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स्वास्थ्य विभाग को नहीं पता कितने अस्पतालों में लगा ईटीपी
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स्वास्थ्य विभाग को नहीं पता कितने अस्पतालों में लगा ईटीपी
बिजनौर। स्वास्थ्य विभाग को नहीं पता कितने प्राइवेट नर्सिंग होम में ईटीपी लगा हुआ है। जिससे साफ जाहिर हो रहा है कि स्वास्थ्य विभाग बिना मानकों पर खरा नहीं उतरने पर भी प्राइवेट नर्सिंग होम का रजिस्ट्रेशन कर रहा है। अस्पताल का रजिस्ट्रेशन करते समय भी स्वास्थ्य विभाग ने संचालकों से यह भी जानकारी नहीं ली कि आपके पास ईटीपी सर्टिफिकेट है या नहीं।
जिले में कई अस्पताल बिना ईटीपी के ही संचालित हो रही हैं। स्वास्थ्य विभाग सिर्फ रजिस्ट्रेशन करते समय ही जांच करने के दावे करता है। मगर बाद में भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अस्पतालों में जाकर मानक पूरे होने की खबर नहीं लेते हैं। यहीं वजह है कि अभी तक स्वास्थ्य विभाग के पास यह रिकॉर्ड नहीं है कि कितने अस्पतालों में ईटीपी लगा हुआ है। जबकि सरकार की ओर से 10 बेड से ऊपर वाले नर्सिंग होम के लिए ईटीपी (इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) लगाने के आदेश है। मगर बिजनौर स्वस्थ्य विभाग के अधिकारियों के पास अस्पतालों में ईटीपी लगे होने की कोई जानकारी नहीं है।
कार्रवाई में सर्टिफिकेट मिला प्लांट नहीं
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने बिजनौर के जीवन हॉस्पिटल पर छापा मारकर सील कर दिया है। संचालक ने अधिकारियों को ईटीपी का सर्टिफिकेट को दिखाया। मगर कार्रवाई के दौरान अस्पताल में कोई प्लांट नहीं मिला है। जिससे पता चलता है कि सब दावे कागजों में ही सीमित हैं, धरातल पर कुछ नहीं है।
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रिकॉर्ड इकट्ठा कर रहा स्वास्थ्य विभाग
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक जिले में 238 नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं। इन अस्पतालों में ईटीपी है या नहीं, इसकी जानकारी करने में अब स्वास्थ्य विभाग जुटा हुआ है। क्योंकि बुधवार को अस्पताल पर हुई छापेमारी में सिर्फ ईटीपी सर्टिफिकेट मिला था। अस्पताल में प्लांट बनाया नहीं गया था।
क्या है ईटीपी
अस्पतालों से जो गंदा पानी और तरल पदार्थ निकलता है, उसे एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट(ईटीपी) में साफ किया जाता है। जिसके बाद नालियों में भी अगर अस्पतालों का पानी बहेगा तो भूजल को प्रदूषित नहीं करेगा। स्वास्थ्य विभाग को यह भी मालूम नहीं है कि अस्पतालों में ईटीपी लगा है या नहीं है। यह भी जानकारी नहीं है कि अस्पतालों से निकलने वाला गंदा पानी कहां जा रहा है। सीएमओ विजय कुमार गोयल ने बताया कि उन्हें जानकारी नहीं है कि कितने अस्पतालों में ईटीपी लगा हुआ है।
वर्जन.........
एनजीटी का आदेश मिला है। जिसमें सभी नर्सिंग होम के लिए ईटीपी लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। यदि किसी अस्पताल में ईटीपी नहीं है तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिसमें जुर्माने का भी प्रावधान है -आशुतोष चौहान, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी
वर्जन::
जिले के कितने अस्पतालों में ईटीपी लगा हुआ है, उन्हें अभी इसकी जानकारी नहीं है। सभी अस्पतालों का सर्वे किया जा रहा है। सर्वे के बाद ही पता चलेगा कि कितने अस्पतालों में ईटीपी लगा हुआ है।.....डॉ. विजय कुमार गोयल, सीएमओ
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बिजनौर। स्वास्थ्य विभाग को नहीं पता कितने प्राइवेट नर्सिंग होम में ईटीपी लगा हुआ है। जिससे साफ जाहिर हो रहा है कि स्वास्थ्य विभाग बिना मानकों पर खरा नहीं उतरने पर भी प्राइवेट नर्सिंग होम का रजिस्ट्रेशन कर रहा है। अस्पताल का रजिस्ट्रेशन करते समय भी स्वास्थ्य विभाग ने संचालकों से यह भी जानकारी नहीं ली कि आपके पास ईटीपी सर्टिफिकेट है या नहीं।
जिले में कई अस्पताल बिना ईटीपी के ही संचालित हो रही हैं। स्वास्थ्य विभाग सिर्फ रजिस्ट्रेशन करते समय ही जांच करने के दावे करता है। मगर बाद में भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अस्पतालों में जाकर मानक पूरे होने की खबर नहीं लेते हैं। यहीं वजह है कि अभी तक स्वास्थ्य विभाग के पास यह रिकॉर्ड नहीं है कि कितने अस्पतालों में ईटीपी लगा हुआ है। जबकि सरकार की ओर से 10 बेड से ऊपर वाले नर्सिंग होम के लिए ईटीपी (इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) लगाने के आदेश है। मगर बिजनौर स्वस्थ्य विभाग के अधिकारियों के पास अस्पतालों में ईटीपी लगे होने की कोई जानकारी नहीं है।
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कार्रवाई में सर्टिफिकेट मिला प्लांट नहीं
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने बिजनौर के जीवन हॉस्पिटल पर छापा मारकर सील कर दिया है। संचालक ने अधिकारियों को ईटीपी का सर्टिफिकेट को दिखाया। मगर कार्रवाई के दौरान अस्पताल में कोई प्लांट नहीं मिला है। जिससे पता चलता है कि सब दावे कागजों में ही सीमित हैं, धरातल पर कुछ नहीं है।
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रिकॉर्ड इकट्ठा कर रहा स्वास्थ्य विभाग
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक जिले में 238 नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं। इन अस्पतालों में ईटीपी है या नहीं, इसकी जानकारी करने में अब स्वास्थ्य विभाग जुटा हुआ है। क्योंकि बुधवार को अस्पताल पर हुई छापेमारी में सिर्फ ईटीपी सर्टिफिकेट मिला था। अस्पताल में प्लांट बनाया नहीं गया था।
क्या है ईटीपी
अस्पतालों से जो गंदा पानी और तरल पदार्थ निकलता है, उसे एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट(ईटीपी) में साफ किया जाता है। जिसके बाद नालियों में भी अगर अस्पतालों का पानी बहेगा तो भूजल को प्रदूषित नहीं करेगा। स्वास्थ्य विभाग को यह भी मालूम नहीं है कि अस्पतालों में ईटीपी लगा है या नहीं है। यह भी जानकारी नहीं है कि अस्पतालों से निकलने वाला गंदा पानी कहां जा रहा है। सीएमओ विजय कुमार गोयल ने बताया कि उन्हें जानकारी नहीं है कि कितने अस्पतालों में ईटीपी लगा हुआ है।
वर्जन.........
एनजीटी का आदेश मिला है। जिसमें सभी नर्सिंग होम के लिए ईटीपी लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। यदि किसी अस्पताल में ईटीपी नहीं है तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिसमें जुर्माने का भी प्रावधान है -आशुतोष चौहान, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी
वर्जन::
जिले के कितने अस्पतालों में ईटीपी लगा हुआ है, उन्हें अभी इसकी जानकारी नहीं है। सभी अस्पतालों का सर्वे किया जा रहा है। सर्वे के बाद ही पता चलेगा कि कितने अस्पतालों में ईटीपी लगा हुआ है।.....डॉ. विजय कुमार गोयल, सीएमओ