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रम गए दक्षिण भारत से आए गजराज
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Mon, 15 May 2017 12:18 AM IST
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कालागढ़ में कार्बेट टाइगर रिजर्व में कर्नाटक से आए गजराज उत्तराखंड के वातावरण में रम गए हैं। हाथियों को अब कार्बेट टाइगर रिजर्व के वनों में भ्रमण कराया जा रहा है। कालागढ़ के उप प्रभागीय वनाधिकारी आरके तिवारी का कहना है कि इन हाथियों को कार्बेट टाइगर रिजर्व की अलग अलग रेंज में तैनाती दिए जाने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
25 फरवरी को कर्नाटक से उत्तर भारत के उत्तराखंड राज्य के लिए पहुंचे नौ हाथी अब यहां के वातावरण में पूरी तरह से रम गए है। इनकी सेहत पर यहां न ठंड का और न ही गर्मी का असर है। बकौल वन अधिकारियों के कालागढ़ क्षेत्र का भोजन ग्रहण करने की आदत अब इनकी बन गयी है। इनका स्वास्थ्य भी पहले से बेहतर हो गया है।
कार्बेट टाइगर रिजर्व के कालागढ़ के उप प्रभागीय वन अधिकारी आरके तिवारी का कहना है कि यह हाथी पहले धान, पुआल, पैड़ी, रागी जो दक्षिण भारत के भोजन थे वहां से लाकर इन्हें खिलाए जा रहे थे। अब यह यहां का भोजन करने लगे है। अब यह गेहूं, मक्का, दलिया, रोटी व हरा चारा खा रहे हैं। पहले रोटी नहीं खाते थे। यह चारा खाने से यह पहले से अधिक स्वस्थ है। अब इन्हें वनों में भी ले जाया जा रहा है। लिए कार्बेट टाइगर रिजर्व के नौ महावत व दो ट्रेनर लगाए गए हैं।
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25 फरवरी को कर्नाटक से उत्तर भारत के उत्तराखंड राज्य के लिए पहुंचे नौ हाथी अब यहां के वातावरण में पूरी तरह से रम गए है। इनकी सेहत पर यहां न ठंड का और न ही गर्मी का असर है। बकौल वन अधिकारियों के कालागढ़ क्षेत्र का भोजन ग्रहण करने की आदत अब इनकी बन गयी है। इनका स्वास्थ्य भी पहले से बेहतर हो गया है।
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कार्बेट टाइगर रिजर्व के कालागढ़ के उप प्रभागीय वन अधिकारी आरके तिवारी का कहना है कि यह हाथी पहले धान, पुआल, पैड़ी, रागी जो दक्षिण भारत के भोजन थे वहां से लाकर इन्हें खिलाए जा रहे थे। अब यह यहां का भोजन करने लगे है। अब यह गेहूं, मक्का, दलिया, रोटी व हरा चारा खा रहे हैं। पहले रोटी नहीं खाते थे। यह चारा खाने से यह पहले से अधिक स्वस्थ है। अब इन्हें वनों में भी ले जाया जा रहा है। लिए कार्बेट टाइगर रिजर्व के नौ महावत व दो ट्रेनर लगाए गए हैं।
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