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हस्तिनापुर अभ्यारण्य : एक जैसा होगा फारेस्ट और रेवेन्यू का नक्शा
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हस्तिनापुर सेंक्चुअरि के हैदरपुर वेटलैंड मे गंगा किनारे बैठे पक्षी।
- फोटो : BIJNOR
रजनीश त्यागी
बिजनौर। गंगा किनारे बसे 212 गांवों को हस्तिनापुर सेंक्चुअरि से बाहर करने की तैयारी चल रही हैं। वहीं, रेवेन्यू और वन विभाग के नक्शे में मिले अंतर को दूर करने का काम भी शुरू हो गया है। इसके लिए रेवेन्यू और वन अधिकारी एक साथ गंगा किनारे गांवों में जाकर सीमांकन करेंगे और जियो टैगिंग की मदद से एक नया नक्शा तैयार करेंगे। इसके लिए एडीएम वित्त एवं राजस्व अरविंद कुमार सिंह और डीएफओ डॉ. अनिल पटेल ने बिजनौर, चांदपुर के एसडीएम के साथ रणनीति तैयार की।
पिछले एक साल से हस्तिनापुर सेंक्चुअरि के पुनर्गठन की तैयारी चल रही है। जिले में बिजनौर और चांदपुर तहसील के करीब 212 गांवों को सेंक्चुअरि से बाहर रखने का प्रस्ताव रखा गया था, जिनका सर्वे भी पूरा हो चुका है। अब तक हस्तिनापुर सेंक्चुअरि में बिजनौर और चांदपुर तहसील के 327 गांव शामिल थे। नया सीमांकन पूरा होने के बाद मात्र 115 गांव ही सेंक्चुअरि में रह जाएंगे। उधर, वन विभाग ने हस्तिनापुर सेंक्चुअरि का नया नक्शा भी तैयार करना शुरू कर दिया है। जब मिलान रेवेन्यू विभाग के नक्शे से हुआ, तो इसमें काफी अंतर आया। इसे लेकर एडीएम वित्त एवं राजस्व अरविंद कुमार सिंह, डीएफओ डॉ. अनिल पटेल ने संयुक्त बैठक की। बैठक में बिजनौर एसडीएम सदर मोहित कुमार, एसडीएम चांदपुर शामिल रहे। इसमें दोनों विभागों के नक्शे का मिलान करने पर चर्चा हुई।
सीमांकन को लेकर एक साल तक हुआ काम
भारतीय वन्य जीव संस्थान ने पिछले एक साल तक हस्तिनापुर सेंक्चुअरि के सीमांकन को लेकर काम किया। इसके बाद गंगा से सटे उस क्षेत्र को सेंक्चुअरि में रखा जाएगा, जहां पर वन्य जीवों की गतिविधियां मिली हैं। उसे ही क्रिटिकल हैविटाट का नाम दिया गया है। हस्तिनापुर वाइल्ड लाइफ सेंक्चुअरि की पहली अधिसूचना 1986 में की गई थी। 2073 वर्ग किलोमीटर इस सेंक्चुअरि का क्षेत्रफल बताया जाता है। यूं तो इसे बारहसिंघा के लिए संरक्षित किया गया था। लेकिन इस सेंक्चुअरि में हिरण, सांभर, चीतल, नीलगाय, तेंदुआ, जंगली बिल्ली, गंगा में घड़ियाल, डॉल्फिन, सैकड़ों प्रजाति के पक्षी, अजगर आदि देखने को मिलते हैं।
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इन जिलों में फैली है सेंक्चुअरि
हस्तिनापुर सेंक्चुअरि इस समय मेरठ, बिजनौर, अमरोहा, मुजफ्फरनगर जिलों में फैली हुई है।
नए सीमांकन से यह होंगे लाभ
हस्तिनापुर सेंक्चुअरि में आने वाले क्षेत्र में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना, विद्युतीकरण या फिर निर्माण कार्यों पर पाबंदी है। हालांकि बिजनौर और चांदपुर क्षेत्र के अधिकांश इलाके विकसित हो गए थे और इसके पुनर्गठन की आवश्यकता थी। अब जो 212 गांव सेंक्चुअरि से बाहर होने जा रहे हैं, वह विकसित हो सकेंगे।
सेंक्चुअरि के पुनर्गठन और फाइनल नोटिफिकेशन को लेकर नया नक्शा तैयार हो रहा है। रेवेन्यू विभाग के नक्शे से वन विभाग का नक्शा मिलाया जा रहा है। अब मौके पर पहुंचकर इसका मिलान होगा, ताकि सही नक्शा तैयार हो सके। इसके लिए जियो टैगिंग की भी मदद ली जाएगी - डॉ. अनिल पटेल, डीएफओ बिजनौर
वन विभाग के अधिकारियों के साथ सेंक्चुअरि के मामले पर बैठक हुई है। नक्शे में आ रहे अंतर को ठीक करने पर ही चर्चा हुई है। टीमों को लगाया गया है, ताकि यह कार्य शीघ्र पूरा हो सके।
- अरविंद कुमार सिंह, एडीएम वित्त एवं राजस्व
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बिजनौर। गंगा किनारे बसे 212 गांवों को हस्तिनापुर सेंक्चुअरि से बाहर करने की तैयारी चल रही हैं। वहीं, रेवेन्यू और वन विभाग के नक्शे में मिले अंतर को दूर करने का काम भी शुरू हो गया है। इसके लिए रेवेन्यू और वन अधिकारी एक साथ गंगा किनारे गांवों में जाकर सीमांकन करेंगे और जियो टैगिंग की मदद से एक नया नक्शा तैयार करेंगे। इसके लिए एडीएम वित्त एवं राजस्व अरविंद कुमार सिंह और डीएफओ डॉ. अनिल पटेल ने बिजनौर, चांदपुर के एसडीएम के साथ रणनीति तैयार की।
पिछले एक साल से हस्तिनापुर सेंक्चुअरि के पुनर्गठन की तैयारी चल रही है। जिले में बिजनौर और चांदपुर तहसील के करीब 212 गांवों को सेंक्चुअरि से बाहर रखने का प्रस्ताव रखा गया था, जिनका सर्वे भी पूरा हो चुका है। अब तक हस्तिनापुर सेंक्चुअरि में बिजनौर और चांदपुर तहसील के 327 गांव शामिल थे। नया सीमांकन पूरा होने के बाद मात्र 115 गांव ही सेंक्चुअरि में रह जाएंगे। उधर, वन विभाग ने हस्तिनापुर सेंक्चुअरि का नया नक्शा भी तैयार करना शुरू कर दिया है। जब मिलान रेवेन्यू विभाग के नक्शे से हुआ, तो इसमें काफी अंतर आया। इसे लेकर एडीएम वित्त एवं राजस्व अरविंद कुमार सिंह, डीएफओ डॉ. अनिल पटेल ने संयुक्त बैठक की। बैठक में बिजनौर एसडीएम सदर मोहित कुमार, एसडीएम चांदपुर शामिल रहे। इसमें दोनों विभागों के नक्शे का मिलान करने पर चर्चा हुई।
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सीमांकन को लेकर एक साल तक हुआ काम
भारतीय वन्य जीव संस्थान ने पिछले एक साल तक हस्तिनापुर सेंक्चुअरि के सीमांकन को लेकर काम किया। इसके बाद गंगा से सटे उस क्षेत्र को सेंक्चुअरि में रखा जाएगा, जहां पर वन्य जीवों की गतिविधियां मिली हैं। उसे ही क्रिटिकल हैविटाट का नाम दिया गया है। हस्तिनापुर वाइल्ड लाइफ सेंक्चुअरि की पहली अधिसूचना 1986 में की गई थी। 2073 वर्ग किलोमीटर इस सेंक्चुअरि का क्षेत्रफल बताया जाता है। यूं तो इसे बारहसिंघा के लिए संरक्षित किया गया था। लेकिन इस सेंक्चुअरि में हिरण, सांभर, चीतल, नीलगाय, तेंदुआ, जंगली बिल्ली, गंगा में घड़ियाल, डॉल्फिन, सैकड़ों प्रजाति के पक्षी, अजगर आदि देखने को मिलते हैं।
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इन जिलों में फैली है सेंक्चुअरि
हस्तिनापुर सेंक्चुअरि इस समय मेरठ, बिजनौर, अमरोहा, मुजफ्फरनगर जिलों में फैली हुई है।
नए सीमांकन से यह होंगे लाभ
हस्तिनापुर सेंक्चुअरि में आने वाले क्षेत्र में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना, विद्युतीकरण या फिर निर्माण कार्यों पर पाबंदी है। हालांकि बिजनौर और चांदपुर क्षेत्र के अधिकांश इलाके विकसित हो गए थे और इसके पुनर्गठन की आवश्यकता थी। अब जो 212 गांव सेंक्चुअरि से बाहर होने जा रहे हैं, वह विकसित हो सकेंगे।
सेंक्चुअरि के पुनर्गठन और फाइनल नोटिफिकेशन को लेकर नया नक्शा तैयार हो रहा है। रेवेन्यू विभाग के नक्शे से वन विभाग का नक्शा मिलाया जा रहा है। अब मौके पर पहुंचकर इसका मिलान होगा, ताकि सही नक्शा तैयार हो सके। इसके लिए जियो टैगिंग की भी मदद ली जाएगी - डॉ. अनिल पटेल, डीएफओ बिजनौर
वन विभाग के अधिकारियों के साथ सेंक्चुअरि के मामले पर बैठक हुई है। नक्शे में आ रहे अंतर को ठीक करने पर ही चर्चा हुई है। टीमों को लगाया गया है, ताकि यह कार्य शीघ्र पूरा हो सके।
- अरविंद कुमार सिंह, एडीएम वित्त एवं राजस्व