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एक करोड़ के घाटे में गांधी आश्रम केंद्रीय वस्त्रागार

Fri, 30 Sep 2022 12:13 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 30 Sep 2022 12:13 AM IST
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Gandhi Ashram Central Textile at a loss of one crore
विरान पड़ा धामपुर में स्थित श्रीगांधी आश्रम केंद्रीय वस्त्रागार - फोटो : DHAMPUR
एक करोड़ के घाटे में गांधी आश्रम केंद्रीय वस्त्रागार
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धामपुर। श्री गांधी आश्रम केंद्रीय वस्त्रागार (जैतरा) शासन की उपेक्षा के कारण दम तोड़ने के कगार पर है। दो दशक पहले वस्त्रागार का वार्षिक टर्न ओवर 16 करोड़ रुपये था, जो अब घटकर चार करोड़ रह गया है। वर्तमान में वस्त्रागार एक करोड़ के घाटे में है। कर्मियों की संख्या भी 60 से घटकर 15 हो गई, इन्हें भी समय पर वेतन नहीं मिल रहा है।
प्रबंधक तेजबहादुर राजपूत का कहना है कि ऐसा ही हाल रहा तो वस्त्रागार जल्द ही बंद हो जाएगा। दो अक्तूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती को धूमधाम से मनाने की तैयारी हो रही है। वहीं, धामपुर में स्थित श्री गांधी आश्रम केंद्रीय वस्त्रागार और वस्त्रागार में कार्यरत कर्मचारी अपनी बदहाली का रोना रो रहे हैं। सरकार से बार-बार मांग करने के बाद भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। पहले यह केंद्रीय वस्त्रागार मुरादाबाद में हुुआ करता था। साल 1975 में यह मुरादाबाद से अलग होकर धामपुर में स्थापित हो गया। उस समय खादी की मांग ज्यादा थी, लोग खादी के कपड़ों को पहनना ज्यादा पसंद करते थे। लेकिन वर्तमान में सरकारों की उपेक्षा के कारण यह उद्योग दम तोड़ने के कगार पर है।
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अब न माल और न काम करने वाले कर्मचारी
प्रबंधक का कहना है कि महंगाई के दौर में लोग खादी को भूलते जा रहे हैं। लोगों ने अन्य प्रकार के कपड़ों को पसंद करना शुरू कर दिया है। स्वदेशी केवल कहने की बात रह गई है। वस्त्रागार में आज के दौर में न माल है और न ही काम करने वाले कर्मचारी। पहले यहां से माल का आयात और निर्यात ट्रेन से होता था। कई वाहन सड़क मार्गों से माल को ढोने का काम करते थे। लेकिन अब केवल एक ही छोटा वाहन है, वह भी माल न होने के कारण वस्त्रगार में खड़ा रहता है।
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एक तो खादी महंगी , दूसरे जीएसटी की मार
प्रबंधक का कहना है कि एक तो खादी के उत्पाद पहले से ही महंगे हैं। दूसरे सरकार की ओर से 15 से लेकर 18 प्रतिशत जीएसटी लगने से ग्राहक खादी के उत्पादों की ओर से रुख नहीं करता। ऐसे में काम न होने से कर्मचारी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं। सरकार उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रही। कपास का रेट पिछले साल 150 रुपये प्रति किलो था। इस बार और महंगाई बढ़ने से 200 रुपये प्रति किलो हो गया है।

धामपुर में स्थित श्री गांधी आश्रम केंद्रीय वस्त्रागार  का मुख्यद्वार

धामपुर में स्थित श्री गांधी आश्रम केंद्रीय वस्त्रागार का मुख्यद्वार- फोटो : DHAMPUR

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