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Bijnor News: उत्तर दिशा से कटान की जद में गलखा देवी मंदिर

Sun, 30 Aug 2026 12:44 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 30 Aug 2026 12:44 AM IST
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Galkha Devi Temple under the threat of erosion from the north
चंदक/बिजनौर। गंगा जब जलस्तर बढ़ाती है तो बाढ़ का डर सताता है और जब पानी उतरता है तो कटान का खतरा सामने खड़ा हो जाता है। बिजनौर में गंगा की यही दोहरी मार दशकों से खादर के लोगों की जिंदगी का हिस्सा बनी हुई है। अब इस कटान की धार मंडावर क्षेत्र के महाभारतकालीन मां गलखा देवी मंदिर की ओर बढ़ रही है। मंदिर परिसर में स्थित गोरखनाथ मंदिर से गंगा की धार महज 10 से 15 मीटर दूर रह गई है। जिस तेजी से कटान हो रहा है, उससे अगले सप्ताह तक गंगा के मंदिर के और नजदीक पहुंचने का अंदेशा है।
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गंगा की धार इन दिनों मंडावर खादर से गौसपुर खादर तक कृषि भूमि को काट रही है। मंदिर को बचाने के लिए शासन स्तर से लाखों रुपये खर्च कर पत्थरों के स्टड बनाए गए थे। मिट्टी से भरे कट्टे भी लगाए गए, लेकिन गंगा की धारा ने रास्ता बदल लिया। अब मंदिर की उत्तर दिशा से कटान हो रहा है। बीते दिनों आसपास के पेड़ काटकर भी धारा में डाले गए, लेकिन गंगा की धार पर इसका भी कोई असर नहीं पड़ा। ग्रामीणों के सामने अब सवाल सिर्फ खेत बचाने का नहीं, बल्कि ऐतिहासिक मंदिर को बचाने का भी है।
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n पिछले साल भी कटान की चपेट में आया था मंदिर परिसर : गंगा की धार गलखा देवी मंदिर परिसर में स्थित गोरखनाथ मंदिर तक पहुंच चुकी है। पिछले वर्ष भी यह मंदिर गंगा की धारा की चपेट में आ गया था। इस बार फिर कटान शुरू होने से मंदिर परिसर पर खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अस्थायी इंतजाम हर साल किए जाते हैं, लेकिन गंगा का रुख बदलते ही उनकी पोल खुल जाती है। जरूरत ऐसी योजना की है, जो धारा को बार-बार बदलने के बजाय स्थायी रूप से कटान से बचाव कर सके।
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n आजादी के बाद सबसे पहले नांदनौर गंगा में समाया था : साल 1957 में चांदपुर तहसील का गांव नांदनौर गंगा में बह गया था। इस गांव को खानपुर में आबाद किया गया था। इसके बाद चांदपुर तहसील के गांव जाफराबाद और जहांगीरपुर गांव भी गंगा में जलसमाधि ले चुके थे। इसके बाद वर्ष 1964 में आई गंगा की बाढ़ में विदुरकुटी के सामने आबाद गांव भुआ, बेला, शेरपुर, लीलावली, हरिपुर, श्रीजीपुर, गांवड़ी, खेड़ा, धूधली खादर गंगा में डूब गए थे।
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