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अल्लाह के हर इम्तिहान में पास हुए हजरत इब्राहीम

Fri, 08 Jul 2022 11:27 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 08 Jul 2022 11:27 PM IST
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Hazrat Ibrahim passed in every test of Allah
अल्लाह के हर इम्तिहान में पास हुए हजरत इब्राहीम
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एजाज अहमद
नजीबाबाद। अल्लाह के इम्तिहान में जो पास हो जाता है उसे दुनिया याद करती है। हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की जिंदगी कुर्बानियों से भरी है। उलमा ने कहा अल्लाह ने हजरत इब्राहीम अलै. के जितने भी इंतिहान लिए वे उन पर खरे उतरे।
ईद-ए-कुर्बां त्योहार हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम का अल्लाह द्वारा लिए गए इम्तिहान में पास होने की याद में मनाया जाता है। मौलाना शम्सुद्दीन चतुर्वेदी फरमाते हैं कि कुर्बानी यानि अल्लाह की खुशी के लिए एक जानवर जिबाह करने की रिवायत को दुनिया ईद-ए-कुर्बां और ईदु-उल-अजहा के नाम से जानती है। ईद-ए-कुर्बां अल्लाह के पैगंबर यानि खुदा की बातें आवाम तक पहुंचाने और आवाम को खुदा की तरफ बुलाने वाले इब्राहीम अलै. की कुर्बानियों की याद दिलाता है। मौलाना शम्सुद्दीन फरमाते हैं कि अल्लाह ने बहुत से इम्तिहान लिए। सबसे बड़ा इम्तेहान हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने उस वक्त दिया जब अल्लाह ने फरमाया कि हमारे लिए सबसे बेशकीमती यानि मासूम बेटे इस्माइल अलै. की कुर्बानी करो। हजरत इब्राहीम ने बेटे को अल्लाह के हुक्म की बात सुनाई। बेटे ने पुरसुकून जवाब दिया अब्बाजान आप खुदा का हुक्म पूरा कीजिए। हजरत इब्राहीम ने बेटे की आंखों पर पट्टी बांधकर उसकी गर्दन पर छुरी चलाना शुरू किया तो अल्लाह की रहमत से आवाज सुनाई दी। इब्राहीम तुमने अपना वादा पूरा किया हमें तुम्हारी कुर्बानी कुबूल है तभी बेटे इस्माइल की जगह जन्नत से आए दुंबा की कुर्बानी हुई। हर साल मुस्लिम सुन्नत-ए-इब्राहीम के तौर पर ईद-उल-अजहा मनाते हैं और अल्लाह की राह में जानवर जिबाह करते हैं।
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जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना मोहम्मद ईसा और मुफ्ती अरशद फरमाते हैं कि कुर्बानी हर साहिबे निसाब मर्द और औरत पर वाजिब है, जिसके पास साढ़े 52 तोला चांदी या साढे़ सात तोला सोना या उसके बराबर रुपया हो उसे इस्लाम में साहिबे निसाब कहते हैं। साहिबे निसाब के माल पर जब एक साल गुजर जाए तो जकात वाजिब हो जाती है। साहिबे निसाब पर कुर्बानी वाजिब है। मुफ्ती उवैस अहमद शिब्ली कासमी फारमाते हैं कि जकात और कुर्बानी में फर्क यह है कि जकात माल के एक साल गुजर जाने पर वाजिब होती है, जबकि कुर्बानी के लिए माल पर एक साल गुजरना जरूरी नहीं है। अगर किसी के पास ईद के तीन दिनों में किसी दिन भी इतना रुपया या माल आ जाए जिससे वह साहिबे निसाब हो जाए तो उसे अल्लाह की खुशी के लिए कुर्बानी करना जरूरी है।
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कुर्बानी के समय ध्यान रखें
एक वर्ष से कम के जानवर की कुर्बानी न दें।
गोवंश की कुर्बानी पूरी तरह प्रतिबंधित है।
खुले में और सार्वजनिक रूप से कुर्बानी न करें।
गोश्त ढक कर रखें और कुर्बानी के अवशेष गड्ढे में दबाएं।
रक्त और अवशेष नाली में न बहाएं।
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