{"_id":"62f3fe3fc5540f422664af69","slug":"gyan-chand-s-writings-populating-urdu-language-in-pakistan-bijnor-news-mrt6006986176","type":"story","status":"publish","title_hn":"पाकिस्तान में उर्दू जुबां को आबाद कर रही ज्ञान चंद की लेखनी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पाकिस्तान में उर्दू जुबां को आबाद कर रही ज्ञान चंद की लेखनी
विज्ञापन
-स्योहारा के ज्ञान चंद जैन। (फाइल फोटो)
- फोटो : BIJNOR
पाकिस्तान में उर्दू जुबां को आबाद कर रही ज्ञान चंद की लेखनी
स्योहारा। स्योहारा के मूल निवासी लेखक ज्ञान चंद जैन का लेखन पाकिस्तान में उर्दू जुबां की रंगत में अपने रंग भर रहा है। वहां की युवा पीढ़ी उनके लेखन को पढ़ उर्दू से जुड़े अपने ज्ञान का विस्तार कर रही है। पाकिस्तान के शिक्षण पाठ्यक्रम में शामिल हिंदुस्तानी लेखक की पुस्तकों ने उर्दू जुबां को आबाद करने का काम किया है।
उर्दू भाषा के विश्व प्रसिद्ध साहित्यकार ज्ञान चंद जैन का जन्म स्योहारा के मोहल्ला जैन स्ट्रीट निवासी शाहू बहाल चंद जैन के घर 21 सितंबर 1923 को हुआ। उनकी आरंभिक शिक्षा स्योहारा के एमक्यू इंटर कॉलेज में ही हुई। एमए उर्दू, डी लिट् तथा 1948 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उर्दू की नसरी दास्ताने विषय पर पीएचडी की। इनके द्वारा रचित एक समालोचना जिक्र ओ फिक्र के लिये उन्हें 1982 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। प्रो. ज्ञान चंद जैन का नाम उर्दू समालोचना में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। वे उर्दू के बेहतरीन भाषाविद, शायर और समालोचक थे। 1982 में इनकी पुस्तक जिक्र-ओ-फिक्र के लिए उर्दू भाषा का साहित्य एकेडमी पुरस्कार का सम्मान मिला था। 1960 में आगरा विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें उर्दू मसनवी शुमाली हिन्द में के लिए अवार्ड दिया गया। वह हमीदिया कॉलेज भोपाल, उस्मानिया विश्वविद्यालय, जम्मू विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, केंद्रीय विश्वविद्यालय हैदराबाद में डीन रहे। प्रो ज्ञान चंद जैन ने ग़ाफ़िल उपनाम से शायरी भी की। इन्हें इनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए 2002 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। डॉ. ज्ञानचन्द जैन ने उर्दू, अंग्रेजी, हिंदी साहित्य में 110 से अधिक किताबें लिखीं। आम लिसानियात, उर्दू की नसरियात, एक भाषा दो लिखावट दो अदब, कच्चे बोल, हकीक, लिसानी मुताले, कच्चे बोल, अदबी इजाफ़, गालिब शनास मालिक राम, खोज, परख और पहचान, इब्तदाई कलाम ए इकबाल, तफ़्सीर ए ग़ालिब, उपेंद्र नाथ अश्क, हकीक ए फन आदि पुस्तकें लिखीं। आज भी देश के उर्दू स्नाकोत्तर तथा पीचडी व पाकिस्तान में उर्दू के सभी विद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों में इनकी लिखी किताबें पढ़ाई जाती है। लेखक ज्ञानचंद जैन पर अनेक स्कॉलर्स ने पीएचडी की है। अपने अंतिम समय में वे स्मृति लॉस तथा पार्किंसन बीमारी से ग्रस्त रहे। 11 अगस्त 2007 में कैलिफोर्निया अमेरिका में उनका निधन हो गया था।
विज्ञापन
स्योहारा। स्योहारा के मूल निवासी लेखक ज्ञान चंद जैन का लेखन पाकिस्तान में उर्दू जुबां की रंगत में अपने रंग भर रहा है। वहां की युवा पीढ़ी उनके लेखन को पढ़ उर्दू से जुड़े अपने ज्ञान का विस्तार कर रही है। पाकिस्तान के शिक्षण पाठ्यक्रम में शामिल हिंदुस्तानी लेखक की पुस्तकों ने उर्दू जुबां को आबाद करने का काम किया है।
उर्दू भाषा के विश्व प्रसिद्ध साहित्यकार ज्ञान चंद जैन का जन्म स्योहारा के मोहल्ला जैन स्ट्रीट निवासी शाहू बहाल चंद जैन के घर 21 सितंबर 1923 को हुआ। उनकी आरंभिक शिक्षा स्योहारा के एमक्यू इंटर कॉलेज में ही हुई। एमए उर्दू, डी लिट् तथा 1948 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उर्दू की नसरी दास्ताने विषय पर पीएचडी की। इनके द्वारा रचित एक समालोचना जिक्र ओ फिक्र के लिये उन्हें 1982 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। प्रो. ज्ञान चंद जैन का नाम उर्दू समालोचना में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। वे उर्दू के बेहतरीन भाषाविद, शायर और समालोचक थे। 1982 में इनकी पुस्तक जिक्र-ओ-फिक्र के लिए उर्दू भाषा का साहित्य एकेडमी पुरस्कार का सम्मान मिला था। 1960 में आगरा विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें उर्दू मसनवी शुमाली हिन्द में के लिए अवार्ड दिया गया। वह हमीदिया कॉलेज भोपाल, उस्मानिया विश्वविद्यालय, जम्मू विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, केंद्रीय विश्वविद्यालय हैदराबाद में डीन रहे। प्रो ज्ञान चंद जैन ने ग़ाफ़िल उपनाम से शायरी भी की। इन्हें इनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए 2002 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। डॉ. ज्ञानचन्द जैन ने उर्दू, अंग्रेजी, हिंदी साहित्य में 110 से अधिक किताबें लिखीं। आम लिसानियात, उर्दू की नसरियात, एक भाषा दो लिखावट दो अदब, कच्चे बोल, हकीक, लिसानी मुताले, कच्चे बोल, अदबी इजाफ़, गालिब शनास मालिक राम, खोज, परख और पहचान, इब्तदाई कलाम ए इकबाल, तफ़्सीर ए ग़ालिब, उपेंद्र नाथ अश्क, हकीक ए फन आदि पुस्तकें लिखीं। आज भी देश के उर्दू स्नाकोत्तर तथा पीचडी व पाकिस्तान में उर्दू के सभी विद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों में इनकी लिखी किताबें पढ़ाई जाती है। लेखक ज्ञानचंद जैन पर अनेक स्कॉलर्स ने पीएचडी की है। अपने अंतिम समय में वे स्मृति लॉस तथा पार्किंसन बीमारी से ग्रस्त रहे। 11 अगस्त 2007 में कैलिफोर्निया अमेरिका में उनका निधन हो गया था।
विज्ञापन