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शगुन में ससुराल से नागरिकता मांग रहीं विदेशी बहुएं

Wed, 19 Oct 2022 12:42 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 19 Oct 2022 12:42 AM IST
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Foreign daughters-in-law seeking citizenship from in-laws in Shagun
शगुन में ससुराल से नागरिकता मांग रहीं विदेशी बहुएं
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बिजनौर। शादी होकर ससुराल आने वाली बहुओं के तमाम अरमान होते हैं, लेकिन विदेश से ब्याह कर लाई गईं बहुओं को शगुन में सिर्फ नागरिकता की चाहत है। फिलहाल जिले में लॉंग टर्म वीजा पर 15 बहुएं रह रही हैं। जिनमें सात ने नागरिकता के लिए आवेदन कर रखा है।
1947 में देश का बंटवारा हुआ। भारत और पाकिस्तान के बीच बॉर्डर की दीवार खड़ी हो गई। देश अलग-अलग हो गए, फिर भी लोगों का नाता बना रहा। कुछ लोग इधर से उधर गए तो कुछ यहीं पर रह गए। इनमें रिश्तेदारी या पारिवारिक रिश्ते बने रहे। अलग-अलग देश होने के बाद शादी-ब्याह से गुरेज नहीं किया। आजादी से अब तक जिले में बहू बनकर्र आइं पाकिस्तान की नौ बेटियों को नागरिकता मिल चुकी है। हालांकि इन्हें शर्तों का पालन करना पड़ा। अब 15 बहूं ऐसी हैं जो लॉग टर्म वीजा पर यहां ससुराल में रह रही हैं।
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इनमें सात बहुओं ने नागरिकता के लिए आवेदन किया है, अभी आठ साल की अवधि पूरी नहीं हुई है। पाकिस्तान के अलावा एक बहू बांग्लादेश और एक यूएस से भी आई है। बिजनौर शहर में पांच, मंडावली में एक, चांदपुर में दो, नजीबाबाद में एक, कोतवाली देहात में एक, किरतपुर में एक, स्योहारा में दो, नगीना में दो और नहटौर में एक बहू वीजा के सहारे ससुराल में रह रही है। (संवाद)
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पहली बार में मिलता है पांच साल का वीजा
पाकिस्तान से जिले में ब्याहकर आईं बहुओं के लिए पहली बार में पांच साल का भारत सरकार वीजा देती है। पांच साल के बाद दो साल का वीजा मिलता है। इसके बाद दो-दो साल के लिए नवीनीकरण किया जाता है। वीजा पर सात साल पूरे होने के बाद नागरिकता के लिए आवेदन किया जा सकता है। इसमें शर्त ये भी है कि आठवें साल में एक बार भी मायके नहीं गई हो। हालांकि शुरुआती सात सालों में मायके आ जा सकती हैं।

समय के साथ बढ़ती गईं दूरियां
समय के साथ दोनों देशों के लोगों के बीच भी दूरियां बढ़ती गईं और मेलजोल घटता गया। आंकड़े इसे तस्दीक करने के लिए काफी हैं। बता दें कि आजादी से लेकर साल 1990 तक पाकिस्तान से काफी लोग यहां अपने रिश्तेदारों या सगे संबंधियों से मिलने आते रहे हैं। उस दौर में एक साल में अधिकतम 24 हजार पाकिस्तानी भी बिजनौर आए हैं। साल 1990 के बाद यह ग्राफ कम होता गया। अब इस साल केवल छह पाकिस्तानी ही अपनी रिश्तेदारी में बिजनौर आ सके।
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