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Bijnor News: आबादी में घुसा बाढ़ का पानी, गांव छोड़ गए महिला और बच्चे
Thu, 13 Jul 2023 12:45 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Thu, 13 Jul 2023 12:45 AM IST
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मंडावर क्षेत्र के गांव हिम्मतपुर बेला में भरा पानी।
- रात में डर की वजह से छत पर सोने को मजबूर ग्रामीण, लगाई मदद की गुहार
- बाढ़ का पानी भरा होने से गांव में बीमारियों के फैलने का भी खतरा
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडावर (बिजनौर)। जिले के गांव रामसहायवाला और हिम्मतपुर बेला में बाढ़ का सबसे ज्यादा प्रकोप है। गांव वालों ने खतरा देख परिवार की महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया है। सामान की रखवाली करने के लिए कुछ ही लोग गांव में रह गए हैं। कई दिनों से गांव में बाढ़ के हालात बने हुए हैं, लेकिन अभी तक प्रशासन की मदद नहीं पहुंची है।
गांव रामसहायवाला, हिम्मतपुर बेला और इच्छावाला गंगा के दूसरे छोर पर बसे हुए हैं। इनमें जाने के लिए कोई सीधा रास्ता बिजनौर से नहीं है। हालांकि डैबलगढ़ में पीपे का पुल बनने के बाद सिर्फ छह महीने के लिए सीधा रास्ता हो जाता है। बाकी समय इन्हें नाव का सहारा लेना पड़ता है।अब गंगा उफान पर आई तो इन तीनों गांवों में सबसे पहले पानी घुस गया। गांव हिम्मतपुर बेला की बात करें तो इस गांव की आबादी करीब ढाई सौ है। गांव के रास्तों पर पानी भरा हुआ है। गांव में पानी भरता देख लोगों ने परिवार की महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया है।
इन गांवों के लोग पूरे साल का अनाज अपने घरों में नहीं रखते हैं। बरसात से पहले ये लोग अनाज को सुरक्षित स्थानों पर रख आते हैं। बरसात के दिनों में कुछ ही महीनों का अनाज इनकी झोपड़ियों में होता है। अब जो बचा हुआ अनाज था, बाढ़ का पानी भरने से खराब हो गया है। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि चारे का संकट बन गया है। कुछ और दिन संपर्क कटा रहा तो खाने के भी लाले पड़ जाएंगे।
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कोई बीमार पड़ा तो नहीं मिलेगा इलाज
गांव में बाढ़ का पानी भरने से संक्रमित बीमारियों के फैलने का खतरा बना हुआ है। अब पानी भरा होने के चलते अगर कोई ग्रामीण बीमार पड़ा तो समय पर इलाज भी नहींं मिल सकेगा। गांव वालों ने एक नाव की मांग उठाई है। जिससे आपातकाल में गंगा पार जाया जा सके।
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- बाढ़ का पानी भरा होने से गांव में बीमारियों के फैलने का भी खतरा
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडावर (बिजनौर)। जिले के गांव रामसहायवाला और हिम्मतपुर बेला में बाढ़ का सबसे ज्यादा प्रकोप है। गांव वालों ने खतरा देख परिवार की महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया है। सामान की रखवाली करने के लिए कुछ ही लोग गांव में रह गए हैं। कई दिनों से गांव में बाढ़ के हालात बने हुए हैं, लेकिन अभी तक प्रशासन की मदद नहीं पहुंची है।
गांव रामसहायवाला, हिम्मतपुर बेला और इच्छावाला गंगा के दूसरे छोर पर बसे हुए हैं। इनमें जाने के लिए कोई सीधा रास्ता बिजनौर से नहीं है। हालांकि डैबलगढ़ में पीपे का पुल बनने के बाद सिर्फ छह महीने के लिए सीधा रास्ता हो जाता है। बाकी समय इन्हें नाव का सहारा लेना पड़ता है।अब गंगा उफान पर आई तो इन तीनों गांवों में सबसे पहले पानी घुस गया। गांव हिम्मतपुर बेला की बात करें तो इस गांव की आबादी करीब ढाई सौ है। गांव के रास्तों पर पानी भरा हुआ है। गांव में पानी भरता देख लोगों ने परिवार की महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया है।
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इन गांवों के लोग पूरे साल का अनाज अपने घरों में नहीं रखते हैं। बरसात से पहले ये लोग अनाज को सुरक्षित स्थानों पर रख आते हैं। बरसात के दिनों में कुछ ही महीनों का अनाज इनकी झोपड़ियों में होता है। अब जो बचा हुआ अनाज था, बाढ़ का पानी भरने से खराब हो गया है। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि चारे का संकट बन गया है। कुछ और दिन संपर्क कटा रहा तो खाने के भी लाले पड़ जाएंगे।
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कोई बीमार पड़ा तो नहीं मिलेगा इलाज
गांव में बाढ़ का पानी भरने से संक्रमित बीमारियों के फैलने का खतरा बना हुआ है। अब पानी भरा होने के चलते अगर कोई ग्रामीण बीमार पड़ा तो समय पर इलाज भी नहींं मिल सकेगा। गांव वालों ने एक नाव की मांग उठाई है। जिससे आपातकाल में गंगा पार जाया जा सके।