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Bijnor News: दर्द है तो दवा लो, जांचें होंगी 15 दिन बाद
Fri, 30 May 2025 12:19 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Fri, 30 May 2025 12:19 AM IST
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बिजनौर मेडिकल अस्पाल की पैथोलॉजी लैब में जांच के लिए लगी मरीजों की लंबी लाइन। संवाद
बिजनौर। सही और समय पर इलाज कराना है तो मेडिकल अस्पताल की ओर न जाएं। बिना जांच के चिकित्सक सटीक दवाई नहीं दे सकते और जांच यहां समय पर नहीं हो पा रही है। आलम यह है कि रसायन खत्म होने से पैथोलॉजी लैब में जांचें नहीं हो रही हैं।
मरीजों को जांच के लिए 15 दिन तक का समय दिया जा रहा है। अल्ट्रासाउंड तक के लिए भी आठ जून और उससे बाद की तारीख दी जा रही है। मेडिकल अस्पताल में रोज लगभग 1300 मरीज आते हैं। ज्यादातर को चिकित्सक सही बीमारी का पता लगाने के लिए जांच लिखते हैं। जब मरीज लैब में जांच के लिए जाते हैं तो उन्हें तारीख दी जा रही है।
n जांच में देरी से बढ़ सकती है बीमारी : फिजिशियन डॉ. विक्की सिंह ने बताया कि काला पीलिया में वायरल लोड की जांच के आधार पर ही इलाज की प्रक्रिया सुचारू रूप से शुरू होती है। सामान्य जांच में बीमारी का पता चलता है लेकिन वायरल लोड के आधार पर ही इलाज चल पाता है। ऐसे में जांच में देरी से बीमारी बढ़ जाती है।
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हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल यादव ने बताया कि गठिया की समस्या के लक्षण होने पर आरए फैक्टर की जांच कराई जाती है। इसी जांच से यह साफ हो पाता है कि मरीज को यह समस्या है या नहीं। कुछ मरीज वापस आकर यह बात कह रहे हैं कि जांच नहीं हो पा रही है।
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मरीजों को जांच के लिए 15 दिन तक का समय दिया जा रहा है। अल्ट्रासाउंड तक के लिए भी आठ जून और उससे बाद की तारीख दी जा रही है। मेडिकल अस्पताल में रोज लगभग 1300 मरीज आते हैं। ज्यादातर को चिकित्सक सही बीमारी का पता लगाने के लिए जांच लिखते हैं। जब मरीज लैब में जांच के लिए जाते हैं तो उन्हें तारीख दी जा रही है।
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n जांच में देरी से बढ़ सकती है बीमारी : फिजिशियन डॉ. विक्की सिंह ने बताया कि काला पीलिया में वायरल लोड की जांच के आधार पर ही इलाज की प्रक्रिया सुचारू रूप से शुरू होती है। सामान्य जांच में बीमारी का पता चलता है लेकिन वायरल लोड के आधार पर ही इलाज चल पाता है। ऐसे में जांच में देरी से बीमारी बढ़ जाती है।
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हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल यादव ने बताया कि गठिया की समस्या के लक्षण होने पर आरए फैक्टर की जांच कराई जाती है। इसी जांच से यह साफ हो पाता है कि मरीज को यह समस्या है या नहीं। कुछ मरीज वापस आकर यह बात कह रहे हैं कि जांच नहीं हो पा रही है।