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फिर लटका भुगतान, मिलों पर 375 करोड़ बकाया
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फिर लटका भुगतान, मिलों पर 375 करोड़ बकाया
बिजनौर। चीनी मिलों ने फिर से भुगतान लटकाना शुरू कर दिया है। पिछले साल का भुगतान दबाए बैठी चीनी मिलों ने चालू पेराई सत्र में भी किसानों को भुगतान की फूटी कौड़ी नहीं दी है। किसान भुगतान न मिलने से परेशान हैं। वहीं, प्रशासन चीनी मिलों के खिलाफ सख्ती बरतने की बात कह रहा है।
प्रदेश सरकार ने लगातार दूसरे साल गन्ने के मूल्यों में वृद्धि नहीं की है। गन्ना मूल्य न बढ़ने से किसानों में रोष है। किसान महंगाई को देखते हुए गन्ने के दाम बढ़ाने की मांग कर रहे थे, लेकिन सरकार ने इसकी अनदेखी की है। पहले से ही सरकार की उपेक्षा झेल रहे किसानों को अब चीनी मिलें भी परेशान कर रही हैं। चीनी मिलों पर इस साल का करीब 375 करोड़ रुपये बकाया है। बिलाई, बिजनौर और बरकातपुर चीनी मिल ने तो अब तक एक रुपया भी भुगतान नहीं किया है। इन तीनों चीनी मिलों पर पिछले साल का भी गन्ना भुगतान बकाया है। बिलाई चीनी मिल दस जनवरी तक पिछले साल का समस्त भुगतान करने की बात कह रही है, लेकिन बिजनौर व चांदपुर चीनी मिल की ओर से अब तक ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है। हालांकि भुगतान देने के लिए दोनों चीनी मिलों ने बैंकों से सीसीएल लेने की बात कही है।
चीनी मिल भुगतान बकाया
धामपुर 118.70 42.19
स्योहारा 65.67 76.32
बिलाई 00 119.51
बहादरपुर 95.53 00
बरकातपुर 18.16 70.98
बुंदकी 95.92 00
चांदपुर 00 39.56
बिजनौर 00 25.09
नजीबाबाद 25.16 2.26
कुल 419.14 375.71
नोट : आंकड़े गन्ना विभाग से लिए गए हैं और तीन जनवरी तक खरीदे गए गन्ने के हैं।
दो मिलों ने किया शत प्रतिशत भुगतान
जिले में तीन चीनी मिलों ने अभी तक भले ही फूटी कौड़ी न दी हो, दो चीनी मिलें ऐसी भी हैं जिन्होंने अब तक खरीदे गन्ने का शत प्रतिशत भुगतान कर दिया है। बहादरपुर और बुंदकी चीनी मिल ने अब तक खरीदे गन्ने का शत प्रतिशत भुगतान कर दिया है।
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कोट --------
भाकियू जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह का कहना है कि अगर चीनी मिल ऐसे ही भुगतान लटकाती रहीं तो अगले साल तक भी भुगतान नहीं होगा। कुछ चीनी मिलों ने गन्ना भुगतान लटकाने की पॉलिसी बना ली है। इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
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आजाद किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र सिंह का कहना है कि चीनी मिलों के खिलाफ सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए। व्यवस्था यह होनी चाहिए कि मिल को गन्ना देते ही किसान के खाते में भुगतान पहुंच जाए।
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जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह के अनुसार चीनी मिलों को गन्ना भुगतान करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। कई चीनी मिलों ने सीसीएल के लिए आवेदन किया है।
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बिजनौर। चीनी मिलों ने फिर से भुगतान लटकाना शुरू कर दिया है। पिछले साल का भुगतान दबाए बैठी चीनी मिलों ने चालू पेराई सत्र में भी किसानों को भुगतान की फूटी कौड़ी नहीं दी है। किसान भुगतान न मिलने से परेशान हैं। वहीं, प्रशासन चीनी मिलों के खिलाफ सख्ती बरतने की बात कह रहा है।
प्रदेश सरकार ने लगातार दूसरे साल गन्ने के मूल्यों में वृद्धि नहीं की है। गन्ना मूल्य न बढ़ने से किसानों में रोष है। किसान महंगाई को देखते हुए गन्ने के दाम बढ़ाने की मांग कर रहे थे, लेकिन सरकार ने इसकी अनदेखी की है। पहले से ही सरकार की उपेक्षा झेल रहे किसानों को अब चीनी मिलें भी परेशान कर रही हैं। चीनी मिलों पर इस साल का करीब 375 करोड़ रुपये बकाया है। बिलाई, बिजनौर और बरकातपुर चीनी मिल ने तो अब तक एक रुपया भी भुगतान नहीं किया है। इन तीनों चीनी मिलों पर पिछले साल का भी गन्ना भुगतान बकाया है। बिलाई चीनी मिल दस जनवरी तक पिछले साल का समस्त भुगतान करने की बात कह रही है, लेकिन बिजनौर व चांदपुर चीनी मिल की ओर से अब तक ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है। हालांकि भुगतान देने के लिए दोनों चीनी मिलों ने बैंकों से सीसीएल लेने की बात कही है।
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चीनी मिल भुगतान बकाया
धामपुर 118.70 42.19
स्योहारा 65.67 76.32
बिलाई 00 119.51
बहादरपुर 95.53 00
बरकातपुर 18.16 70.98
बुंदकी 95.92 00
चांदपुर 00 39.56
बिजनौर 00 25.09
नजीबाबाद 25.16 2.26
कुल 419.14 375.71
नोट : आंकड़े गन्ना विभाग से लिए गए हैं और तीन जनवरी तक खरीदे गए गन्ने के हैं।
दो मिलों ने किया शत प्रतिशत भुगतान
जिले में तीन चीनी मिलों ने अभी तक भले ही फूटी कौड़ी न दी हो, दो चीनी मिलें ऐसी भी हैं जिन्होंने अब तक खरीदे गन्ने का शत प्रतिशत भुगतान कर दिया है। बहादरपुर और बुंदकी चीनी मिल ने अब तक खरीदे गन्ने का शत प्रतिशत भुगतान कर दिया है।
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कोट --------
भाकियू जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह का कहना है कि अगर चीनी मिल ऐसे ही भुगतान लटकाती रहीं तो अगले साल तक भी भुगतान नहीं होगा। कुछ चीनी मिलों ने गन्ना भुगतान लटकाने की पॉलिसी बना ली है। इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
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आजाद किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र सिंह का कहना है कि चीनी मिलों के खिलाफ सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए। व्यवस्था यह होनी चाहिए कि मिल को गन्ना देते ही किसान के खाते में भुगतान पहुंच जाए।
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जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह के अनुसार चीनी मिलों को गन्ना भुगतान करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। कई चीनी मिलों ने सीसीएल के लिए आवेदन किया है।