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विधायक के निष्कासित होने से सियासत गरमाई
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Mon, 13 Jun 2016 12:30 AM IST
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विधायक तसलीम अहमद।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में नजीबाबाद के बसपा विधायक हाजी तसलीम अहमद को राज्यसभा व विधान परिषद के चुनाव में पाला बदलने का खामियाजा भुगतना पड़ा है। बसपा आलाकमान ने विधायक तसलीम अहमद को पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने पर निष्कासित कर दिया है। विधायक पर गाज गिरने से जिले की सियासत गरमा गई है। उधर, विधायक ने कहा कि सपा को वोट दिया है, तो बसपा से वह वैसे ही अलग हो गए।
नजीबाबाद से बसपा विधायक हाजी तसलीम अहमद ने राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव में पाला बदलकर सपा के पक्ष में वोटिंग किया। विधायक के इस निर्णय से पार्टी नेताओं में एकाएक खलबली मच गई। रविवार को पार्टी आलाकमान के निर्देश पर तसलीम अहमद को बसपा से निष्कासित कर दिया गया है। बसपा के जिलाध्यक्ष राजेंद्र सिंह ने विधायक को पार्टी से निष्कासित किए जाने की पुष्टि की गई है। बसपा विधायक पर गाज गिरने से जिले की राजनीति गरमा गई है। तसलीम अहमद ने वर्ष 2011 में सपा को छोड़कर बसपा का दामन थामा था। 2012 के चुनाव में वह नजीबाबाद से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़कर विधायक बने थे। बसपा के नेता तसलीम अहमद पर विधान परिषद व राज्यसभा के चुनाव में सपा को वोट देने का आरोप लगा रहे हैं। विधायक तसलीम अहमद ने कहा कि विधान परिषद का वोट तो बसपा को दिया। राज्यसभा का वोट खुलेआम सपा को दिया है। विधान परिषद का वोट बसपा को देने का उनके पास सबूत भी है।
पहले ही बसपा से नाता तोड़ने का बना लिया था मन
बिजनौर में नजीबाबाद के विधायक तसलीम अहमद पर पहले से ही बसपा से बाहर का रास्ता दिखाने की तलवार लटकी थी। इलाके के दलित तसलीम अहमद का खुलकर विरोध कर रहे थे। राजनीति किस करवट जा रही है इसे भांपने में माहिर तसलीम अहमद ने बसपा से नाता तोड़ने का पहल ही मन बना लिया था। इसके लिए उन्होंने राज्यसभा व विधान परिषद चुनाव का रास्ता चुना। पाला बदलने के खेल में वह जरा नहीं चूके। विधायक तसलीम अहमद जिले की राजनीति के मंजे हुए खिलाड़ी हैं। राजनीति में कब क्या निर्णय लेना है इसे वह भलीभांति जानते हैं। बसपा में अंदरखाने सुलग रहीं आग से तसलीम अहमद अच्छी तरह वाकिफ थे। नजीबाबाद विधान सभा क्षेत्र के दलित मामूली बातों को लेकर तसलीम अहमद का विरोध कर रहे थे। तसलीम अहमद को पता था कि बसपा में दलितों की सुनी जाएगी। चुनाव के ऐनवक्त उनका टिकट काट दिया जाएगा। दलित तेजी के साथ लामंबदी करके तसलीम अहमद का टिकट कटवाने की मांग कर रहे थे। उन्होंने पहले से ही बसपा का दामन छोड़ने का फैसला कर लिया था। बसपा के एक कद्दावर नेता को तसलीम अहमद ने बता दिया था कि जिस तरह से दलित उन पर गलत काम कराने का दबाव बना रहे हैं, ऐसे में काम चलने वाला नहीं है। तसलीम अहमद ने अंदरखाने सपा में गोटियां बिछानी शुरू कर दी। सपा के बड़े नेताओं से तसलीम अहमद के पहने से ही पुराने रिश्ते हैं। सपा नेताओं से बात पक्की होने पर राज्यसभा चुनाव में तसलीम अहमद ने क्रास वोटिंग करना तय कर लिया था। सूत्रों के मुताबिक सपा के नेताओं के साथ बैठकर तसलीम अहमद की भावी राजनीति की पटकथा भी तैयार कर ली गई थी। इस बार विधानसभा चुनाव में क्षेत्र में पार्टी की जीत के लिए रणनीति बनाने के लिए विधायक का अहम रोल रहेगा।
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‘बसपा में घुटन महसूस कर रहा था’
बिजनौर में विधायक तसलीम अहमद ने कहा कि वह बसपा में रहकर घुटन महसूस कर रहे थे। बसपा में रहकर अपने लोगों की मदद नहीं कर सकते थे। किसी से बात भी नहीं कर सकते थे। इन सब बातों पर पाबंदी थी। बसपा मेें पैसा लेकर प्रत्याशियों का उत्पीड़न किया जा रहा है। विधायक का आरोप है कि तीन से चार करोड़ रुपये देने के बाद भी प्रत्याशी उत्पीड़न झेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सपा में सम्मान दिया जाता है। उन्होंने कहा कि एमएलसी व राज्यसभा के चुनाव में दोनों में अगर वह सपा को वोट देते, तो मोटा पैसा लेकर वोट देने का उन पर आरोप लगता। इसलिए उन्होंने एक वोट बसपा व एक सपा को दिया। सपा में उनके आने से गुटबंदी भी नहीं रहेगी। वैसे भी वह जन्मजात सपाई ही है।
साइकिल पर सवार होंगे विधायक
विधायक तसलीम अहमद की अपने पुराने घर सपा में वापसी करीब तय हो गई है। तसलीम अहमद वर्ष 1998 में सपा के जिलाध्यक्ष बने । वर्ष 2002 से 2010 तक तसलीम अहमद सपा से नजीबाबाद नगर पालिका के चेयरमैन रहे। वर्ष 2002 में सपा का जिलाध्यक्ष व नजीबाबाद का चेयरमैन बने रहते तसलीम अहमद ने बिजनौर विधानसभा सीट से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। यह चुनाव तसलीम अहमद हार गए थे। इसके बाद वह 2012 के चुनाव में नजीबाबाद से बसपा के टिकट पर विधानसभा का चुनाव जीते थे। तसलीम अहमद के मुताबिक उनकी सपा में घर वापसी हो गई है। बस एक दो दिन में घोषणा होनी बाकी है।
सपा में खत्म हो जाएगी रार
विधायक तसलीम अहमद अगला विधानसभा चुनाव सपा के टिकट पर नजीबाबाद से लड़ेंगे। सपा ने नजीबाबाद विधानसभा सीट से पूर्व ब्लॉक प्रमुख अबरार आलम को प्रत्याशी बनाया था। अबरार को प्रत्याशी बनाने पर सपा के नेताओं में सियासी तलवारें खींची थी। विधायक रुचिवीरा का खेमा अबरार आलम का टिकट कटवाने में लगा था। रुचि वीरा पूर्व जिलाध्यक्ष जमील अहमद अंसारी या नगीना नगर पालिका के चेयरमैन खलीलुर्रहमान को नजीबाबाद से सपा का टिकट दिलाना चाहती थी। रुचिवीरा का विरोधी खेमा अबरार आलम के टिकट की पैरवी में लगा था। दोनों खेमों में सियासी तलवार खींची थी। तसलीम अहमद के सपा में आने से सपा के दो गुटों की यह रार भी खत्म हो जाएगी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक तसलीम अहमद नजीबाबाद से सपा के टिकट पर अगला विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे। हाईकमान ने तसलीम अहमद को इसकी हरी झंडी भी दे दी है। वहीं विधायक तसलीम अहमद ने बसपा नेताओं के पैसा लेकर सपा को वोट देने के आरोप को निराधार बताया है। तसलीम ने कहा कि मान सम्मान की राजनीति की है। 31 साल के राजनीतिक जीवन में कोई पैसे लेने का उनके दामन पर दाग नहीं लगा सकता।
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नजीबाबाद से बसपा विधायक हाजी तसलीम अहमद ने राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव में पाला बदलकर सपा के पक्ष में वोटिंग किया। विधायक के इस निर्णय से पार्टी नेताओं में एकाएक खलबली मच गई। रविवार को पार्टी आलाकमान के निर्देश पर तसलीम अहमद को बसपा से निष्कासित कर दिया गया है। बसपा के जिलाध्यक्ष राजेंद्र सिंह ने विधायक को पार्टी से निष्कासित किए जाने की पुष्टि की गई है। बसपा विधायक पर गाज गिरने से जिले की राजनीति गरमा गई है। तसलीम अहमद ने वर्ष 2011 में सपा को छोड़कर बसपा का दामन थामा था। 2012 के चुनाव में वह नजीबाबाद से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़कर विधायक बने थे। बसपा के नेता तसलीम अहमद पर विधान परिषद व राज्यसभा के चुनाव में सपा को वोट देने का आरोप लगा रहे हैं। विधायक तसलीम अहमद ने कहा कि विधान परिषद का वोट तो बसपा को दिया। राज्यसभा का वोट खुलेआम सपा को दिया है। विधान परिषद का वोट बसपा को देने का उनके पास सबूत भी है।
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पहले ही बसपा से नाता तोड़ने का बना लिया था मन
बिजनौर में नजीबाबाद के विधायक तसलीम अहमद पर पहले से ही बसपा से बाहर का रास्ता दिखाने की तलवार लटकी थी। इलाके के दलित तसलीम अहमद का खुलकर विरोध कर रहे थे। राजनीति किस करवट जा रही है इसे भांपने में माहिर तसलीम अहमद ने बसपा से नाता तोड़ने का पहल ही मन बना लिया था। इसके लिए उन्होंने राज्यसभा व विधान परिषद चुनाव का रास्ता चुना। पाला बदलने के खेल में वह जरा नहीं चूके। विधायक तसलीम अहमद जिले की राजनीति के मंजे हुए खिलाड़ी हैं। राजनीति में कब क्या निर्णय लेना है इसे वह भलीभांति जानते हैं। बसपा में अंदरखाने सुलग रहीं आग से तसलीम अहमद अच्छी तरह वाकिफ थे। नजीबाबाद विधान सभा क्षेत्र के दलित मामूली बातों को लेकर तसलीम अहमद का विरोध कर रहे थे। तसलीम अहमद को पता था कि बसपा में दलितों की सुनी जाएगी। चुनाव के ऐनवक्त उनका टिकट काट दिया जाएगा। दलित तेजी के साथ लामंबदी करके तसलीम अहमद का टिकट कटवाने की मांग कर रहे थे। उन्होंने पहले से ही बसपा का दामन छोड़ने का फैसला कर लिया था। बसपा के एक कद्दावर नेता को तसलीम अहमद ने बता दिया था कि जिस तरह से दलित उन पर गलत काम कराने का दबाव बना रहे हैं, ऐसे में काम चलने वाला नहीं है। तसलीम अहमद ने अंदरखाने सपा में गोटियां बिछानी शुरू कर दी। सपा के बड़े नेताओं से तसलीम अहमद के पहने से ही पुराने रिश्ते हैं। सपा नेताओं से बात पक्की होने पर राज्यसभा चुनाव में तसलीम अहमद ने क्रास वोटिंग करना तय कर लिया था। सूत्रों के मुताबिक सपा के नेताओं के साथ बैठकर तसलीम अहमद की भावी राजनीति की पटकथा भी तैयार कर ली गई थी। इस बार विधानसभा चुनाव में क्षेत्र में पार्टी की जीत के लिए रणनीति बनाने के लिए विधायक का अहम रोल रहेगा।
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‘बसपा में घुटन महसूस कर रहा था’
बिजनौर में विधायक तसलीम अहमद ने कहा कि वह बसपा में रहकर घुटन महसूस कर रहे थे। बसपा में रहकर अपने लोगों की मदद नहीं कर सकते थे। किसी से बात भी नहीं कर सकते थे। इन सब बातों पर पाबंदी थी। बसपा मेें पैसा लेकर प्रत्याशियों का उत्पीड़न किया जा रहा है। विधायक का आरोप है कि तीन से चार करोड़ रुपये देने के बाद भी प्रत्याशी उत्पीड़न झेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सपा में सम्मान दिया जाता है। उन्होंने कहा कि एमएलसी व राज्यसभा के चुनाव में दोनों में अगर वह सपा को वोट देते, तो मोटा पैसा लेकर वोट देने का उन पर आरोप लगता। इसलिए उन्होंने एक वोट बसपा व एक सपा को दिया। सपा में उनके आने से गुटबंदी भी नहीं रहेगी। वैसे भी वह जन्मजात सपाई ही है।
साइकिल पर सवार होंगे विधायक
विधायक तसलीम अहमद की अपने पुराने घर सपा में वापसी करीब तय हो गई है। तसलीम अहमद वर्ष 1998 में सपा के जिलाध्यक्ष बने । वर्ष 2002 से 2010 तक तसलीम अहमद सपा से नजीबाबाद नगर पालिका के चेयरमैन रहे। वर्ष 2002 में सपा का जिलाध्यक्ष व नजीबाबाद का चेयरमैन बने रहते तसलीम अहमद ने बिजनौर विधानसभा सीट से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। यह चुनाव तसलीम अहमद हार गए थे। इसके बाद वह 2012 के चुनाव में नजीबाबाद से बसपा के टिकट पर विधानसभा का चुनाव जीते थे। तसलीम अहमद के मुताबिक उनकी सपा में घर वापसी हो गई है। बस एक दो दिन में घोषणा होनी बाकी है।
सपा में खत्म हो जाएगी रार
विधायक तसलीम अहमद अगला विधानसभा चुनाव सपा के टिकट पर नजीबाबाद से लड़ेंगे। सपा ने नजीबाबाद विधानसभा सीट से पूर्व ब्लॉक प्रमुख अबरार आलम को प्रत्याशी बनाया था। अबरार को प्रत्याशी बनाने पर सपा के नेताओं में सियासी तलवारें खींची थी। विधायक रुचिवीरा का खेमा अबरार आलम का टिकट कटवाने में लगा था। रुचि वीरा पूर्व जिलाध्यक्ष जमील अहमद अंसारी या नगीना नगर पालिका के चेयरमैन खलीलुर्रहमान को नजीबाबाद से सपा का टिकट दिलाना चाहती थी। रुचिवीरा का विरोधी खेमा अबरार आलम के टिकट की पैरवी में लगा था। दोनों खेमों में सियासी तलवार खींची थी। तसलीम अहमद के सपा में आने से सपा के दो गुटों की यह रार भी खत्म हो जाएगी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक तसलीम अहमद नजीबाबाद से सपा के टिकट पर अगला विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे। हाईकमान ने तसलीम अहमद को इसकी हरी झंडी भी दे दी है। वहीं विधायक तसलीम अहमद ने बसपा नेताओं के पैसा लेकर सपा को वोट देने के आरोप को निराधार बताया है। तसलीम ने कहा कि मान सम्मान की राजनीति की है। 31 साल के राजनीतिक जीवन में कोई पैसे लेने का उनके दामन पर दाग नहीं लगा सकता।