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अमानगढ़ में अब बचे हैं केवल 45 गुलदार

Mon, 06 Jan 2020 11:36 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 06 Jan 2020 11:36 PM IST
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Guldar is leaving the forest to make the locality
वन छोड़ खेतों को ठिकाना बना रहे गुलदार
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बिजनौर। गन्ने के खेतों में 100 से ज्यादा गुलदार घूम रहे हैं। गुलदारों ने अमानगढ़ रेंज को लगभग छोड़ना शुरू कर दिया है। अमानगढ़ में केवल 45 गुलदार बचे हैं। स्पष्ट है कि वन क्षेत्र को छोड़कर गुलदार ने खेतों को ठिकाना बना लिया है। वहीं, अब गुलदार अपनी प्रवृत्ति भी बदल रहे हैं।
करीब चार साल पूर्व वन विभाग ने जिले में गुलदारों की गणना की थी। तब जिले में 100 गुलदार मिले थे। इनमें से ज्यादातर 70 गुलदार अमानगढ़ वन रेंज में ही थे। अमानगढ़ वन रेंज का एरिया 9580 हेक्टेअर में है। यह जिम कार्बेट से जुड़ा हुआ है। पहले गुलदार के दिखने की घटना कभी कभार ही होती थी। खेतों में गुलदार दिखना बड़ी बात होती थी। लेकिन बीते कुछ सालों में खेतों में गुलदार के दिखने और गांव में आकर पालतू जानवरों को निवाला बनाना शुरू कर दिया। फिर भी 2018 तक वन विभाग के पास महीने में ऐसा एक दो मामला ही सामने आता था। लेकिन 2019 में गुलदार के हमले बढ़ने लगे। गुलदार अक्सर गांवों में आने लगे। हर महीने गुलदार के दिखने या हमला करने की चार से पांच शिकायतें वन विभाग के पास आईं। वन विभाग ने पिछले साल अमानगढ़ रेंज में गुलदारों की गिनती कराई तो अमानगढ़ में केवल 45 गुलदार ही मिले। बाकी गुलदार अब जंगल से निकलर गांवों की ओर रुख कर चुके हैं। गांवों में गुलदारों की आबादी खूब फल फूल रही है। गुलदारों की आबादी बढ़ने की बात कही जा रही है। जिले में गुलदारों द्वारा इंसानों को मौत के घाट उतारने से पहले ही वन विभाग मानने लगा था कि गुलदारों की संख्या बढ़ गई है और ये गांवों की ओर के जंगलों में रुख कर रहे हैं। वन विभाग गुलदारों की गिनती के लिए गणना शुरू करने की तैयारी भी कर रहा था। डीएफओ डाक्टर एम सेम्मारन के मुताबिक जल्दी गुलदारों की गिनती कराई जाएगी।
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गांवों के पास जीने का संघर्ष नहीं
जंगल में जीने के लिए संघर्ष करना होता है। लेकिन जंगलों के किनारे आसानी से भोजन मिल जाता है। गुलदार जंगली जानवरों के अलावा रात के अंधेरे में किसानों के पशुओं व कुत्तों को निवाला बनाते हैं। आसान भोजन की तलाश उन्हें गांवों में खींच लाती है।
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