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दो चीनी मिलों के जीएम हिरासत में लिए
Tue, 15 Jan 2019 11:38 PM IST
Deepak Sharma
अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
Published by: Deepak Sharma
Updated Tue, 15 Jan 2019 11:38 PM IST
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मिल अधिकारी व प्रशासन से वार्ता करते सरदार वीएम सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में पिछले साल का बकाया गन्ना भुगतान न दिए जाने से राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन की महापंचायत में सरदार वीएम सिंह के सामने पुलिस ने वेव ग्रुप की बिजनौर चीनी मिल के जीएम को हिरासत में ले लिया। ग्रुप की चांदपुर चीनी मिल के जीएम ने किसानों के बीच ही इस्तीफा देने का एलान कर दिया, लेकिन किसानों ने उन्हें भी पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। बाद में समझौता होने पर दोनों को छोड़ा गया। मिल अधिकारियों के द्वारा 25 जनवरी तक बकाया भुगतान के आश्वासन पर किसान शांत हुए।
बिजनौर चीनी मिल पर पिछले साल के पेराई सत्र का 25.63 तथा चांदपुर मिल पर 35.63 करोड़ रुपया बकाया है। मंगलवार को सरदार वीएम सिंह के नेतृत्व में कलक्ट्रेट में किसानों की महापंचायत बुलाई गई थी। करीब साढ़े तीन बजे एडीएम प्रशासन विनोद कुमार गौड़, एसडीएम बृजेश कुमार, जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह मिल अफसरों के साथ पहुंचे। बिजनौर मिल के जीएम इसरार अहमद ने किसानों को बताया कि उन्हेें शासन से सॉफ्ट लोन नहीं मिला है। लोन के लिए हाईकोर्ट में केस किया है। कोर्ट से मंजूरी मिलते ही भुगतान कर दिया जाएगा।
बताया कि इस साल का थोड़ा भुगतान किया गया है, इस पर किसान भड़क गए। किसानों ने प्रशासनिक व मिल अफसरों को जमकर खरीखोटी सुनाई। किसानों ने बिना भुगतान के पंचायत खत्म करने से इंकार कर दिया। उन्होंने मिल अधिकारियों व मालिकों की गिरफ्तारी की मांग की। इस पर प्रशासन ने तुरंत बिजनौर चीनी मिल के जीएम इसरार अहमद को हिरासत में ले लिया और थाने ले गए।
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वहीं चांदपुर चीनी मिल के जीएम तेजवीर सिंह ढाका ने किसानों के बीच ही इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। लेकिन किसान नहीं माने। उन्होंने चांदपुर चीनी मिल के जीएम को भी पकड़कर सीओ सिटी महेश कुमार को हवाले कर दिया। सीओ ने जीएम को हिरासत में लेकर अपने साथ थाने ले गए। इसके बाद भी किसान कलक्ट्रेट में हंगामा करते रहे। बाद में मिल अधिकारियों द्वारा 25 जनवरी तक पिछले साल के समस्त भुगतान का आश्वासन मिलने पर किसान शांत हुए और सात दिन से चल रहा किसानों का धरना समाप्त हुआ। सीओ सिटी महेश कुमार के अनुसार भुगतान के आश्वासन के बाद दोनों जीएम को छोड़ने के लिए किसान सहमत हो गए।
कर्ज माफी की नहीं, कर्ज मुक्ति की बात होनी चाहिए: वीएम सिंह
बिजनौर में राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार वीएम सिंह ने महापंचायत में कहा कि कृषि प्रधान देश में किसान आत्महत्या करने को मजबूर है। कहा कि बजाज, चड्ढ़ा, बलरामपुर और धामपुर ग्रुप ने अपना कारोबार कितना बढ़ा लिया, लेकिन किसान कर्ज में डूबता जा रहा है। अब किसान के अपने हाथ में कमान लेने का वक्त आ गया है। कहा कि अब किसान की कर्ज माफी की नहीं बल्कि कर्ज मुक्ति की बात होनी चाहिए। उन्होंने महापंचायत में देर से पहुंचे प्रशासनिक व मिल अफसरों को जमकर हड़काया।
कलक्ट्रेट में हुई महापंचायत में सरदार वीएम सिंह ने कहा कि खेती अब घाटे का सौदा हो गई है। देश को रोटी देने वाला किसान भुगतान के लिए कलक्ट्रेट में भूखा बैठा है। किसानों के बच्चों की फीस तक भरी नहीं जा रही है। किसान का बेटा खुद खेती नहीं कर रहा। किसानों को जब तक गन्ने का भुगतान मिलता है तब तक उसकी आधी रकम तो ब्याज में ही चली जाती है।
कहा कि सरकार कर्मचारियों को महंगाई भत्ता देती है। इन पर कर्मचारियों का पुराना बकाया भी दिया जाता है, लेकिन किसानों के लिए स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को 11 साल बाद भी लागू नहीं किया गया है। कहा कि अब किसान की कर्ज माफी की नहीं बल्कि कर्ज मुक्ति की बात होनी चाहिए। कहा कि किसानों के परिवारों में जन्मे कर्मचारी और अधिकारी लापरवाह हो चुके हैं। वे भूल गए हैं कि अगर वे नौकरी पर न होते तो किसानों के बीच ही धरने पर बैठे होते। कहा कि संगठन मजबूत करने वालों की ही पूछ होती है। आज पूरे देश में किसानों और नौजवानों की बात हो रही है। किसान को अपना अधिकार छीनने के लिए और ताकतवर होना होगा। जिलाध्यक्ष विनोद कुमार ने कहा कि अब किसान अपना हक लेने के लिए गिड़गिड़ाएगा नहीं। गन्ना भुगतान के लिए अब किसान आरपार की लड़ाई लड़ेगा। जो भी किसान का शोषण करेगा, किसान उसे सबक सिखाएंगे। अध्यक्षता महाराज सिंह व संचालन वेदप्रकाश ने किया। इस दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश महासचिव कैलाश लांबा, अंकुर चौधरी, महीपाल सिंह, अचल शर्मा, राजपाल भगत, हरि सिंह चौहान आदि मौजूद रहे।
अफसरों को सुनाई खरीखोटी
प्रशासन ने वार्ता के लिए तीन बजे का समय दिया था, लेकिन मिल व प्रशासनिक अधिकारी साढ़े तीन बजे आए। इस पर सरदार वीएम सिंह ने उन्हें बहुत हड़काया। कहा कि देशवासियों के अन्नदाताओं से मिलने के लिए भी अफसरों के पास समय नहीं है।
आश्वासन पर खोले किसानों ने ताले
चांदपुर में भाकियू का बकाया गन्ना भुगतान को लेकर तहसील परिसर में चल रहा धरना 14वें दिन भी जारी रहा। मंगलवार को एडीएम प्रशासन व एसडीएम के समझाने व आश्वासन पर किसानों ने तहसील गेट पर लगे ताले खोल दिए। एडीएम प्रशासन विनोद कुमार व एसडीएम आलोक यादव के 20 जनवरी तक भुगतान कराए जाने के आश्वासन पर किसानों ने तहसील गेट पर लगे तोले खोल दिए। एडीएम ने बताया कि वर्तमान सत्र का सात करोड़ चांदपुर चीनी मिल व चार करोड़ बिजनौर चीनी मिल का 12 जनवरी को तथा 15 जनवरी को छह करोड़ का चांदपुर चीनी मिल तथा पांच करोड़ रुपये बिजनौर चीनी मिल का भुगतान गन्ना समिति को भेजा गया है। मिल मालिकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की कार्रवाई की जा रही है। जिला महासचिव कुलदीप सिंह ने कहा कि यदि 20 जनवरी तक किसानों का गन्ना मूल्य भुगतान नहीं होता है तो 21 जनवरी को पांचों तहसील में तालाबंदी कर दी जाएगी।
किसानों ने 14 दिन के अंदर मांगा गन्ना भुगतान
नगीना। भाकियू की मासिक पंचायत में क्षेत्र के किसानों की विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की गई। पंचायत में गन्ना भुगतान नियमानुसार 14 दिन के भीतर किए जाने की मांग की गई। गन्ना समिति परिसर में संपन्न हुई मासिक पंचायत में गन्ना भुगतान किए जाने, विद्युत आपूर्ति सुचारु किए जाने, तहसील में व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त करने, क्षेत्र की सड़कों और लिंक मार्गों को गड्ढा मुक्त करने की मांग की गई। किसानों ने कहा कि गन्ना भुगतान समिति को भेजने के बजाए किसानों के खाते में जाना चाहिए। पंचायत को डॉ. देवेंद्र सिंह, रामभजन सिंह, भूदेव सिंह, महेंद्र सिंह, विजयपाल सिंह, मोहम्मद यामीन, विजेंद्र सिंह, मदन पाल, शिवा सिंह, रामरतन सिंह, मूला सिंह, मुरारी सिंह, अंकित, सुनील, वकील अहमद आदि ने संबोधित किया। पंचायत की अध्यक्षता डॉ. देवेंद्र सिंह, संचालन चौधरी बलजीत सिंह ने किया।
हबीबवाला, नहटौर में हो रही घटतौली
धामपुर में गन्ना समिति के संचालकों, किसानों का आरोप है कि हबीबवाला, नहटौर जोन के अधिकांश गन्ना क्रय केंद्रों पर सेंटरों पर तैनात बाबू जमकर घटतौली कर नुकसान पहुंचा रहे हैं। शिकायत के बाद भी कोई प्रशासनिक अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि घटतौली करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन किया जाएगा। समिति के संचालक ओमपाल सिंह, किसान गजेंद्र सिंह, मलखान सिंह, कुशलपाल सिंह, गिरधारी, भजन सिंह का कहना है कि इन दोनों गन्ना जोनों में लगे सेंटरों पर तैनात बाबू जमकर घटतौली कर रहे हैं। वह कई बार सहायक चीनी आयुक्त, एससीडीआई, समिति सचिव, एसडीएम से शिकायत कर चुके हैं। लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है। किसानों ने डीएम से औचक निरीक्षण कराकर किसानों को होने वाले नुकसान से राहत दिलाने और आरोपियों पर कार्रवाई करने की मांग की है। एसडीएम कुंवर वीरेंद्र कुमार मौर्य का कहना है कि ऐसा कोई मामला उनके संज्ञान में नहीं लाया गया है।
किसानों ने दिया धरना
चांदपुर में अखिल भारतीय किसान सभा कार्यकर्ताओं ने किसानों की समस्याओं को लेकर तहसील पर धरना- प्रदर्शन किया। साथ ही इस दौरान मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन एसडीएम को सौंपा।
मंगलवार को धरने पर बैठे कार्यकर्ताओं ने कहा कि देश प्रदेश के किसानों की आर्थिक स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। गन्ना सत्र 2018-19 के दामों में बढ़ोत्तरी न करना सरकार की जन विरोधी नीति को उजागर करता है। उत्पादन लागत बढ़ती जा रही है, जिससे किसान के लिए खेती करना घाटे के सौदा हो गया है। कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम आलोक यादव को सौंपा। ज्ञापन में स्वामी नाथन आयोग की रिपोर्ट लागू कर फसल का डेढ़ गुना दाम दिए जाने, सभी किसानों का कर्जा माफ करने, किसानों की आयु 60 वर्ष होने पर पांच हजार रुपये प्रति मासिक पेंशन देने, गन्ना भुगतान नियम अनुसार 14 दिन में करने, गन्ना मैली को टोकन आधार पर किसान को उपलब्ध कराने, चांदपुर हल्दौर रोड को प्रधानमंत्री सड़क योजना से हटाकर सार्वजनिक निर्माण विभाग को देकर चौड़ीकरण कराने, आलू उत्पादकों के हित में 1200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से सरकारी खरीदारी करने, विद्युत विभाग द्वारा देहात की जर्जर जर्जर विद्युत लाइनों को बदलने आदि की मांग की है। अमर सिंह सैनी, तेजपाल सिंह, शिवकुमार, चौधरी ऋषिपाल सिंह, हरज्ञान सिंह, बदरूल हसन, छोटे सिंह, पूरन सिंह आदि रहे।
किसान मोर्चा ने उठाईं समस्याएं
नजीबाबाद में भाजपा किसान मोर्चा ने किसानों का गन्ना भुगतान 14 दिनों के अंदर करने, गन्ना पर्ची से वैद्यता समाप्त करने तथा पर्ची डिस्ट्रीब्यूटर की संख्या बढ़ाने सहित कई समस्याएं गन्ना समिति के समक्ष उठाईं। भाजपा किसान मोर्चा के विधानसभा प्रभारी मास्टर रमेश सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधियों का मंडल गन्ना समिति नजीबाबाद पहुंचा। प्रतिनिधियों ने समिति सचिव के समक्ष किसानों की समस्याओं को उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा के अनुरूप किसानों को गन्ना पर्ची समय से व्यवस्था कराने, पर्ची डिस्ट्रीब्यूटर की व्यवस्था करने, 96 घंटे तक पर्ची की वैद्यता समाप्त करने, तथा गन्ना मूल्य भुगतान निर्धारित 14 दिनो में कराने की व्यवस्था कराने की मांग की। गन्ना विकास परिषद के चेयरमैन देवेंद्र सिंह, चौधरी ईशम सिंह, रविंद्र सिंह, दिनेश सिंह, नरेंद्र सिंह, रितेश सैन, राजवीर सिंह, सुमित गुर्जर शामिल रहे।
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बिजनौर चीनी मिल पर पिछले साल के पेराई सत्र का 25.63 तथा चांदपुर मिल पर 35.63 करोड़ रुपया बकाया है। मंगलवार को सरदार वीएम सिंह के नेतृत्व में कलक्ट्रेट में किसानों की महापंचायत बुलाई गई थी। करीब साढ़े तीन बजे एडीएम प्रशासन विनोद कुमार गौड़, एसडीएम बृजेश कुमार, जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह मिल अफसरों के साथ पहुंचे। बिजनौर मिल के जीएम इसरार अहमद ने किसानों को बताया कि उन्हेें शासन से सॉफ्ट लोन नहीं मिला है। लोन के लिए हाईकोर्ट में केस किया है। कोर्ट से मंजूरी मिलते ही भुगतान कर दिया जाएगा।
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बताया कि इस साल का थोड़ा भुगतान किया गया है, इस पर किसान भड़क गए। किसानों ने प्रशासनिक व मिल अफसरों को जमकर खरीखोटी सुनाई। किसानों ने बिना भुगतान के पंचायत खत्म करने से इंकार कर दिया। उन्होंने मिल अधिकारियों व मालिकों की गिरफ्तारी की मांग की। इस पर प्रशासन ने तुरंत बिजनौर चीनी मिल के जीएम इसरार अहमद को हिरासत में ले लिया और थाने ले गए।
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वहीं चांदपुर चीनी मिल के जीएम तेजवीर सिंह ढाका ने किसानों के बीच ही इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। लेकिन किसान नहीं माने। उन्होंने चांदपुर चीनी मिल के जीएम को भी पकड़कर सीओ सिटी महेश कुमार को हवाले कर दिया। सीओ ने जीएम को हिरासत में लेकर अपने साथ थाने ले गए। इसके बाद भी किसान कलक्ट्रेट में हंगामा करते रहे। बाद में मिल अधिकारियों द्वारा 25 जनवरी तक पिछले साल के समस्त भुगतान का आश्वासन मिलने पर किसान शांत हुए और सात दिन से चल रहा किसानों का धरना समाप्त हुआ। सीओ सिटी महेश कुमार के अनुसार भुगतान के आश्वासन के बाद दोनों जीएम को छोड़ने के लिए किसान सहमत हो गए।
कर्ज माफी की नहीं, कर्ज मुक्ति की बात होनी चाहिए: वीएम सिंह
बिजनौर में राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार वीएम सिंह ने महापंचायत में कहा कि कृषि प्रधान देश में किसान आत्महत्या करने को मजबूर है। कहा कि बजाज, चड्ढ़ा, बलरामपुर और धामपुर ग्रुप ने अपना कारोबार कितना बढ़ा लिया, लेकिन किसान कर्ज में डूबता जा रहा है। अब किसान के अपने हाथ में कमान लेने का वक्त आ गया है। कहा कि अब किसान की कर्ज माफी की नहीं बल्कि कर्ज मुक्ति की बात होनी चाहिए। उन्होंने महापंचायत में देर से पहुंचे प्रशासनिक व मिल अफसरों को जमकर हड़काया।
कलक्ट्रेट में हुई महापंचायत में सरदार वीएम सिंह ने कहा कि खेती अब घाटे का सौदा हो गई है। देश को रोटी देने वाला किसान भुगतान के लिए कलक्ट्रेट में भूखा बैठा है। किसानों के बच्चों की फीस तक भरी नहीं जा रही है। किसान का बेटा खुद खेती नहीं कर रहा। किसानों को जब तक गन्ने का भुगतान मिलता है तब तक उसकी आधी रकम तो ब्याज में ही चली जाती है।
कहा कि सरकार कर्मचारियों को महंगाई भत्ता देती है। इन पर कर्मचारियों का पुराना बकाया भी दिया जाता है, लेकिन किसानों के लिए स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को 11 साल बाद भी लागू नहीं किया गया है। कहा कि अब किसान की कर्ज माफी की नहीं बल्कि कर्ज मुक्ति की बात होनी चाहिए। कहा कि किसानों के परिवारों में जन्मे कर्मचारी और अधिकारी लापरवाह हो चुके हैं। वे भूल गए हैं कि अगर वे नौकरी पर न होते तो किसानों के बीच ही धरने पर बैठे होते। कहा कि संगठन मजबूत करने वालों की ही पूछ होती है। आज पूरे देश में किसानों और नौजवानों की बात हो रही है। किसान को अपना अधिकार छीनने के लिए और ताकतवर होना होगा। जिलाध्यक्ष विनोद कुमार ने कहा कि अब किसान अपना हक लेने के लिए गिड़गिड़ाएगा नहीं। गन्ना भुगतान के लिए अब किसान आरपार की लड़ाई लड़ेगा। जो भी किसान का शोषण करेगा, किसान उसे सबक सिखाएंगे। अध्यक्षता महाराज सिंह व संचालन वेदप्रकाश ने किया। इस दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश महासचिव कैलाश लांबा, अंकुर चौधरी, महीपाल सिंह, अचल शर्मा, राजपाल भगत, हरि सिंह चौहान आदि मौजूद रहे।
अफसरों को सुनाई खरीखोटी
प्रशासन ने वार्ता के लिए तीन बजे का समय दिया था, लेकिन मिल व प्रशासनिक अधिकारी साढ़े तीन बजे आए। इस पर सरदार वीएम सिंह ने उन्हें बहुत हड़काया। कहा कि देशवासियों के अन्नदाताओं से मिलने के लिए भी अफसरों के पास समय नहीं है।
आश्वासन पर खोले किसानों ने ताले
चांदपुर में भाकियू का बकाया गन्ना भुगतान को लेकर तहसील परिसर में चल रहा धरना 14वें दिन भी जारी रहा। मंगलवार को एडीएम प्रशासन व एसडीएम के समझाने व आश्वासन पर किसानों ने तहसील गेट पर लगे ताले खोल दिए। एडीएम प्रशासन विनोद कुमार व एसडीएम आलोक यादव के 20 जनवरी तक भुगतान कराए जाने के आश्वासन पर किसानों ने तहसील गेट पर लगे तोले खोल दिए। एडीएम ने बताया कि वर्तमान सत्र का सात करोड़ चांदपुर चीनी मिल व चार करोड़ बिजनौर चीनी मिल का 12 जनवरी को तथा 15 जनवरी को छह करोड़ का चांदपुर चीनी मिल तथा पांच करोड़ रुपये बिजनौर चीनी मिल का भुगतान गन्ना समिति को भेजा गया है। मिल मालिकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की कार्रवाई की जा रही है। जिला महासचिव कुलदीप सिंह ने कहा कि यदि 20 जनवरी तक किसानों का गन्ना मूल्य भुगतान नहीं होता है तो 21 जनवरी को पांचों तहसील में तालाबंदी कर दी जाएगी।
किसानों ने 14 दिन के अंदर मांगा गन्ना भुगतान
नगीना। भाकियू की मासिक पंचायत में क्षेत्र के किसानों की विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की गई। पंचायत में गन्ना भुगतान नियमानुसार 14 दिन के भीतर किए जाने की मांग की गई। गन्ना समिति परिसर में संपन्न हुई मासिक पंचायत में गन्ना भुगतान किए जाने, विद्युत आपूर्ति सुचारु किए जाने, तहसील में व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त करने, क्षेत्र की सड़कों और लिंक मार्गों को गड्ढा मुक्त करने की मांग की गई। किसानों ने कहा कि गन्ना भुगतान समिति को भेजने के बजाए किसानों के खाते में जाना चाहिए। पंचायत को डॉ. देवेंद्र सिंह, रामभजन सिंह, भूदेव सिंह, महेंद्र सिंह, विजयपाल सिंह, मोहम्मद यामीन, विजेंद्र सिंह, मदन पाल, शिवा सिंह, रामरतन सिंह, मूला सिंह, मुरारी सिंह, अंकित, सुनील, वकील अहमद आदि ने संबोधित किया। पंचायत की अध्यक्षता डॉ. देवेंद्र सिंह, संचालन चौधरी बलजीत सिंह ने किया।
हबीबवाला, नहटौर में हो रही घटतौली
धामपुर में गन्ना समिति के संचालकों, किसानों का आरोप है कि हबीबवाला, नहटौर जोन के अधिकांश गन्ना क्रय केंद्रों पर सेंटरों पर तैनात बाबू जमकर घटतौली कर नुकसान पहुंचा रहे हैं। शिकायत के बाद भी कोई प्रशासनिक अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि घटतौली करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन किया जाएगा। समिति के संचालक ओमपाल सिंह, किसान गजेंद्र सिंह, मलखान सिंह, कुशलपाल सिंह, गिरधारी, भजन सिंह का कहना है कि इन दोनों गन्ना जोनों में लगे सेंटरों पर तैनात बाबू जमकर घटतौली कर रहे हैं। वह कई बार सहायक चीनी आयुक्त, एससीडीआई, समिति सचिव, एसडीएम से शिकायत कर चुके हैं। लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है। किसानों ने डीएम से औचक निरीक्षण कराकर किसानों को होने वाले नुकसान से राहत दिलाने और आरोपियों पर कार्रवाई करने की मांग की है। एसडीएम कुंवर वीरेंद्र कुमार मौर्य का कहना है कि ऐसा कोई मामला उनके संज्ञान में नहीं लाया गया है।
किसानों ने दिया धरना
चांदपुर में अखिल भारतीय किसान सभा कार्यकर्ताओं ने किसानों की समस्याओं को लेकर तहसील पर धरना- प्रदर्शन किया। साथ ही इस दौरान मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन एसडीएम को सौंपा।
मंगलवार को धरने पर बैठे कार्यकर्ताओं ने कहा कि देश प्रदेश के किसानों की आर्थिक स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। गन्ना सत्र 2018-19 के दामों में बढ़ोत्तरी न करना सरकार की जन विरोधी नीति को उजागर करता है। उत्पादन लागत बढ़ती जा रही है, जिससे किसान के लिए खेती करना घाटे के सौदा हो गया है। कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम आलोक यादव को सौंपा। ज्ञापन में स्वामी नाथन आयोग की रिपोर्ट लागू कर फसल का डेढ़ गुना दाम दिए जाने, सभी किसानों का कर्जा माफ करने, किसानों की आयु 60 वर्ष होने पर पांच हजार रुपये प्रति मासिक पेंशन देने, गन्ना भुगतान नियम अनुसार 14 दिन में करने, गन्ना मैली को टोकन आधार पर किसान को उपलब्ध कराने, चांदपुर हल्दौर रोड को प्रधानमंत्री सड़क योजना से हटाकर सार्वजनिक निर्माण विभाग को देकर चौड़ीकरण कराने, आलू उत्पादकों के हित में 1200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से सरकारी खरीदारी करने, विद्युत विभाग द्वारा देहात की जर्जर जर्जर विद्युत लाइनों को बदलने आदि की मांग की है। अमर सिंह सैनी, तेजपाल सिंह, शिवकुमार, चौधरी ऋषिपाल सिंह, हरज्ञान सिंह, बदरूल हसन, छोटे सिंह, पूरन सिंह आदि रहे।
किसान मोर्चा ने उठाईं समस्याएं
नजीबाबाद में भाजपा किसान मोर्चा ने किसानों का गन्ना भुगतान 14 दिनों के अंदर करने, गन्ना पर्ची से वैद्यता समाप्त करने तथा पर्ची डिस्ट्रीब्यूटर की संख्या बढ़ाने सहित कई समस्याएं गन्ना समिति के समक्ष उठाईं। भाजपा किसान मोर्चा के विधानसभा प्रभारी मास्टर रमेश सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधियों का मंडल गन्ना समिति नजीबाबाद पहुंचा। प्रतिनिधियों ने समिति सचिव के समक्ष किसानों की समस्याओं को उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा के अनुरूप किसानों को गन्ना पर्ची समय से व्यवस्था कराने, पर्ची डिस्ट्रीब्यूटर की व्यवस्था करने, 96 घंटे तक पर्ची की वैद्यता समाप्त करने, तथा गन्ना मूल्य भुगतान निर्धारित 14 दिनो में कराने की व्यवस्था कराने की मांग की। गन्ना विकास परिषद के चेयरमैन देवेंद्र सिंह, चौधरी ईशम सिंह, रविंद्र सिंह, दिनेश सिंह, नरेंद्र सिंह, रितेश सैन, राजवीर सिंह, सुमित गुर्जर शामिल रहे।