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Bijnor News: प्रेम की निशानी की पहचाान ताजपुर का सेक्रेड हार्ट चर्च
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संवाद न्यूज एजेंसी
राजा का ताजपुर। क्रिसमस डे नजदीक आते ही सेक्रेड हार्ट चर्च पर साफ सफाई कार्य शुरू हो गया है। इसका निर्माण साल 1913 में ताजपुर के राजा श्याम सिंह रिख और उनके छोटे भाई शिवनाथ सिंह रिख ने अपनी ईसाई पत्नी मारग्रेट मैरी और विलियम मैरी के प्रार्थना करने के लिए कराया था। इसलिए इसे प्रेम की निशानी के तौर पर पहचाना जाता है।
चर्च ताजपुर से दो किलोमीटर उत्तर दिशा की ओर कडूला नदी किनारे लगभग 12 एकड़ भूमि में आम के बाग के बीच बनवाया था। चर्च को फ्लोरेंस निवासी प्रसिद्ध मूर्तिकार जोजप्पे कप्तानी चिंती ने बनाया था। इसके निर्माण व कलाकृति में ईंट, पत्थर, चूना और संगमरमर का प्रयोग हुआ था। चर्च के अंदर छत में सोने की नक्काशी की गई थी। प्रवेश द्वार से चर्च तक सड़क के दोनों ओर प्रभु ईसा मसीह के जीवन के वृत्तांत की मूर्तियां लगी हुई हैं।
राजा शिवनाथ सिंह रिख और उनकी पत्नी मारग्रेट मैरी की मृत्यु होने पर उन्हें चर्च के अंदर ही दफनाया गया था। दोनों की संगमरमर से बनी कब्र चर्च में ही है। कुछ समय बाद राजा श्याम सिंह रिख अपनी पत्नी विलियम मैरी के साथ बंगलुुरु चले गए थे। साल 1943 में 84 वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु हो गई थी। उन्हें बंगलुुरु में ही दफनाया गया था।
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परिजनों ने उसकी अस्थियां चर्च में ही दफनाई है। फादर सेमियर ने बताया कि क्रिसमस को लेकर तैयारियां जोरो से चल रही हैं। इस दिन चर्च में विशेष प्रार्थना की जाती है।
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राजा का ताजपुर। क्रिसमस डे नजदीक आते ही सेक्रेड हार्ट चर्च पर साफ सफाई कार्य शुरू हो गया है। इसका निर्माण साल 1913 में ताजपुर के राजा श्याम सिंह रिख और उनके छोटे भाई शिवनाथ सिंह रिख ने अपनी ईसाई पत्नी मारग्रेट मैरी और विलियम मैरी के प्रार्थना करने के लिए कराया था। इसलिए इसे प्रेम की निशानी के तौर पर पहचाना जाता है।
चर्च ताजपुर से दो किलोमीटर उत्तर दिशा की ओर कडूला नदी किनारे लगभग 12 एकड़ भूमि में आम के बाग के बीच बनवाया था। चर्च को फ्लोरेंस निवासी प्रसिद्ध मूर्तिकार जोजप्पे कप्तानी चिंती ने बनाया था। इसके निर्माण व कलाकृति में ईंट, पत्थर, चूना और संगमरमर का प्रयोग हुआ था। चर्च के अंदर छत में सोने की नक्काशी की गई थी। प्रवेश द्वार से चर्च तक सड़क के दोनों ओर प्रभु ईसा मसीह के जीवन के वृत्तांत की मूर्तियां लगी हुई हैं।
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राजा शिवनाथ सिंह रिख और उनकी पत्नी मारग्रेट मैरी की मृत्यु होने पर उन्हें चर्च के अंदर ही दफनाया गया था। दोनों की संगमरमर से बनी कब्र चर्च में ही है। कुछ समय बाद राजा श्याम सिंह रिख अपनी पत्नी विलियम मैरी के साथ बंगलुुरु चले गए थे। साल 1943 में 84 वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु हो गई थी। उन्हें बंगलुुरु में ही दफनाया गया था।
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परिजनों ने उसकी अस्थियां चर्च में ही दफनाई है। फादर सेमियर ने बताया कि क्रिसमस को लेकर तैयारियां जोरो से चल रही हैं। इस दिन चर्च में विशेष प्रार्थना की जाती है।