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World Hepatitis Day 2020: लापरवाही में कैंसर का रूप भी ले सकता है हेपेटाइटिस
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विश्व हैपेटाइटिस दिवस 2020
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लापरवाही में कैंसर का रूप भी ले सकता है हेपेटाइटिस
बिजनौर। जिले में पिछले दो वर्षों में हेपेटाइटिस बी के 159 और हेपेटाइटिस सी के 136 मरीज मिल चुके हैं। जनवरी की शुरुआत से लेकर अब तक इस वर्ष 35 लोगों में हेपेटाइटिस के संक्रमण की पुष्टि हुई है। चिकित्सकों के अनुसार संक्रमित ब्लड चढ़ाने, संक्रमित सिरिंज का इस्तेमाल करने, असुरक्षित यौन संबंध बनाने से यह व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करता है। काफी दिनों तक शराब का सेवन करने और दूषित पीने पीने से भी इस बीमारी होने की संभावना बनी रहती है। अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया जाए तो यह एक दिन कैंसर का रूप ले सकता है।
हेपेटाइटिस बीमारी ज्यादातर वायरस के कारण होती है। कभी-कभी बैक्टीरिया के संक्रमण अथवा दवाइयों के दुष्प्रभावों के कारण भी ये हो सकती है। वायरस से होने वाली हेपेटाइटिस गंभीर रूप भी धारण कर लेती है, इसलिए इसमें विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. ज्ञानचंद बताते हैं कि जिले में वर्ष 2018 में हेपेटाइटिस बी के 63, सी के 55 केस मिले हैं। वर्ष 2019 में हेपेटाइटिस बी के 96, सी 81 लोगों में इस संक्रमण की पुष्टि हुई है। इस साल अब तक हुई कुल 1732 जांचों में से केवल 35 लोगों में ही इस संक्रमण की पुष्टि हुई। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक दूषित पानी पीने या फिर शराब का सेवन करने से हेपेटाइटिस बी और सी की समस्या होती है। इससे लिवर ऑफ द सिरोसिस (कैंसर) का भी खतरा होता है।
छह माह तक इलाज न होने से हो सकता है कैंसर
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. राधेश्याम वर्मा ने बताया कि जिन व्यक्तियों को पहले से ही हेपेटाइटिस बी और सी की समस्या है, उनके साथ शारीरिक संबंध बनाने, दूषित संक्रमित सुइयों से संक्रमित खून चढ़ाने, टैटू बनवाने से यह बीमारी हो सकती है। हेपेटाइटिस की दो अवस्थाएं होती हैं। पहला प्रारंभिक (एक्यूट) और दूसरा पुरानी (क्रॉनिक)। हेपेटाइटिस की प्रारंभिक अवस्था रोग शुरू होने के तीन महीनों तक रहती है, किंतु छह माह तक जब इसका इलाज नहीं होता तो यह क्रॉनिक हेपेटाइटिस में बदल जाती है। प्रारंभिक अवस्था में यदि हेपेटाइटिस के साथ पीलिया भी हो जाए और इसका उपचार ठीक से न किया जाए तो यह क्रॉनिक बी या सी का रूप ले लेती है। यदि फिर भी उचित इलाज न हो सका तो यह लिवर सिरोसिस में परिवर्तित हो जाती है, जिसके फलस्वरूप पूरा लिवर क्षतिग्रस्त हो जाता है और लिवर का कैंसर भी हो सकता है। यदि रोग का निदान इस अवस्था में भी न हो पाए तो हेपेटाइटिस प्राणघातक रूप धारण कर सकता है। ऐसे में साफ सफाई का विशेष खयाल रखें और हेपेटाइटिस का टीका जरूर लगवाएं।
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हेपेटाइटिस के लक्षण
1. बुखार, झुरझुरी, भूख न लगना, खाने को देखकर जी मिचलाना।
2. उल्टी, बदन दर्द, सिगरेट पीने वालों को तंबाकू से अरुचि होना।
3. बदन में खुजली, पेट में गड़बड़ी, मूत्र का रंग गहरा होना, मल का रंग सफेद होना।
4. आंखों में पीलापन, पेशाब का रंग पीला होना, पैरों में सूजन बढ़ना।
5. हर समय जोड़ों में भी दर्द रहना, व्यवहार में चिड़चिड़ापन होना।
बचने के उपाय
- घाव को खुला न छोड़ें। यदि त्वचा कट फट जाए तो उस हिस्से को डिटॉल से साफ करें।
- शराब पीना बंद कर दें।
- अपने टूथब्रश, रेजर, सुईं, सिरिंज, कैंची या अन्य ऐसी वस्तुएं जो आपके खून के संपर्क में आती हों, शेयर न करें।
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बिजनौर। जिले में पिछले दो वर्षों में हेपेटाइटिस बी के 159 और हेपेटाइटिस सी के 136 मरीज मिल चुके हैं। जनवरी की शुरुआत से लेकर अब तक इस वर्ष 35 लोगों में हेपेटाइटिस के संक्रमण की पुष्टि हुई है। चिकित्सकों के अनुसार संक्रमित ब्लड चढ़ाने, संक्रमित सिरिंज का इस्तेमाल करने, असुरक्षित यौन संबंध बनाने से यह व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करता है। काफी दिनों तक शराब का सेवन करने और दूषित पीने पीने से भी इस बीमारी होने की संभावना बनी रहती है। अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया जाए तो यह एक दिन कैंसर का रूप ले सकता है।
हेपेटाइटिस बीमारी ज्यादातर वायरस के कारण होती है। कभी-कभी बैक्टीरिया के संक्रमण अथवा दवाइयों के दुष्प्रभावों के कारण भी ये हो सकती है। वायरस से होने वाली हेपेटाइटिस गंभीर रूप भी धारण कर लेती है, इसलिए इसमें विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. ज्ञानचंद बताते हैं कि जिले में वर्ष 2018 में हेपेटाइटिस बी के 63, सी के 55 केस मिले हैं। वर्ष 2019 में हेपेटाइटिस बी के 96, सी 81 लोगों में इस संक्रमण की पुष्टि हुई है। इस साल अब तक हुई कुल 1732 जांचों में से केवल 35 लोगों में ही इस संक्रमण की पुष्टि हुई। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक दूषित पानी पीने या फिर शराब का सेवन करने से हेपेटाइटिस बी और सी की समस्या होती है। इससे लिवर ऑफ द सिरोसिस (कैंसर) का भी खतरा होता है।
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छह माह तक इलाज न होने से हो सकता है कैंसर
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. राधेश्याम वर्मा ने बताया कि जिन व्यक्तियों को पहले से ही हेपेटाइटिस बी और सी की समस्या है, उनके साथ शारीरिक संबंध बनाने, दूषित संक्रमित सुइयों से संक्रमित खून चढ़ाने, टैटू बनवाने से यह बीमारी हो सकती है। हेपेटाइटिस की दो अवस्थाएं होती हैं। पहला प्रारंभिक (एक्यूट) और दूसरा पुरानी (क्रॉनिक)। हेपेटाइटिस की प्रारंभिक अवस्था रोग शुरू होने के तीन महीनों तक रहती है, किंतु छह माह तक जब इसका इलाज नहीं होता तो यह क्रॉनिक हेपेटाइटिस में बदल जाती है। प्रारंभिक अवस्था में यदि हेपेटाइटिस के साथ पीलिया भी हो जाए और इसका उपचार ठीक से न किया जाए तो यह क्रॉनिक बी या सी का रूप ले लेती है। यदि फिर भी उचित इलाज न हो सका तो यह लिवर सिरोसिस में परिवर्तित हो जाती है, जिसके फलस्वरूप पूरा लिवर क्षतिग्रस्त हो जाता है और लिवर का कैंसर भी हो सकता है। यदि रोग का निदान इस अवस्था में भी न हो पाए तो हेपेटाइटिस प्राणघातक रूप धारण कर सकता है। ऐसे में साफ सफाई का विशेष खयाल रखें और हेपेटाइटिस का टीका जरूर लगवाएं।
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हेपेटाइटिस के लक्षण
1. बुखार, झुरझुरी, भूख न लगना, खाने को देखकर जी मिचलाना।
2. उल्टी, बदन दर्द, सिगरेट पीने वालों को तंबाकू से अरुचि होना।
3. बदन में खुजली, पेट में गड़बड़ी, मूत्र का रंग गहरा होना, मल का रंग सफेद होना।
4. आंखों में पीलापन, पेशाब का रंग पीला होना, पैरों में सूजन बढ़ना।
5. हर समय जोड़ों में भी दर्द रहना, व्यवहार में चिड़चिड़ापन होना।
बचने के उपाय
- घाव को खुला न छोड़ें। यदि त्वचा कट फट जाए तो उस हिस्से को डिटॉल से साफ करें।
- शराब पीना बंद कर दें।
- अपने टूथब्रश, रेजर, सुईं, सिरिंज, कैंची या अन्य ऐसी वस्तुएं जो आपके खून के संपर्क में आती हों, शेयर न करें।