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खादर को जल्द मिल सकता है तटबंध का तोहफा
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मंडावर के खादर क्षेत्र में कटान करती गंगा। (फाइल फोटा)
- फोटो : BIJNOR
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खादर को जल्द मिल सकता है तटबंध का तोहफा
बिजनौर। गंगा के कटान से निजात दिलाने के लिए तटबंध का किसानों को दीपावली पर तोहफा मिल सकता है। इस फाइल को मुख्यमंत्री के सामने अक्तूबर के आखिर या नवंबर की शुरूआत में रखा जाएगा। पिछले साल भी इस फाइल को मंजूरी नहीं मिली थी। किसानों के आंदोलन को देखते इस बार प्रशासन तटबंध बनाने की योजना को मंजूरी दे सकता है। इस कार्य के होने से गंगा किनारे बसे 28 गांवों को कटान से निजात मिल जाएगी।
गंगा के कटान से खादर क्षेत्र बसे गांव वाले परेशान हैं। बालावाली से रावली तक गंगा किनारे 28 गांव बसे हैं। गांव वालों का दावा है कि गंगा के कटान से उनकी करीब दो लाख बीघा जमीन बह चुकी है। इस जमीन का आज तक कोई मुआवजा भी नहीं मिला है। गंगा किनारे कटान निरोधी कार्य कराने के लिए गंगा इन गांव वालों ने एक महीने से ज्यादा समय तक आंदोलन भी किया था। किसानों ने परिवार की महिलाओं व बच्चों सहित गंगा की धारा में खड़े होकर धरना दिया था। उनका कहना है कि गंगा की धारा पांच किलोमीटर चौड़ी हो गई है। वे धारा के बीच में खाली जमीन पर खेती कर रहे हैं।
किसानों का कहना है कि जमीन के लिए उनका दूसरे जिले के किसानों से विवाद भी रहने लगा है। गंगा के कटान से निजात दिलाने को कटान निरोधी कार्य की परियोजना काफी पहले बन चुकी है। परियोजना में 61 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। परियोजना को उत्तर प्रदेश बाढ़ राज्य नियंत्रण परिषद की तीन समितियों से मंजूरी मिल चुकी है। यह फाइल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय में पिछले साल नवंबर में रखी जा चुकी थी। किसानों के आंदोलन के बाद इस प्रस्तावों को मंजूरी दिलाने के लिए प्रशासन स्तर से भी शासन को पत्र लिखा गया था। इस महीने अंत या नवंबर की शुरूआत में इस फाइल को लेकर फिर से बैठक होगी। बैठक में अगर तटबंध की जरूरत से जुड़ा पक्ष मजबूती से रखा गया तो फाइल को मंजूरी मिलने की पूरी संभावना है।
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ये गांव हैं गंगा तट पर
गंगा किनारे कुंदनपुर, टीप, फतेहपुर, सिमली, मिर्जापुर, कोहरपुर, राजारामपुर, रघुनाथपुर, डेबलगढ़, चाहड़वाला, वीरूवाला, रावली, ब्रह्मपुरी, सुक्खापुर, सैफपुर, सिकोहाबाद, सिमली खुर्द, स्योहारा, मागनवाला, मीरापुर, औरंगाबाद, शकूरपुर उर्फ गीदड़पुरा, बादशाहपुर, मानशाहपुर, भोगपुर, शहजादपुर, इच्छावाला आदि गांव बसे हुए हैं। भाकियू के युवा मंडल अध्यक्ष राजेेंद्र सिंह के अनुसार इसी सप्ताह में लखनऊ में मुख्यमंत्री की बैठक के बारे में पता चला है। कटान निरोधी संबंधी परियोजना को मंजूरी मिल जानी चाहिए। यह हजारों खादरवालों के भविष्य का सवाल है।
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बिजनौर। गंगा के कटान से निजात दिलाने के लिए तटबंध का किसानों को दीपावली पर तोहफा मिल सकता है। इस फाइल को मुख्यमंत्री के सामने अक्तूबर के आखिर या नवंबर की शुरूआत में रखा जाएगा। पिछले साल भी इस फाइल को मंजूरी नहीं मिली थी। किसानों के आंदोलन को देखते इस बार प्रशासन तटबंध बनाने की योजना को मंजूरी दे सकता है। इस कार्य के होने से गंगा किनारे बसे 28 गांवों को कटान से निजात मिल जाएगी।
गंगा के कटान से खादर क्षेत्र बसे गांव वाले परेशान हैं। बालावाली से रावली तक गंगा किनारे 28 गांव बसे हैं। गांव वालों का दावा है कि गंगा के कटान से उनकी करीब दो लाख बीघा जमीन बह चुकी है। इस जमीन का आज तक कोई मुआवजा भी नहीं मिला है। गंगा किनारे कटान निरोधी कार्य कराने के लिए गंगा इन गांव वालों ने एक महीने से ज्यादा समय तक आंदोलन भी किया था। किसानों ने परिवार की महिलाओं व बच्चों सहित गंगा की धारा में खड़े होकर धरना दिया था। उनका कहना है कि गंगा की धारा पांच किलोमीटर चौड़ी हो गई है। वे धारा के बीच में खाली जमीन पर खेती कर रहे हैं।
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किसानों का कहना है कि जमीन के लिए उनका दूसरे जिले के किसानों से विवाद भी रहने लगा है। गंगा के कटान से निजात दिलाने को कटान निरोधी कार्य की परियोजना काफी पहले बन चुकी है। परियोजना में 61 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। परियोजना को उत्तर प्रदेश बाढ़ राज्य नियंत्रण परिषद की तीन समितियों से मंजूरी मिल चुकी है। यह फाइल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय में पिछले साल नवंबर में रखी जा चुकी थी। किसानों के आंदोलन के बाद इस प्रस्तावों को मंजूरी दिलाने के लिए प्रशासन स्तर से भी शासन को पत्र लिखा गया था। इस महीने अंत या नवंबर की शुरूआत में इस फाइल को लेकर फिर से बैठक होगी। बैठक में अगर तटबंध की जरूरत से जुड़ा पक्ष मजबूती से रखा गया तो फाइल को मंजूरी मिलने की पूरी संभावना है।
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ये गांव हैं गंगा तट पर
गंगा किनारे कुंदनपुर, टीप, फतेहपुर, सिमली, मिर्जापुर, कोहरपुर, राजारामपुर, रघुनाथपुर, डेबलगढ़, चाहड़वाला, वीरूवाला, रावली, ब्रह्मपुरी, सुक्खापुर, सैफपुर, सिकोहाबाद, सिमली खुर्द, स्योहारा, मागनवाला, मीरापुर, औरंगाबाद, शकूरपुर उर्फ गीदड़पुरा, बादशाहपुर, मानशाहपुर, भोगपुर, शहजादपुर, इच्छावाला आदि गांव बसे हुए हैं। भाकियू के युवा मंडल अध्यक्ष राजेेंद्र सिंह के अनुसार इसी सप्ताह में लखनऊ में मुख्यमंत्री की बैठक के बारे में पता चला है। कटान निरोधी संबंधी परियोजना को मंजूरी मिल जानी चाहिए। यह हजारों खादरवालों के भविष्य का सवाल है।