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पूरे जिले में लगे थे अवैध पंप
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पूरे जिले में लगे थे अवैध पंप
बिजनौर। दो या चार जगह नहीं बल्कि पूरे जिले में अवैध पेट्रोल पंप लगे हुए थे। अवैध पंपों का यह जाल सिर्फ ग्रामीण इलाकों की सड़कों पर था। अब एक-एक कर मशीन उखड़ रही हैं तो अवैध पंप उजागर हो रहे हैं। रात में मुकरपुर में लगे पंप की भी मशीन उखाड़कर संचालक फरार हो गए।
छाछरी मोड़ से स्याऊ जाने वाली सड़क पर गांव मुकरपुर में एक पंप हुआ करता था। सालों से यहां तेल बिकता रहा है, लेकिन बुधवार की सुबह इस पंप की मशीन गायब मिली। लोग तेल लेने पहुंचे तो पेट्रोल पंप पर मशीन ही नहीं थी। तब कहीं जाकर लोगों को लगा कि यह अवैध तरीके से लगा हुआ था। इस पंप पर लाखों लीटर तेल बेच दिया गया होगा। ताज्जुब की बात यह है कि आपूर्ति विभाग की नाक के नीचे पंप चलता रहा। जिसे लेकर मिलीभगत से भी इनकार नहीं किया जा सकता। सिर्फ यह पंप ही नहीं बल्कि जिले में पिछले चार पांच दिनों के अंतराल मेें ही कई पंप संचालक मशीन उखाड़कर फरार हो चुके हैं। किसान बायो फ्यूल के नाम पर ये पंप संचालित किए जा रहे थे। अमर उजाला ने इस मामले का भंडाफोड़ किया तो तेल माफिया के पैर उखड़ गए। सूत्रों की मानें तो जिलेभर में अवैध पंपों का जाल बिछा हुआ था। इन पर डीजल दो रुपये सस्ता बायो फ्यूल बताकर दिया जा रहा था, जबकि पेट्रोल का रेट बराबर ही था। उधर, आपूर्ति विभाग नौ एफआईआर कराने का दावा कर रहा है, लेकिन कार्रवाई से कई अवैध पंप संचालक बच निकले हैं।
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बिजनौर। दो या चार जगह नहीं बल्कि पूरे जिले में अवैध पेट्रोल पंप लगे हुए थे। अवैध पंपों का यह जाल सिर्फ ग्रामीण इलाकों की सड़कों पर था। अब एक-एक कर मशीन उखड़ रही हैं तो अवैध पंप उजागर हो रहे हैं। रात में मुकरपुर में लगे पंप की भी मशीन उखाड़कर संचालक फरार हो गए।
छाछरी मोड़ से स्याऊ जाने वाली सड़क पर गांव मुकरपुर में एक पंप हुआ करता था। सालों से यहां तेल बिकता रहा है, लेकिन बुधवार की सुबह इस पंप की मशीन गायब मिली। लोग तेल लेने पहुंचे तो पेट्रोल पंप पर मशीन ही नहीं थी। तब कहीं जाकर लोगों को लगा कि यह अवैध तरीके से लगा हुआ था। इस पंप पर लाखों लीटर तेल बेच दिया गया होगा। ताज्जुब की बात यह है कि आपूर्ति विभाग की नाक के नीचे पंप चलता रहा। जिसे लेकर मिलीभगत से भी इनकार नहीं किया जा सकता। सिर्फ यह पंप ही नहीं बल्कि जिले में पिछले चार पांच दिनों के अंतराल मेें ही कई पंप संचालक मशीन उखाड़कर फरार हो चुके हैं। किसान बायो फ्यूल के नाम पर ये पंप संचालित किए जा रहे थे। अमर उजाला ने इस मामले का भंडाफोड़ किया तो तेल माफिया के पैर उखड़ गए। सूत्रों की मानें तो जिलेभर में अवैध पंपों का जाल बिछा हुआ था। इन पर डीजल दो रुपये सस्ता बायो फ्यूल बताकर दिया जा रहा था, जबकि पेट्रोल का रेट बराबर ही था। उधर, आपूर्ति विभाग नौ एफआईआर कराने का दावा कर रहा है, लेकिन कार्रवाई से कई अवैध पंप संचालक बच निकले हैं।
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