही नजर आएगी। गांवों के बाद मंडावर क्षेत्र में प्राचीन गलखा देवी मंदिर कभी भी गंगा की गोद में समा सकता है। प्रशासन से लेकर नेता तक बरसात से पहले कटान रोकने के इंतजाम पूरे करने के दावे तो करते रहे, लेकिन सब दावे गंगा में बाढ़ के साथ बह गए।
इन दिनों जिले में झमाझम बारिश हो रही है। गंगा में उफान तो जलस्तर घटने पर खादर में कटान से लोग परेशान हैं। वर्तमान में मंडावर खादर क्षेत्र से गौसपुर खादर तक गंगा लगातार फसल की भूमि को काट रही है। मंडावर क्षेत्र में गलखादेवी मंदिर से मात्र गंगा की धारा अब दस से 15 मीटर दूर ही रह गई है। यदि इतिहास पर नजर डाली जाए तो गंगा से बिजनौर और चांदपुर तहसील सबसे ज्यादा प्रभावित होती है। यहां के एक या दो नहीं बल्कि 23 गांव अब तक गंगा में समा चुके हैं। लोगों ने आबाद गांव में खुद अपने हाथों से घरों को तोड़कर मलबा बचाया था। आठ साल पुरानी बात करें तो सीमलाकलां और फतेहपुर सभाचंद यह दो गांव ऐसे हैं, जो सबसे आखिर में गंगा की रेती में खो गए। (संवाद)
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आजादी के बाद सबसे पहले नांदनौर गंगा में समाया था
साल 1957 में चांदपुर तहसील का गांव नांदनौर गंगा में बह गया था। इस गांव को खानपुर में आबाद किया गया था। इसके बाद चांदपुर तहसील के गांव जाफराबाद और जहांगीरपुर गांव भी गंगा में जलसमाधि ले चुके थे। इसके बाद वर्ष 1964 में आई गंगा की बाढ़ में विदुरकुटी के सामने आबाद गांव भुआ, बेला, शेरपुर, लीलावली, हरिपुर, श्रीजीपुर, गांवड़ी, खेड़ा, धूधली खादर गंगा में डूब गए थे।
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सुक्खापुर डूबा तो बसाया गया मार्कंडेपुरम
पिछले दो दशकों की बात करें तो बिजनौर तहसील के ही गांव मतवाली, सौपुरी, भगवतीपुर, इच्छावाला, मुर्शदाबाद, मोहनपुर भी गंगा की तेज धारा में बह गए। भगवतीपुर, इंच्छावाला, मुर्शदाबाद आदि आधा दर्जन गांव धारा के उस पार चले गए और अब गैर आबाद हैं। साल 2001 में भी जनपद का गांव सुक्खापुर भी पानी में बह गया। तत्कालीन डीएम ने सुक्खापुर के ग्रामीणों को नए स्थान पर बसाया, तो ग्रामीणों ने गांव का नाम भी डीएम के नाम पर ‘मार्कंडेपुरम’ रखा था।


ऐसी नदियां, जिनमें हर साल आती है बाढ़
यूं तो इस समय जिले की हर नदी में बाढ़ जैसे हालात हैं। इसका कारण इनका पहाड़ों से लिंक है। मैदान के अलावा पहाड़ों पर भी झमाझम बारिश हो रही है। इस कारण हर नदी में उफान है। गंगा मालन, खो, गागन, रामगंगा, बनौली, रतनाल, कोटावाली, ऊनी, नकटा, गूला, फीका, धारा, पीली, लकड़ियान और बान नदी में का जलस्तर बढ़ा हुआ है।

--------- कोट


गलखा देवी मंदिर का निरीक्षण किया गया और वहां कटान रोकने के इंतजाम कराए जा रहे हैं। जीयो ट्यूब भी लगवा दी गई है, ताकि कटान न हो। बरसात के बाद गंगा किनारे तटबंद और कटान रोधी कार्य कराए जाएंगे - उमेश मिश्रा, डीएम
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